सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की मुहर, राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद संभालेंगे पूर्ण कार्यभार
नई दिल्ली। भारतीय न्यायपालिका से जुड़ी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल को कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की है। यह निर्णय 9 जनवरी को हुई कॉलेजियम की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने की। बैठक में न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल के न्यायिक अनुभव, कार्यशैली और प्रशासनिक क्षमता पर विस्तार से चर्चा के बाद यह सिफारिश सर्वसम्मति से की गई।
वर्तमान में न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल कलकत्ता उच्च न्यायालय में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने न्यायालय के प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ न्यायिक मामलों के त्वरित और संतुलित निपटारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कॉलेजियम का मानना है कि उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें स्थायी मुख्य न्यायाधीश का दायित्व सौंपा जाना न्यायालय के हित में होगा।
कॉलेजियम द्वारा की गई यह सिफारिश अब राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए भेजी जाएगी। संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद औपचारिक अधिसूचना जारी होगी और इसके साथ ही न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पूर्ण कार्यभार संभालेंगे। यह नियुक्ति न केवल न्यायपालिका के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती देगी, बल्कि न्याय वितरण प्रणाली में निरंतरता और स्थिरता भी सुनिश्चित करेगी।
न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल का जीवन और न्यायिक यात्रा साधारण पृष्ठभूमि से शुरू होकर उच्चतम न्यायिक पद तक पहुंचने की प्रेरक कहानी है। उनका जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा जबलपुर स्थित पंडित एलएस झा हायर सेकेंडरी स्कूल में हुई, जहां से उन्होंने अनुशासन और परिश्रम के संस्कार प्राप्त किए। इसके बाद उन्होंने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर से स्नातकोत्तर शिक्षा के साथ विधि की उपाधि प्राप्त की। शिक्षा के दौरान ही उनका झुकाव संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और श्रमिक अधिकारों की ओर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा था।
वर्ष 1990 में उन्होंने मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद में पंजीयन कराकर विधि व्यवसाय की शुरुआत की। वकालत के शुरुआती वर्षों से ही उन्होंने सिविल और संवैधानिक मामलों में गहरी पकड़ बनाई। धीरे-धीरे श्रम और औद्योगिक मामलों में उनकी विशेषज्ञता स्थापित होती चली गई। न्यायमूर्ति पॉल को श्रमिकों और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में संवेदनशील दृष्टिकोण के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। उन्होंने कभी भी आर्थिक पक्ष को अपनी प्राथमिकता नहीं बनाया, बल्कि न्याय दिलाने को ही अपना मुख्य उद्देश्य रखा।
उनकी वकालत और बाद में न्यायिक भूमिका में सौम्य स्वभाव, संतुलित निर्णय और कानून की गहरी समझ स्पष्ट रूप से दिखाई देती रही है। कमजोर और वंचित वर्ग को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने कई बार जटिल कानूनी प्रश्नों का मानवीय दृष्टिकोण से समाधान प्रस्तुत किया। यही कारण है कि उन्हें न केवल एक कुशल न्यायाधीश, बल्कि एक संवेदनशील और न्यायप्रिय व्यक्तित्व के रूप में भी देखा जाता है।
न्यायपालिका में उनके योगदान को देखते हुए कॉलेजियम की यह सिफारिश महज एक औपचारिक निर्णय नहीं, बल्कि उनके दशकों के समर्पित कार्य का स्वाभाविक परिणाम मानी जा रही है। यदि राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलती है, तो न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल का मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल कलकत्ता उच्च न्यायालय के लिए एक स्थिर और प्रभावी नेतृत्व का प्रतीक होगा। इससे न्यायालय में लंबित मामलों के निपटारे, प्रशासनिक सुधार और न्याय तक आम नागरिक की पहुंच को और मजबूत करने की उम्मीद की जा रही है।
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