गोवा में रैपिडो की महिला राइडर सिंधु कुमारी ने विदेशी महिला को सुरक्षित होटल पहुंचाकर पेश की मानवता की मिसाल

पणजी। तकनीक के दौर में जब लोग हर कदम पर मोबाइल और गूगल मैप्स पर निर्भर हैं, तब कभी-कभी तकनीक भी साथ छोड़ देती है। ऐसे ही एक हालात में गोवा की अंधेरी रात में एक विदेशी महिला अकेली, घबराई और रोती हुई सड़कों पर भटकती नजर आई। गूगल मैप्स ने रास्ता दिखाने से जवाब दे दिया था और आसपास मदद के लिए कोई नहीं था। उसी वक्त इंसानियत ने रास्ता दिखाया, जब रैपिडो की महिला राइडर सिंधु कुमारी ने साहस, संवेदनशीलता और मानवीयता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा अब पूरे देश में हो रही है।

यह घटना दक्षिण गोवा की है। रात करीब दस बजे का वक्त था। सड़कें सुनसान थीं और अंधेरा चारों ओर पसरा हुआ था। विदेशी महिला अपने होटल लौटने की कोशिश में पैदल ही निकल पड़ी थी, लेकिन रास्ता भटक गई। भाषा की दिक्कत, अनजान जगह और रात का सन्नाटा—इन सबने उसकी घबराहट को और बढ़ा दिया। वह सड़क किनारे खड़ी रो रही थी और मदद की आस लगाए इधर-उधर देख रही थी।

इंसानियत ने रोकी बाइक

उसी दौरान वहां से गुजर रही रैपिडो की महिला राइडर सिंधु कुमारी की नजर उस महिला पर पड़ी। हालात भांपते ही उन्होंने बिना किसी हिचक के अपनी बाइक रोकी। सिंधु ने सबसे पहले महिला को शांत किया और भरोसा दिलाया कि वह अब सुरक्षित है। यह कोई औपचारिक ड्यूटी नहीं थी, बल्कि एक इंसान का दूसरे इंसान के लिए खड़ा होना था।

सिंधु ने महिला से बातचीत कर उसकी परेशानी समझी। पता चला कि गूगल मैप्स सही दिशा नहीं दिखा पा रहा था और होटल काफी दूर था। रात के समय अकेले पैदल चलना महिला के लिए सुरक्षित नहीं था। ऐसे में सिंधु ने तुरंत फैसला लिया कि वह खुद उसे होटल तक छोड़ेंगी।

सुरक्षित होटल तक पहुंचाया

सिंधु ने विदेशी महिला को अपनी बाइक पर बैठाया और सावधानी से उसे होटल तक ले गईं। कुछ ही देर में वे महिला को सुरक्षित कोकोनट ग्रूव बीच रिसॉर्ट पहुंचाने में सफल रहीं। होटल पहुंचते ही महिला की घबराहट खुशी और राहत में बदल गई। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन इस बार डर के नहीं, बल्कि शुक्रगुजारी के।

यह पूरा घटनाक्रम साधारण लग सकता है, लेकिन आज के समय में, जब सुरक्षा और भरोसे को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं, यह घटना असाधारण बन जाती है। खासकर एक महिला राइडर का रात के समय किसी अनजान विदेशी महिला की मदद के लिए आगे आना समाज को एक मजबूत संदेश देता है।

मदद के बदले पैसे लेने से इनकार

सबसे ज्यादा दिल छू लेने वाली बात तब सामने आई, जब होटल पहुंचने के बाद विदेशी महिला ने सिंधु को पैसे देने चाहे। उसने बार-बार धन्यवाद कहा और मेहनताना देने की कोशिश की, लेकिन सिंधु ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि यह मदद पैसे के लिए नहीं थी। सिंधु ने सिर्फ अपना इंस्टाग्राम हैंडल साझा किया और कहा कि आगे कभी किसी तरह की परेशानी हो, तो बेझिझक संपर्क कर लेना।

यह व्यवहार लोगों के दिलों को छू गया। आज के दौर में, जब हर सेवा का मूल्य तय होता है, वहां बिना किसी स्वार्थ के मदद करना इंसानियत की सच्ची पहचान बन गया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी

इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया गया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। हजारों लोगों ने वीडियो को देखा, साझा किया और सिंधु कुमारी की तारीफ की। लोगों ने कमेंट्स में लिखा—“यही है असली भारत”, “रियल इंडिया”, “इंसानियत अभी जिंदा है”।

कई यूजर्स ने कहा कि इस तरह की कहानियां भारत की सकारात्मक छवि को दुनिया के सामने मजबूती से रखती हैं। खासकर विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर जो सवाल उठते रहते हैं, यह घटना उन आशंकाओं को काफी हद तक दूर करती है।

महिला सुरक्षा और समाज का भरोसा

यह घटना केवल एक राइडर और एक यात्री की नहीं है, बल्कि महिला सुरक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा बड़ा संदेश देती है। एक महिला राइडर का रात में अकेली विदेशी महिला की मदद करना यह दिखाता है कि समाज में संवेदनशीलता और साहस अभी भी मौजूद है।

गोवा जैसे पर्यटन राज्य में, जहां हर साल लाखों विदेशी पर्यटक आते हैं, ऐसी घटनाएं राज्य और देश दोनों की छवि को मजबूत करती हैं। यह बताती हैं कि भारत सिर्फ पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों की भूमि भी है।

तकनीक से आगे इंसानियत

गूगल मैप्स जैसी तकनीक भले ही उस रात फेल हो गई हो, लेकिन इंसानियत ने रास्ता दिखा दिया। सिंधु कुमारी का यह कदम यह याद दिलाता है कि हर समस्या का समाधान तकनीक में नहीं, बल्कि इंसान के भीतर मौजूद संवेदना में भी होता है।

यह कहानी सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं है, बल्कि एक प्रेरणा है—कि अगर हर व्यक्ति थोड़ी-सी जिम्मेदारी और साहस दिखाए, तो समाज कहीं ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बन सकता है।

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