3.5 लाख से अधिक संदिग्ध दावे रद
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में हो रहे फर्जीवाड़े पर बीते दो वर्षों में बड़ी कार्रवाई करते हुए 630 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी क्लेम को ब्लॉक किया है। सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स, फ्लाइंग स्क्वॉड और सख्त निगरानी तंत्र के जरिए 3.5 लाख से अधिक संदिग्ध दावों को रद कर सार्वजनिक धन की बड़ी बचत सुनिश्चित की है।
एआई आधारित अलर्ट सिस्टम लागू किया
स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, आयुष्मान भारत जैसी देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना में कुछ अस्पतालों और नेटवर्क प्रदाताओं द्वारा फर्जी भर्ती, अनावश्यक इलाज, एक ही मरीज पर बार-बार क्लेम और बिना इलाज के भुगतान जैसे मामलों की शिकायतें सामने आ रही थीं। इन्हीं को रोकने के लिए सरकार ने डेटा एनालिटिक्स और एआई आधारित अलर्ट सिस्टम लागू किया, जो असामान्य पैटर्न वाले क्लेम को तुरंत चिन्हित कर लेता है।
एआई सिस्टम यह जांच करता है कि क्या एक ही अस्पताल से असामान्य रूप से अधिक क्लेम आ रहे हैं, इलाज की अवधि और बीमारी में तार्किक मेल है या नहीं एक ही लाभार्थी के नाम पर बार-बार दावे तो नहीं किए जा रहे, फ्लाइंग स्क्वॉड की अचानक जांच, केंद्र और राज्य स्तर पर गठित फ्लाइंग स्क्वॉड ने संदिग्ध अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर अचानक निरीक्षण किए। कई मामलों में रिकॉर्ड में दर्शाए गए मरीज मौके पर मौजूद ही नहीं मिले, जबकि उनके नाम पर लाखों रुपये के क्लेम डाले गए थे। इसके बाद संबंधित अस्पतालों को डिसएम्पैनल, भुगतान रोका गया और कुछ मामलों में कानूनी कार्रवाई भी शुरू की गई।
लाभार्थियों के हक की रक्षा
सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई केवल वित्तीय अनुशासन के लिए नहीं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी बेहद जरूरी है। फर्जी क्लेम के कारण वास्तविक लाभार्थियों तक समय पर इलाज और संसाधन नहीं पहुंच पाते थे।
सरकार का संदेश: जीरो टॉलरेंस
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आयुष्मान भारत योजना में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के लिए जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। आने वाले समय में निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा, जिसमें रियल-टाइम मॉनिटरिंग, बायोमेट्रिक सत्यापन और राज्यों के साथ बेहतर समन्वय शामिल है।
आयुष्मान भारत: दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना
गौरतलब है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत देश के करोड़ों गरीब परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाता है। सरकार की इस सख्ती से न केवल योजना की विश्वसनीयता बढ़ी है, बल्कि यह भी संदेश गया है कि जनकल्याण योजनाओं में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।विशेषज्ञों का मानना है कि एआई और तकनीक आधारित यह मॉडल आने वाले समय में अन्य सरकारी योजनाओं में भी लागू किया जा सकता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही और मजबूत होगी।
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