नई दिल्ली में उच्चस्तरीय मुलाकात, सुरक्षा और स्थिरता के लिए साझा प्रतिबद्धता

नई दिल्ली, 10 फरवरी। भारत की यात्रा पर आए सेशेल्स के विदेश मंत्री जनरल माइकल एंसेलम मार्क रोसेट से मंगलवार को रक्षा सचिव Rajesh Kumar Singh ने नई दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक में हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को नई मजबूती देने पर विस्तार से चर्चा हुई।

बढ़ते सुरक्षा सहयोग की समीक्षा

वार्ता में भारत और सेशेल्स के बीच तेजी से विकसित हो रहे रक्षा और सुरक्षा संबंधों का आकलन किया गया। दोनों देशों ने माना कि समुद्री क्षेत्र में उभरती चुनौतियों को देखते हुए आपसी तालमेल और भी जरूरी हो गया है। साझा हितों की रक्षा के लिए समन्वित प्रयास ही स्थायी समाधान दे सकते हैं।

संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण पर सहमति

दोनों पक्षों ने सशस्त्र बलों के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास लामित्ये और क्षमता निर्माण से जुड़ी पहलों का स्वागत किया। यह माना गया कि ऐसे अभ्यास न केवल पारस्परिक विश्वास बढ़ाते हैं बल्कि संचालन क्षमता को भी मजबूत करते हैं। प्रशिक्षण, विशेषज्ञता साझा करने और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

प्रशिक्षण और समुद्री सहयोग पर चर्चा

बैठक के दौरान प्रशिक्षण, हाइड्रोग्राफी, जहाजों और वायुयान यात्राओं, प्रतिनिधिमंडल स्तर की आवाजाही तथा समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। रक्षा सचिव ने अंतरराष्ट्रीय बेड़े की समीक्षा तथा अगले सप्ताह विशाखापट्टनम में आयोजित होने वाले समुद्री अभ्यास मिलन में सेशेल्स की भागीदारी का स्वागत किया।

साझा विकास दृष्टि पर जोर

दोनों पक्षों ने सभी क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया। यह माना गया कि समावेशी और सहयोगात्मक दृष्टिकोण से ही क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती मिल सकती है। समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण और विकास साझेदारी को भविष्य की रणनीति का अहम आधार बताया गया।

भविष्य की साझेदारी की रूपरेखा

वार्ता में रक्षा और सुरक्षा सहयोग के आने वाले रास्तों पर भी विचार किया गया। मुख्य सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण में दीर्घकालिक साझेदारी को महत्वपूर्ण माना गया। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि निरंतर संवाद, संयुक्त प्रयास और भरोसे पर आधारित संबंध ही बदलते वैश्विक परिदृश्य में मजबूती प्रदान करेंगे।

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