तेहरान से तेल अवीव तक तनाव चरम पर, 85 छात्राओं की मौत ने बढ़ाया आक्रोश
तेहरान/तेल अवीव/वाशिंगटन, 01 मार्च। पश्चिम एशिया में हालात अचानक विस्फोटक हो गए जब अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई की मौत की पुष्टि की गई। ईरान के सरकारी प्रसारक Islamic Republic of Iran Broadcasting ने रविवार सुबह प्रसारण में घोषणा की कि सुप्रीम लीडर “शहीद हो गए हैं।” इस घोषणा के साथ ही पूरे ईरान में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर खामेनेई की मौत का ऐलान करते हुए कहा कि “जब तक ईरान में शांति स्थापित नहीं हो जाती, तब तक कार्रवाई जारी रहेगी।” इस बयान ने क्षेत्रीय संघर्ष को और भड़का दिया है।
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— Tehran Times (@TehranTimes79) February 28, 2026
The footage reportedly showed Al Udeid Air Base in Qatar, supposedly showing Air defence failing to intercept an Iranian missile, which ends up striking the base. pic.twitter.com/zgWJEIayKS
संयुक्त सैन्य अभियान और लक्षित हमले
इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने पुष्टि की कि अमेरिका के साथ मिलकर चलाए गए इस सैन्य अभियान में ईरान के लगभग 30 शीर्ष नेताओं को निशाना बनाया गया। इजराइली अधिकारियों के अनुसार, हमले बेहद सटीक थे और तेहरान के एक उच्च सुरक्षा वाले परिसर को विशेष रूप से लक्ष्य बनाया गया। इजराइली चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, परिसर से खामेनेई का शव बरामद होने के बाद उसकी तस्वीर प्रधानमंत्री को दिखाई गई।
इजराइल ने अपने हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और देशभर में आपातकालीन स्थिति लागू कर दी गई है। तेल अवीव में ईरान की ओर से किए गए जवाबी हमले में एक महिला की मौत की पुष्टि हुई है।
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— Tehran Times (@TehranTimes79) March 1, 2026
Photo showed a smoke rising from Israel's General Staff building after Iran's retaliatory attacks. pic.twitter.com/tHt16iXrYd
परिवार के सदस्य और सैन्य नेतृत्व भी निशाने पर
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस हमले में खामेनेई की बेटी, पोता, बहू और दामाद भी मारे गए। इसके अतिरिक्त इजराइली रक्षा बलों ने दावा किया है कि ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारी भी इस हमले में मारे गए हैं। इनमें सर्वोच्च सैन्य अधिकारी अली शमखानी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर मोहम्मद पाकपुर प्रमुख बताए जा रहे हैं। साथ ही सैन्य आपात मुख्यालय में खुफिया प्रमुख सलाह असदी और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मोहम्मद शिराजी की भी मौत की खबर है।
इन दावों ने ईरान की सैन्य संरचना को गहरी चोट पहुंचाई है। विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला केवल राजनीतिक नेतृत्व पर नहीं, बल्कि ईरान की सैन्य रीढ़ पर भी केंद्रित था।
85 छात्राओं की मौत : जनाक्रोश की नई लहर
हमले का सबसे दर्दनाक पहलू दक्षिण ईरान के होर्मोजगन प्रांत के मिनाब शहर में सामने आया, जहां एक विद्यालय पर हमले में कम से कम 85 छात्राओं की मौत हो गई। प्रांतीय गवर्नर मोहम्मद रादमेहर ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि 53 छात्राएं अब भी मलबे में दबी हो सकती हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन हालात बेहद गंभीर हैं।
ईरान की न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी ने इन मौतों को “निर्दोषों की हत्या” करार देते हुए कहा कि ईरानी सशस्त्र बल इसका बदला जरूर लेंगे। इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
#WATCH | Iran: People in the city of Isfahan in central Iran have gathered at Imam Square to protest the US-Israeli attack against Iran and to mourn the death of Iran's Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei
— ANI (@ANI) March 1, 2026
(Video source: Islamic Republic of Iran Broadcasting) pic.twitter.com/C933Ho7nVe
ईरान का जवाबी हमला और क्षेत्रीय असर
खामेनेई की मौत के तुरंत बाद ईरानी सशस्त्र बलों ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की। इजराइल के कब्जे वाले क्षेत्रों और पूरे इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया। कई स्थानों पर धमाकों की आवाजें सुनी गईं और हवाई हमले के सायरन बज उठे।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस हमले की जानकारी दी है। पत्र में कहा गया है कि ईरान संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अपने कानूनी अधिकार का उपयोग कर रहा है।
वैश्विक कूटनीतिक हलचल
इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी चिंता व्याप्त है। कई देशों ने संयम बरतने की अपील की है। ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। पश्चिम एशिया में किसी व्यापक युद्ध की आशंका से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि खामेनेई की मौत ईरान की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव की भूमिका तैयार कर सकती है। उत्तराधिकार को लेकर अंदरूनी खींचतान और बाहरी दबाव दोनों ही देश को अस्थिर कर सकते हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराता खतरा
मौजूदा हालात में पश्चिम एशिया एक बार फिर व्यापक संघर्ष के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है। इजराइल और अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई तथा ईरान की जवाबी सैन्य प्रतिक्रिया ने पूरे क्षेत्र को युद्ध जैसे वातावरण में धकेल दिया है। आम नागरिकों में भय और अनिश्चितता का माहौल है।
ईरान में शोक सभाएं और विरोध मार्च एक साथ जारी हैं। वहीं इजराइल में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। अमेरिका ने अपने मध्य पूर्व स्थित सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी है।
स्थिति तेजी से बदल रही है और आने वाले दिनों में घटनाक्रम किस दिशा में जाएगा, यह वैश्विक राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता फिलहाल दूर की बात लग रही है, जबकि आम जनता इस संघर्ष की सबसे बड़ी कीमत चुका रही है।
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