दिल्ली विधानसभा में सिख गुरुओं पर टिप्पणी को लेकर भारी हंगामा, भाजपा ने पत्र लिखकर की कड़ी कार्रवाई की मांग
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी मार्लेना के खिलाफ सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने और आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्रियों और विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक अभय वर्मा ने विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को संयुक्त रूप से पत्र लिखकर यह मांग उठाई है।
कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा सदन में दिया गया वक्तव्य न केवल मर्यादाहीन है, बल्कि सिख समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाने वाला भी है। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि आतिशी की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाए।
भाजपा का आरोप: सदन की गरिमा और धार्मिक भावनाओं का अपमान
मनजिंदर सिंह सिरसा ने आरोप लगाया कि विधानसभा सदन में अपनी सीट से खड़े होकर आतिशी ने गुरु तेग बहादुर के बारे में जो टिप्पणी की, वह अभद्र, शर्मनाक और अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि जिन महापुरुषों ने देश की अखंडता और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अपने पूरे परिवार के साथ बलिदान दिया, उनका इस तरह अपमान किया जाना न केवल सदन की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि पूरे देश की भावनाओं को आहत करने वाला है।
सिरसा ने तीखे शब्दों में कहा कि गुरु तेग बहादुर का अपमान करने वालों का स्थान विधानसभा नहीं, बल्कि तिहाड़ जेल होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में केवल माफी से काम नहीं चलेगा, बल्कि कठोर कानूनी कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि इस तरह की टिप्पणी करने का साहस न कर सके।
अन्य मंत्रियों ने भी कार्रवाई की मांग दोहराई
कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आतिशी ने जो किया है, वह सदन और पूरे देश के लिए अपमानजनक है। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने देश की एकता और धर्म की रक्षा के लिए अद्वितीय बलिदान दिए हैं, लेकिन नेता प्रतिपक्ष ने उनके प्रति असंवेदनशील और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और विधानसभा अध्यक्ष को संज्ञान लेते हुए आतिशी की सदस्यता रद्द करनी चाहिए। उनका कहना था कि इस तरह की टिप्पणी लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।
सदन में भारी हंगामा, कार्यवाही बार-बार स्थगित
इस विवाद का असर सीधे विधानसभा की कार्यवाही पर भी पड़ा। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, भाजपा विधायकों ने सिख गुरुओं पर की गई टिप्पणी को लेकर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। भाजपा सदस्यों ने सदन में नारेबाजी करते हुए आतिशी से सार्वजनिक माफी की मांग की।
स्थिति बिगड़ती देख विधानसभा अध्यक्ष ने पहले सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तब भी भाजपा विधायकों का विरोध जारी रहा। लगातार हंगामे के चलते अध्यक्ष को अंततः विधानसभा की कार्यवाही गुरुवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद भी भाजपा विधायकों का आक्रोश शांत नहीं हुआ। भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने आतिशी से माफी मांगने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग दोहराई।
भाजपा नेताओं का कहना था कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि आस्था और सम्मान से जुड़ा सवाल है। उनका आरोप है कि आम आदमी पार्टी जानबूझकर ऐसे बयान दिलवाकर समाज में तनाव पैदा कर रही है।
राजनीतिक टकराव और आगे की रणनीति
इस पूरे घटनाक्रम के बाद दिल्ली की राजनीति में टकराव और तेज हो गया है। भाजपा जहां इसे धार्मिक भावनाओं और सदन की मर्यादा से जुड़ा गंभीर मामला बता रही है, वहीं आम आदमी पार्टी की ओर से अभी तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब सभी की निगाहें विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हैं कि वे इस पत्र और मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं। यह मामला आने वाले दिनों में दिल्ली की राजनीति में और अधिक गरमाने के संकेत दे रहा है।
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