प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री मामले में केजरीवाल की याचिका खारिज

अहमदाबाद। गुजरात उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) की शैक्षणिक डिग्री से जुड़े मानहानि मामले में आम आदमी पार्टी (आआपा) प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी। केजरीवाल ने इस मामले में पार्टी नेता संजय सिंह से अलग ट्रायल चलाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया। जस्टिस एमआर मेंगदे ने मंगलवार, 13 जनवरी को यह आदेश सुनाते हुए कहा कि याचिका खारिज की जाती है। फिलहाल आदेश की विस्तृत प्रति आना बाकी है। अदालत ने इस मामले में अपना फैसला पिछले महीने सुरक्षित रख लिया था।
केजरीवाल ने अहमदाबाद सिटी सेशंस अदालत के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश मनीष प्रद्युम्न पुरोहित के 15 दिसंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में सत्र अदालत ने दंडाधिकारी न्यायालय के 23 सितंबर 2023 के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपितों के ट्रायल को अलग करने की केजरीवाल की मांग को खारिज कर दिया था। केजरीवाल का तर्क था कि उनके और संजय सिंह के खिलाफ लगे आरोप अलग-अलग घटनाओं से जुड़े हैं, इसलिए दोनों पर एक साथ मुकदमा चलाना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा था कि दोनों ने अलग-अलग तारीखों पर बयान दिए थे और सोशल मीडिया पर अलग-अलग वीडियो अपलोड किए गए थे, इसलिए संयुक्त ट्रायल उचित नहीं है।
हालांकि, सत्र अदालत ने माना कि केजरीवाल और संजय सिंह दोनों ने गुजरात विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयान दिए और यह बयान एक ही राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित थे। अदालत ने कहा कि दोनों नेता एक ही राजनीतिक दल से जुड़े हैं और उनकी कार्रवाई में निरंतरता दिखाई देती है।
अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता(सीआरपीसी) की धारा 223 का हवाला देते हुए कहा कि यदि आरोपित एक ही लेन-देन या एक ही उद्देश्य के तहत अपराध करते हैं तो उनका संयुक्त ट्रायल किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला संयुक्त ट्रायल के दायरे में आता है, इसलिए केजरीवाल की याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।
क्या है पूरा मामला?


अरविंद केजरीवाल ने 01 अप्रैल 2023 को और संजय सिंह ने 2 अप्रैल 2023 को अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद गुजरात विश्वविद्यालय ने अहमदाबाद की दंडाधिकारी अदालत में दोनों नेताओं के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था, जिस पर अदालत ने समन जारी किए थे। फरवरी 2024 में गुजरात उच्च न्यायालय ने दंडाधिकारी न्यायालय के जारी समन को सही ठहराने वाले सत्र अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली केजरीवाल और संजय सिंह की याचिकाएं भी खारिज कर दी थीं। शिकायत में कहा गया है कि यह बयान उस समय दिए गए थे, जब गुजरात उच्च न्यायालय ने 2016 में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश को रद्द किया था, जिसमें गुजरात विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री से जुड़ी जानकारी देने का निर्देश दिया गया था।

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