माघ मेले में अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत बिगड़ी
प्रयागराज में माघ मेला प्रशासन और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद रुकने का नाम नहीं ले रहा है मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद के कारण अविमुक्तेश्वरानंद स्नान नहीं कर पाए थे। इसे लेकर अविमुक्तेश्वरानंद पिछले 5 दिनों से धरने पर बैठे हैं। आज सुबस से भक्त उनका इंतजार कर रहे हैं लेकिन वे अपनी वैनिटी वेन से नहीं निकले है। बताया जा रहा है कि आज सुबह से उनकी तबीयत खराब है। माघ मेले में भक्त दर्शन के लिए सुबह से उनका इंतजार कर रहे हैं लेकिन वे सिंहासन पर नहीं हैं ।
उनका कहना है प्रशासन जब तक मुझसे माफी नहीं मांग लेता मै बसंत पंचमी का स्नान नहीं करूंगा अभी मेरा मौनी अमावस्या का स्नान पूर्ण नहीं हुआ है बिना उसे पूरा किए मैं बसंत पंचमी का स्नान कैसे करूंगा ।
माघ मेला परिसर में भक्तों के दर्शन के लिए 1.5 शिवलिंग स्थापित किए जाने थे
अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों ने जानकारी दी कि जहां भी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जाते है वहां भक्तों के दर्शन के लिए पहले से शिवलिंग स्थापित किए जाते है इस बार भी माघ मेले में 1.5 लाख शिवलिंग लेकर हम पहुंचे थे लेकिन विवाद के चलते स्थापित नहीं कर पाए।
मौनी अमावस्या पर बैरियर तोड़ने और पालकी जबरन ले जाने का आरोप में बढ़ा था विवाद
प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दो नोटिस जारी कर सख्त रुख अपनाया हुआ है। नोटिस में मौनी अमावस्या के दिन सुरक्षा व्यवस्था तोड़ने, बैरियर हटाने और भारी भीड़ के बीच जबरन पालकी ले जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। प्रशासन ने यह भी पूछा था कि क्यों न उन्हें भविष्य में हमेशा के लिए माघ मेले में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया जाए।
मौनी अमावस्या की घटना पर प्रशासन सख्त
प्रशासन का कहना है कि मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी और सुरक्षा के लिहाज से विशेष इंतजाम किए गए थे। ऐसे समय में बैरियर तोड़कर पालकी को भीड़ में ले जाना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि जन सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता था। नोटिस में इसी आधार पर अविमुक्तेश्वरानंद से जवाब तलब किया गया है और उनके आचरण को मेले की शांति और व्यवस्था के लिए अनुचित बताया गया है।
मीडिया प्रभारी का आरोप: बदले की भावना से कार्रवाई
अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगी राज ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन अब बदले की भावना से कदम उठा रहे हैं। उनके अनुसार, नोटिस को शिविर के पंडाल के पीछे गुपचुप तरीके से चस्पा किया गया, ताकि इसकी जानकारी समय पर न मिल सके। उन्होंने बताया कि बुधवार देर रात प्रशासन का एक कर्मचारी शिविर में आया और यह कहने लगा कि नोटिस का जवाब क्यों नहीं दिया गया, तब जाकर उन्हें इस नोटिस के अस्तित्व की जानकारी मिली।
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संतों में भी आपस में मतभेद
इस पूरे विवाद ने संतो को भी आपस में बांट दिया है कुछ संतों ने मेले की प्रशासनिक व्यवस्था और धार्मिक संतों के साथ के व्यवहार पर सवाल खड़े किए । तो दूसरी ओर कुछ संत प्रशासन सुरक्षा और नियमों का हवाला दे रहे हैं और अविमुक्तेश्वरानंद के व्यावहार को गलत बता रहें हैं। ऐसे में यह मामला अब केवल एक नोटिस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि माघ मेले की कार्यप्रणाली और संत-प्रशासन संवाद की परीक्षा बनता जा रहा है।
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आगे क्या होगा, इस पर नजर
फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा दिए जाने वाले जवाब के बाद प्रशासन क्या रुख अपनाता है। क्या सचमुच माघ मेले से प्रतिबंध जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी या फिर बातचीत के जरिए विवाद सुलझाया जाएगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
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