सीबीआई सम्मेलन में गृह मंत्री का सख्त संदेश

नई दिल्ली, 10 फरवरी। देश में तेजी से बढ़ती डिजिटल गतिविधियों के बीच साइबर अपराधों का खतरा भी उसी गति से फैल रहा है। इस गंभीर चुनौती को रेखांकित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ प्रश्न बन चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस और समन्वित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में यह स्थिति बड़े साइबर संकट का रूप ले सकती है।

डेटा सुरक्षा अब सर्वोच्च प्राथमिकता

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए गृह मंत्री ने देश के डेटा को हर हाल में सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया। सम्मेलन का विषय साइबर सक्षम धोखाधड़ी से निपटना और उसके पूरे तंत्र को ध्वस्त करना रखा गया है। इसी मंच से नए साइबर अपराध प्रकोष्ठ का उद्घाटन भी किया गया, साथ ही भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के अंतर्गत राज्य स्तरीय समन्वय डैशबोर्ड की शुरुआत की गई, जिससे विभिन्न एजेंसियों के बीच त्वरित संवाद और कार्रवाई संभव हो सके।

समन्वय से ही मिलेंगे परिणाम

अमित शाह ने कहा कि अलग-अलग विभागों और संस्थाओं के प्रयास जब एक दिशा में आगे बढ़ते हैं, तभी परिणाम प्रभावी मिलते हैं। साइबर अपराधियों के नेटवर्क बहुस्तरीय और तकनीकी रूप से उन्नत होते जा रहे हैं, इसलिए उनके खिलाफ लड़ाई भी उतनी ही संगठित और आधुनिक होनी चाहिए। उन्होंने पिछले वर्षों की डिजिटल यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश में डिजिटल सेवाओं का विस्तार अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुका है और यही विस्तार अपराधियों के लिए नए अवसर भी पैदा कर रहा है।

डिजिटल विस्तार के साथ बढ़ी चुनौती

गृह मंत्री ने बताया कि पहले जहां डिजिटल सेवाओं के उपयोगकर्ताओं की संख्या सीमित थी, वहीं अब यह आंकड़ा सौ करोड़ से अधिक हो चुका है। इंटरनेट डेटा की कीमतों में भारी गिरावट आई है और दुनिया के लगभग हर दूसरे डिजिटल लेन-देन में भारत की भागीदारी है। इतनी बड़ी संख्या में बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और संस्थागत सूचनाओं की सुरक्षा करना एक विशाल जिम्मेदारी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हजारों करोड़ की धोखाधड़ी पर कार्रवाई

उन्होंने सीबीआई की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए बताया कि हाल के वर्षों में बीस हजार करोड़ रुपये से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों की जांच की गई है, जिनमें से आठ हजार करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज करने में सफलता मिली। इसके अलावा लाखों सिम कार्ड रद्द कराए गए हैं ताकि अपराधियों की संचार व्यवस्था को तोड़ा जा सके। हजारों साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी भी हुई है, जो यह दिखाती है कि एजेंसियां सक्रिय हैं, लेकिन चुनौती अभी भी बड़ी है।

शिकायतों की बाढ़ और त्वरित प्रतिक्रिया की जरूरत

अमित शाह ने साइबर शिकायतों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लाखों की संख्या में शिकायतें दर्ज हो रही हैं और कई मामलों में रकम बेहद बड़ी है। एक ही मामले में हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आना इस बात का संकेत है कि अपराधी कितनी संगठित तैयारी के साथ काम कर रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसियों, बैंकों और दूरसंचार तंत्र के बीच तेज और भरोसेमंद तालमेल अनिवार्य हो जाता है।

म्यूल खातों का बढ़ता जाल

म्यूल खातों का मुद्दा उठाते हुए गृह मंत्री ने कहा कि फर्जी खातों की खरीद-फरोख्त अब सेवा की तरह होने लगी है। यह प्रवृत्ति बेहद खतरनाक है क्योंकि इसके जरिए अपराधी अपनी पहचान छिपाकर आसानी से धन का प्रवाह कर लेते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए तैयार किए गए विशेष अनुप्रयोग को सभी सरकारी और निजी बैंकों द्वारा अपनाया जाना चाहिए, तभी इसका अपेक्षित लाभ मिलेगा।

1930 हेल्पलाइन की साख दांव पर

उन्होंने 1930 हेल्पलाइन को आम नागरिक के भरोसे का केंद्र बताते हुए कहा कि इसका रिस्पांस टाइम बेहद कम होना चाहिए। यदि पीड़ित समय पर संपर्क करता है और सहायता नहीं मिलती, तो पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। हर घंटे बड़ी संख्या में लोग साइबर अपराध का शिकार हो रहे हैं, इसलिए तत्काल कार्रवाई ही नुकसान को कम कर सकती है।

मिलकर ही रुकेगा साइबर संकट

गृह मंत्री ने यह भी बताया कि सैकड़ों संस्थान पहले से समन्वय तंत्र से जुड़ चुके हैं, लेकिन अभी और अधिक भागीदारी की आवश्यकता है। उन्होंने बैंकों से आग्रह किया कि वे केवल खराब ऋण घटाने पर ध्यान न दें, बल्कि ग्राहक सुरक्षा और सेवा की गुणवत्ता को भी उतनी ही प्राथमिकता दें। साइबर सुरक्षा में लापरवाही अंततः वित्तीय व्यवस्था पर भारी पड़ सकती है।

सम्मेलन में बदलते साइबर खतरों, वित्तीय तंत्र पर हमलों, दूरसंचार नेटवर्क के दुरुपयोग और मानव कमजोरियों का फायदा उठाने के तरीकों पर गहन चर्चा हुई। जांच प्रक्रिया को और मजबूत बनाने, पीड़ित केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने और तकनीकी साधनों के बेहतर उपयोग पर बल दिया गया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विश्लेषण, त्वरित धन ट्रैकिंग और साक्ष्य संरक्षण जैसे विषयों पर भी विस्तार से मंथन हुआ।

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