सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का बड़ा खुलासा: सीमा पार आतंकी गतिविधियों पर सेना पूरी तरह अलर्ट
नई दिल्ली, 13 जनवरी (हि.स.)। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बावजूद पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। सीमा पार आतंकवाद को प्रोत्साहन देने की उसकी नीति एक बार फिर सामने आई है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नष्ट किए गए आतंकी प्रशिक्षण शिविरों में से आठ शिविर दोबारा सक्रिय हो चुके हैं, जिनमें 100 से 150 आतंकियों की मौजूदगी की आशंका जताई गई है। इसके बावजूद भारतीय सेना सीमा पार से संचालित आतंकी गतिविधियों को काबू में रखने के लिए पूरी तरह सतर्क और हाई अलर्ट पर है।
मानेकशॉ सेंटर में सेना प्रमुख का वार्षिक संवाददाता सम्मेलन
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को खुफिया सूत्रों से यह पुख्ता जानकारी मिली है कि एलओसी के पास छह और अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब दो आतंकी शिविर फिर से चालू कर दिए गए हैं। इन सभी शिविरों पर भारतीय सेना की पैनी नजर बनी हुई है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सेना पूरी तरह तैयार है।
#WATCH | Delhi: On Operation Sindoor, Indian Army Chief General Upendra Dwivedi says, "The first turning point was the 22-minute strike we carried out on the terror targets. Their decision-making cycle was completely disrupted, and it took them time to understand what was… pic.twitter.com/r95pZ0BDZB
— ANI (@ANI) January 13, 2026
ऑपरेशन सिंदूर: तीनों सेनाओं के तालमेल का उदाहरण
सेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर राजनीतिक नेतृत्व के स्पष्ट निर्देशों और कार्रवाई की पूरी स्वतंत्रता के साथ चलाया गया। यह ऑपरेशन थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच बेहतरीन तालमेल का उदाहरण रहा। पहलगाम आतंकी हमले के बाद सबसे उच्च स्तर पर यह तय कर लिया गया था कि आतंकवाद को निर्णायक और प्रभावी जवाब दिया जाएगा। इसी के तहत 7 मई को महज 22 मिनट में इस ऑपरेशन की शुरुआत की गई और 10 मई तक करीब 88 घंटे तक लगातार कार्रवाई चलती रही।
#WATCH | Delhi: On Operation Sindoor, Indian Army Chief General Upendra Dwivedi says, "The first turning point was the 22-minute strike we carried out on the terror targets. Their decision-making cycle was completely disrupted, and it took them time to understand what was… pic.twitter.com/r95pZ0BDZB
— ANI (@ANI) January 13, 2026
आतंकी ढांचे पर गहराई तक प्रहार
जनरल द्विवेदी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पार गहराई तक जाकर आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया। कुल 21 आतंकी शिविरों में से नौ को पूरी तरह नष्ट किया गया। इसके बाद पाकिस्तान की हर संभावित प्रतिक्रिया का सोच-समझकर और संतुलित तरीके से जवाब दिया गया। indication साफ था कि यदि पाकिस्तान ने कोई भी बड़ी गलती की, तो भारतीय सेना ग्राउंड ऑपरेशन शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार थी।
न्यूक्लियर बयानबाजी पर सेना प्रमुख की दो टूक
पाकिस्तान की ओर से की गई न्यूक्लियर बयानबाजी पर सेना प्रमुख ने साफ कहा कि डीजीएमओ स्तर की बातचीत में इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यूक्लियर को लेकर जो भी बयान सामने आए, वे पाकिस्तान के राजनीतिक नेताओं या स्थानीय स्तर पर दिए गए बयान थे। सेना की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के लगभग 100 आतंकियों को मार गिराया गया और सेना की तैयारी ऐसी थी कि हालात बिगड़ने पर तुरंत निर्णायक कार्रवाई की जा सकती थी।
#WATCH | Delhi: Responding to ANI's question regarding Operation Sindoor, Indian Army Chief General Upendra Dwivedi says, "As far as nuclear rhetoric is concerned, I would like to say that there was no discussion on nuclear in the DGMO talks and whatever nuclear rhetoric was… pic.twitter.com/TOjC3aPEwH
— ANI (@ANI) January 13, 2026
म्यांमार और नॉर्थ ईस्ट को लेकर सुरक्षा रणनीति
सेना प्रमुख ने म्यांमार में जारी अशांति पर भी बात की। उन्होंने बताया कि असम राइफल्स, भारतीय सेना और गृह मंत्रालय के बीच बहु-एजेंसी सुरक्षा ग्रिड सक्रिय है, जो नॉर्थ ईस्ट को किसी भी स्पिलओवर प्रभाव से बचाने के लिए लगातार काम कर रहा है। म्यांमार में दूसरे चरण के चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद है।
मणिपुर और नॉर्थ ईस्ट में हालात में सुधार
जनरल द्विवेदी ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट, विशेष रूप से मणिपुर में वर्ष 2025 के दौरान हालात में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। सुरक्षा बलों की तटस्थ, पारदर्शी और निर्णायक कार्रवाई के साथ-साथ सरकार की सक्रिय पहलों ने स्थिति को संभालने में अहम भूमिका निभाई है। डूरंड कप का शांतिपूर्ण आयोजन, सांस्कृतिक उत्सवों की वापसी और सितंबर 2025 में कुकी विद्रोही समूहों के साथ ऑपरेशनों का रुकना सकारात्मक संकेत हैं।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर कड़ा प्रहार
सेना प्रमुख ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद 10 मई से पश्चिमी फ्रंट और जम्मू-कश्मीर में हालात संवेदनशील जरूर हैं, लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में हैं। वर्ष 2025 में कुल 31 आतंकवादी मारे गए, जिनमें से 65 प्रतिशत पाकिस्तानी थे। ऑपरेशन महादेव के तहत पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों को भी ढेर किया गया। उन्होंने कहा कि सक्रिय स्थानीय आतंकियों की संख्या अब सिंगल डिजिट में आ गई है और नई भर्ती लगभग शून्य के बराबर है।
विकास और पर्यटन बने शांति के संकेत
जनरल द्विवेदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में मजबूत विकास कार्य, पर्यटन में बढ़ोतरी और शांतिपूर्ण अमरनाथ यात्रा इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि हालात सुधर रहे हैं। पिछले पांच वर्षों की तुलना में इस बार अमरनाथ यात्रा में चार लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब आतंकवाद से पर्यटन की ओर बदलाव का दौर धीरे-धीरे आकार ले रहा है।
चीन सीमा पर स्थिति स्थिर लेकिन सतर्कता जरूरी
चीन सीमा को लेकर सेना प्रमुख ने कहा कि उत्तरी फ्रंट पर हालात फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन लगातार निगरानी बेहद जरूरी है। उच्च स्तर की बातचीत और भरोसा बहाली के उपायों से स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। इससे चराई, चिकित्सा शिविर और अन्य गतिविधियां फिर से शुरू हो पाई हैं। उन्होंने कहा कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर भारतीय सेना की तैनाती संतुलित और मजबूत बनी हुई है।
वैश्विक हालात और भारत की तैयारी
सेना प्रमुख ने कहा कि बीते वर्ष दुनिया भर में सशस्त्र संघर्षों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। यह वैश्विक परिदृश्य एक सच्चाई को उजागर करता है कि जो देश तैयार रहते हैं, वही जीतते हैं। ऑपरेशन सिंदूर सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीतिक स्पष्टता, सटीकता और मजबूत तैयारी का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री के आह्वान, रक्षा सुधारों और भारतीय सेना के परिवर्तन के दशक के तहत हुई प्रगति से सेना पूरी तरह संतुष्ट है।
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