सड़क और रेल संपर्क को नई दिशा, पूर्वोत्तर के विकास को मिलेगा बड़ा बल

मंत्रिमंडल की स्वीकृति से परियोजना को गति

नई दिल्ली, 14 फ़रवरी (हि.स.)। असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे ट्विन ट्यूब सुरंग निर्माण के प्रस्ताव को केंद्रीय स्तर पर स्वीकृति मिल गई है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने इस महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी प्रदान की। इस फैसले की जानकारी केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में पत्रकारों को दी। इस परियोजना को पूर्वोत्तर में संपर्क व्यवस्था और सामरिक मजबूती के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत की पहली, दुनिया की दूसरी पहल

परियोजना के तहत ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 15.79 किलोमीटर लंबी सड़क-सह-रेल सुरंग बनाई जाएगी। यह अपने प्रकार की भारत की पहली और दुनिया की दूसरी ऐसी अंडरवाटर संरचना होगी, जहां सड़क और रेल दोनों की आवाजाही संभव होगी। पूरी परियोजना की लंबाई लगभग 33.7 किलोमीटर निर्धारित की गई है।

गोहपुर से नुमालीगढ़ तक तेज संपर्क

यह सुरंग गोहपुर से नुमालीगढ़ तक चार लेन की नियंत्रित पहुंच वाली नई संपर्क सुविधा उपलब्ध कराएगी। इससे क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा और लोगों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम पड़ेगी। वर्तमान में सिलघाट के पास कालीभम्भोरा पुल से होकर जो यात्रा लगभग 240 किलोमीटर की होती है, वह काफी घट जाएगी और करीब छह घंटे का समय बचेगा।

व्यय और निर्माण व्यवस्था

परियोजना की अनुमानित पूंजी लागत 18,662 करोड़ रुपये तय की गई है। इसे अभियांत्रिकी, खरीद और निर्माण प्रणाली के तहत विकसित किया जाएगा। इस ढांचे के माध्यम से समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने की योजना है।

कई राज्यों को मिलेगा लाभ

इस सुरंग के बन जाने से असम के साथ अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों को भी सीधा फायदा मिलेगा। बेहतर संपर्क से व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों में तेजी आएगी। क्षेत्रीय एकीकरण को भी मजबूती मिलेगी।

माल ढुलाई और उद्योग को बढ़ावा

नई व्यवस्था से माल परिवहन अधिक कुशल होगा और ढुलाई लागत में कमी आएगी। इससे उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा तथा निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। राष्ट्रीय राजमार्गों के महत्वपूर्ण हिस्सों और रेलवे मार्गों के बीच बेहतर जुड़ाव स्थापित होगा।

आर्थिक और सामाजिक केंद्रों का विस्तार

परियोजना से अनेक आर्थिक, सामाजिक और पर्यटन केंद्र आपस में जुड़ेंगे। बड़े रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे और अंतर्देशीय जलमार्ग भी इस नेटवर्क का हिस्सा बनेंगे। इससे क्षेत्र की समग्र गतिविधियों में व्यापक परिवर्तन की उम्मीद की जा रही है।

रोजगार सृजन की संभावना

निर्माण के दौरान और उसके बाद भी बड़े पैमाने पर रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों मानव दिवस के काम के अवसर बनेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं को काम के नए विकल्प प्राप्त होंगे।

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