ईरान पर इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले के बाद ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई की मौत हो गई है। इसके बाद ईरान ने भी अपने हमले बढ़ा दिए हैं मध्यपूर्व के देशों पर भी ईरान ने हमले किए हैं। जिनमें सऊदी अरब, यूएई, ओमान, बहरीन, कतर, यमन शामिल हैं।
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बीच यदि क्षेत्रीय संघर्ष लंबा खिंचता है और रणनीतिक रूप से बेहद अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत पर भी पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से देश में पेट्रोल-डीजल, शेयर बाजार और कीमती धातुओं के दाम प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
पेट्रोल-डीजल पर संभावित असर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, जिसमें बड़ी मात्रा खाड़ी देशों से इसी समुद्री मार्ग के जरिए आती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि तेल सप्लाई बाधित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में crude oil prices 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है, जबकि फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
युद्ध के दौरान तेल कीमतों में आए बदलाब
ऐसी स्थिति में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 95 प्रति लीटर से बढ़कर 105 तक और डीजल 88 से बढ़कर 96 प्रति लीटर तक पहुंच सकता है। हालांकि भारत में अंतिम खुदरा कीमतें तेल कंपनियां तय जरूर करती हैं, लेकिन टैक्स संरचना और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की भूमिका निर्णायक रहती है। संकट के समय सरकार टैक्स में कटौती या कंपनियों को मूल्य वृद्धि रोकने की सलाह भी दे सकती है।
सोना-चांदी में तेजी की संभावना
युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के दौर में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। कमोडिटी बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोने की कीमत 10 ग्राम पर 1.60 लाख रुपए से बढ़कर 1.90 लाख रुपए तक जा सकती है। वहीं चांदी, जो फिलहाल करीब 2.67 लाख रुपए प्रति किलो के आसपास है, बढ़कर 3.50 लाख रुपए तक पहुंच सकती है।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
करीब 167 किलोमीटर लंबा यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई की जीवनरेखा माना जाता है। इसके सबसे संकरे हिस्से की चौड़ाई लगभग 33 किलोमीटर है, जहां जहाजों के आवागमन के लिए सीमित शिपिंग लेन निर्धारित की गई है।
दुनिया के कुल पेट्रोलियम व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं।
भारत के गैर-तेल निर्यात का भी 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से पश्चिम एशिया और यूरोप तक पहुंचता है, जिसमें बासमती चावल, चाय, मसाले और इंजीनियरिंग उत्पाद शामिल हैं।
हर दिन करीब 1.78 करोड़ से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन इस रूट से वैश्विक बाजार तक पहुंचता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
भारत बनाम वेस्टइंडीज: भारत को पहली सफलता, साई होप 32 पर आउट, वेस्ट इंडीज का स्कोर 10 ओवर के बाद 80-1
भारत बनाम वेस्टइंडीज: भारत को पहली सफलता, साई होप 32 पर आउट, वेस्ट इंडीज का स्कोर 10 ओवर के बाद 80-1
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071157234z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-56.png)
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071151025z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-50.png)
/swadeshjyoti/media/media_files/2026/03/01/iran-war-trade-imapact-2026-03-01-20-18-44.jpg)
/swadeshjyoti/media/post_attachments/3db4feba-009.png)