सर्वोच्च नेता के निधन के बाद संवैधानिक प्रक्रिया शुरू, आईआरजीसी ने दी बड़े हमले की चेतावनी

तेहरान, 01 मार्च (हि.स.)। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई की मौत के बाद पूरे देश में 40 दिन का राजकीय शोक घोषित कर दिया गया है। ईरानी मंत्रिपरिषद ने तत्काल प्रभाव से सात दिन के सार्वजनिक अवकाश की भी घोषणा की है। यह निर्णय उस समय लिया गया जब ईरान के सरकारी प्रसारक Islamic Republic of Iran Broadcasting ने रविवार सुबह प्रसारण में खामेनेई की शहादत की आधिकारिक पुष्टि की।

सरकारी घोषणा के साथ ही राजधानी तेहरान सहित देश के प्रमुख शहरों में शोक सभाएं शुरू हो गईं। सरकारी इमारतों पर झंडे आधे झुका दिए गए हैं और सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। मस्जिदों, धार्मिक स्थलों और शैक्षणिक संस्थानों में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जा रही हैं। सात दिन की सार्वजनिक छुट्टी के दौरान सरकारी कार्यालय, शिक्षण संस्थान और अधिकांश सार्वजनिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे।

तीन सदस्यीय नेतृत्व परिषद का गठन

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी Islamic Republic News Agency के अनुसार, देश में संवैधानिक प्रावधानों के तहत तीन सदस्यों वाली एक नेतृत्व परिषद का गठन किया गया है। यह परिषद तब तक सर्वोच्च नेता की शक्तियों का निर्वहन करेगी जब तक नया सर्वोच्च नेता औपचारिक रूप से चयनित नहीं हो जाता।

ईरान के संविधान में स्पष्ट प्रावधान है कि सर्वोच्च नेता के पद रिक्त होने की स्थिति में एक अंतरिम परिषद प्रशासनिक और धार्मिक अधिकारों का संचालन करेगी। इस कदम को देश में स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में नया नेतृत्व तय करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जो ईरान की सत्ता संरचना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

राष्ट्रीय शोक का वातावरण

खामेनेई को इस्लामिक क्रांति का प्रमुख चेहरा माना जाता था। उनकी मृत्यु के बाद पूरे देश में गहरा शोक व्याप्त है। धार्मिक नेताओं और राजनीतिक दलों ने इसे राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। राजधानी तेहरान में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। कई स्थानों पर काले बैनर और पोस्टर लगाए गए हैं, जबकि राष्ट्रीय प्रसारण माध्यमों पर शोक संगीत और विशेष कार्यक्रम प्रसारित किए जा रहे हैं।

ईरानी मंत्रिपरिषद ने अपने वक्तव्य में कहा है कि 40 दिन का राजकीय शोक देश की परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप है। इस अवधि में आधिकारिक समारोह सीमित रहेंगे और मनोरंजन संबंधी गतिविधियों पर नियंत्रण रहेगा।

आईआरजीसी की चेतावनी से बढ़ा तनाव

इस बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स, जिसे संक्षेप में आईआरजीसी कहा जाता है, ने एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा है कि ईरान इस्लामिक रिपब्लिक के इतिहास का सबसे खतरनाक हमला शुरू करने जा रहा है। इस चेतावनी की पुष्टि अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने भी की है। एजेंसी के अनुसार, यह हमला “कुछ ही पलों में” शुरू हो सकता है।

आईआरजीसी का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव चरम पर है। सैन्य सूत्रों का कहना है कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं पूरी तरह अलर्ट पर हैं और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक हलचल

खामेनेई की मौत और उसके बाद घोषित राजकीय शोक ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कई देशों ने स्थिति पर नजर बनाए रखने और संयम बरतने की अपील की है। पश्चिम एशिया में संभावित सैन्य टकराव की आशंका ने वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया और आईआरजीसी की चेतावनी आने वाले दिनों में क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। ईरान की आंतरिक राजनीति और बाहरी संबंधों पर इसका दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।

संवैधानिक प्रक्रिया और आगे की राह

ईरान के संविधान के अनुसार, नया सर्वोच्च नेता चुनने की जिम्मेदारी विशेषज्ञों की सभा पर होती है। हालांकि इस प्रक्रिया में समय लग सकता है, इसलिए अंतरिम नेतृत्व परिषद की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। इस परिषद का प्राथमिक उद्देश्य प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखना और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

देश के भीतर शोक और संवैधानिक प्रक्रिया समानांतर रूप से चल रही है। धार्मिक विद्वान, राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य प्रतिष्ठान मिलकर आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं।

ईरान इस समय अपने इतिहास के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। 40 दिन का राजकीय शोक केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि उस गहरे प्रभाव का प्रतीक है जो खामेनेई की मृत्यु ने देश की राजनीतिक और धार्मिक संरचना पर डाला है। आने वाले दिनों में नेतृत्व चयन, संभावित सैन्य कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं पश्चिम एशिया की दिशा तय करेंगी।

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