प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर तीन दिन की यात्रा, रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 17 फरवरी से भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर आएंगे। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार इस यात्रा को दोनों देशों के बीच गहराते संबंधों और बढ़ते विश्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस दौरान शीर्ष नेतृत्व के बीच व्यापक वार्ता होगी, जिसमें भविष्य की साझेदारी को और सुदृढ़ करने पर जोर रहेगा।

होराइजन 2047 के तहत सहयोग पर चर्चा

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों होराइजन 2047 मार्गदर्शिका के अंतर्गत द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा करेंगे। रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा और निवेश जैसे अनेक क्षेत्रों में चल रही साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विस्तार से विचार-विमर्श होगा। दोनों देश दीर्घकालिक दृष्टि के साथ संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर मंथन

वार्ता में भारत-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े विषयों के साथ-साथ आपसी हित के कई वैश्विक मुद्दे भी शामिल रहेंगे। बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में दोनों देश स्थिरता, शांति और संतुलन को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने की दिशा में अपने समन्वय को और मजबूत करना चाहते हैं।

मुंबई में नवाचार वर्ष का उद्घाटन

राष्ट्रपति मैक्रों और प्रधानमंत्री मोदी मुंबई में संयुक्त रूप से भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का उद्घाटन करेंगे। यह आयोजन पूरे वर्ष दोनों देशों में मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य विज्ञान, अनुसंधान, शिक्षा, उद्यमिता और नई तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग को गति देना है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिखर सम्मेलन में भागीदारी

राष्ट्रपति मैक्रों 19 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रभाव शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। इस मंच पर उभरती तकनीकों, डिजिटल भविष्य और वैश्विक सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी। इसमें विभिन्न देशों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ भाग लेने वाले हैं।

पिछली यात्रा के बाद नया पड़ाव

यह दौरा प्रधानमंत्री मोदी की फरवरी 2025 में हुई फ्रांस यात्रा के बाद हो रहा है। उस यात्रा में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक बनाने की दिशा में कई निर्णय लिए थे। अब इस यात्रा को उन्हीं पहलों को आगे बढ़ाने और ठोस परिणामों में बदलने के रूप में देखा जा रहा है।

दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, जलवायु, शिक्षा और सांस्कृतिक संबंधों में लगातार विस्तार हुआ है। राष्ट्रपति मैक्रों की यह यात्रा इस बात का संकेत है कि भारत और फ्रांस आने वाले समय में वैश्विक मंच पर और अधिक समन्वित भूमिका निभाने के इच्छुक हैं।

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