पाककला कूटनीति की ध्वजवाहक बनीं शेफ रीना पुष्करणा :

सुदेश गौड़ 

Sudesh Gaur
Sudesh Gaur

भारत और इजरायल के बीच मजबूत होते संबंधों के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भारतीय मूल की शेफ रीना पुष्करणा का नाम लेकर उन्हें दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक निकटता लाने का महत्वपूर्ण कारक बताया। कूटनीतिक परंपराओं के अनुसार जब दो अंतरराष्ट्रीय नेता आपसी विचार विमर्श व बैठकों के दौर के उपरांत संयुक्त बयान जारी करते हैं उसमें अमूमन द्विपक्षीय संबंधों, किए गए समझौतों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा होती है पर नेतन्याहू ने परंपराओं को तोड़ते हुए कूटनीतिक नवाचार किया और आपसी संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए भारतीय शेफ रीना पुष्करणा का जिक्र करके एक नई अद्भुत परंपरा की शुरुआत कर दी। भारत के लिए इस गौरवशाली क्षण को अधिकतर भारतीय मीडिया ने न जाने क्यों नजर अंदाज किया। नेतन्याहू ने अपने 10 पारा के संयुक्त बयान में नौवां पैरा पूरी तरह रीना पुष्करणा को समर्पित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त वक्तव्य के दौरान नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि भारतीय भोजन और विशेष रूप से रीना पुष्करणा के योगदान ने भारत और इजरायल के बीच संबंधों को भावनात्मक स्तर पर मजबूत करने में भूमिका निभाई है।

“मैं भारत का व्यक्तिगत ऋणी हूं”: नेतन्याहू

संयुक्त बयान में नेतन्याहू ने अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ शुरुआती मुलाकातों में से एक तेल अवीव के भारतीय रेस्तरां में हुई थी, जिसे रीना पुष्करणा संचालित करती थीं। उन्होंने कहा कि उस अवसर पर भारतीय भोजन ने उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण स्मृति को आकार दिया।
नेतन्याहू ने कहा कि वह भारत के “व्यक्तिगत रूप से ऋणी” हैं और इस भावना के पीछे भारतीय भोजन और रीना पुष्करणा का विशेष योगदान है। उनका यह बयान केवल एक व्यक्तिगत स्मृति नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक प्रभाव की औपचारिक स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है।

आधिकारिक भोज की जिम्मेदारी भी सौंपी

प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में आयोजित आधिकारिक रात्रिभोज के लिए भी नेतन्याहू ने रीना पुष्करणा को ही भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी। यह कदम इस बात का संकेत था कि इजरायल के सर्वोच्च नेतृत्व को भारतीय भोजन और रीना पुष्करणा की पाक कला पर विशेष विश्वास है। इसी रात्रि भोज में नेतन्याहू ने भारतीय जैकेट पहन के प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत कर सबको चौंका भी दिया था। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, यह पहली बार था जब किसी भारतीय मूल की शेफ को इस स्तर के आधिकारिक कार्यक्रम में महत्वपूर्ण केंद्रीय भूमिका दी गई।

सांस्कृतिक सेतु के रूप में उभरीं रीना पुष्करणा

नई दिल्ली में जन्मी रीना पुष्करणा 1983 में शादी के उपरांत इजरायल के शहर तेल अवीव में जाकर बस गई थीं। उनके पति पॉल पुष्करणा वही काम करते थे। उस समय इजरायल में भारतीय भोजन की उपस्थिति बहुत सीमित थी। उन्होंने अपने रेस्तरां तंदूरी के माध्यम से भारतीय व्यंजनों को लोकप्रिय बनाया और धीरे-धीरे भारतीय भोजन को इजरायल के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा बना दिया। रेस्तरां की मूल डिज़ेनगॉफ शाखा बंद होने के बाद, यह हर्बर्ट सैमुअल स्ट्रीट पर समुद्र तट के किनारे एक सुंदर स्थान पर तंदूरी लैंड्स एंड के रूप में स्थानांतरित हो गई। आज उनके रेस्तरां केवल भोजन परोसने के स्थान नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक बन चुके हैं। भारतीय राजनयिक, दूतावास के अन्य सहयोगियों और इजरायली युवाओं के झुंड को अक्सर वहां देखा जा सकता है।

भारत-इजरायल संबंधों में “सॉफ्ट पावर” की भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि रीना पुष्करणा का योगदान पारंपरिक कूटनीति से अलग “सांस्कृतिक कूटनीति” का उदाहरण है। उन्होंने भारतीय भोजन के माध्यम से दोनों देशों के नागरिकों के बीच आत्मीयता और विश्वास का वातावरण तैयार किया।भारत और इजरायल के बीच आज रक्षा, कृषि, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में मजबूत सहयोग है, लेकिन सांस्कृतिक स्तर पर इस संबंध को मजबूत करने में रीना पुष्करणा जैसे प्रवासी भारतीयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। नेतन्याहू द्वारा संयुक्त बयान में रीना पुष्करणा का नाम लेना इस बात का संकेत है कि अब अंतरराष्ट्रीय संबंध केवल औपचारिक समझौतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक अनुभव और मानवीय जुड़ाव भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।उनका यह बयान इस तथ्य को रेखांकित करता है कि एक शेफ भी दो देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है।

भारत की सॉफ्ट पावर का प्रतीक बनीं रीना पुष्करणा

रीना पुष्करणा आज केवल एक सफल उद्यमी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर की प्रतिनिधि बन चुकी हैं। नेतन्याहू द्वारा संयुक्त बयान में उनका उल्लेख यह दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति और भोजन ने वैश्विक स्तर पर भारत की सकारात्मक पहचान बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राजनयिक विश्लेषकों के अनुसार, रीना पुष्करणा का उदाहरण यह साबित करता है कि प्रवासी भारतीय न केवल आर्थिक, बल्कि सांस्कृतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी भारत के वैश्विक प्रभाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
रीना पुष्करणा भी बताती है कि नेतन्याहू और उनके परिवार पिछले 30 वर्षों से हमारे रेस्तरां में आ रहे हैं। इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू द्वारा संयुक्त बयान में उनका जिक्र किए जाने पर रीना पुष्करणा बहुत ही आल्हादित हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री नेतन्याहू के प्रति आभार जताते हुए कहा कि वे भारत और भारतीय व्यंजनों का बहुत ही सम्मान करते हैं। उन्हें भारतीय व्यंजन बहुत पसंद है लेकिन वह अपने व्यंजनों में हरा धनिया को नापसंद करते हैं। नेतन्याहू का बेटा वीगन खाना पसंद करता है, इसलिए उसे भी भारतीय व्यंजन बहुत पसंद हैं। अपने काम और द्विपक्षीय संबंधों में योगदान को हुए Culinary Diplomacy यानी पाककला कूटनीति का नाम देती है। रीना पुष्करणा बताती है की रात्रि भोज के बाद जब दोनों प्रधानमंत्रियों से उनकी मुलाकात हुई तो वह क्षण मेरे जीवन का अमूल्य क्षण बन गया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मेरे भजन और पाककला की जमकर तारीफ की और स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए धन्यवाद दिया।

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