वैंकूवर-दिल्ली फ्लाइट से शराब पीने के आरोप में उतारा गया पायलट, जांच जारी
नई दिल्ली, 02 जनवरी (हि.स.)। कनाडा के वैंकूवर से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान को लेकर सामने आए विवाद पर नागर विमानन महानिदेशालय ने स्थिति स्पष्ट की है। डीजीसीए ने साफ किया है कि पायलट की शराब पीने की घटना पर माफी एयर इंडिया की ओर से मांगी गई थी, न कि विमानन नियामक की तरफ से, जैसा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था। इस स्पष्टीकरण के बाद पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आई है।
क्या है पूरा मामला
यह घटना 23 दिसंबर की बताई जा रही है, जब कनाडा के वैंकूवर से दिल्ली आने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट संख्या एआई-186 के एक पायलट पर शराब पीने का आरोप लगा। उड़ान से पहले कनाडाई अधिकारियों को पायलट के व्यवहार पर संदेह हुआ, जिसके बाद उसका ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट कराया गया। जांच में पायलट शराब के प्रभाव में पाया गया, जिसके चलते उसे तुरंत विमान से उतार दिया गया।
कनाडाई अधिकारियों की कार्रवाई
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में असफल पाए जाने के बाद पायलट को उड़ान संचालन के लिए अयोग्य घोषित किया गया। इसके बाद संबंधित फ्लाइट के संचालन में बदलाव करना पड़ा, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। कनाडाई अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की।
डीजीसीए ने क्यों जारी किया स्पष्टीकरण
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह कहा गया था कि डीजीसीए ने पायलट को ड्यूटी के लिए अनफिट घोषित करने के साथ-साथ यात्रियों से माफी भी मांगी थी। इन खबरों को गलत बताते हुए डीजीसीए ने स्पष्ट किया कि यात्रियों से माफी Air India ने मांगी थी, न कि नागर विमानन महानिदेशालय ने। डीजीसीए ने केवल नियामक के तौर पर आवश्यक कार्रवाई और निगरानी की भूमिका निभाई है।
एयर इंडिया की प्रतिक्रिया
एयर इंडिया ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद जताया था। एयरलाइन ने कहा था कि सुरक्षा और अनुशासन उसके लिए सर्वोपरि है और इस तरह की घटनाओं को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एयर इंडिया ने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था कर यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने का प्रयास किया।
पायलट के खिलाफ जांच जारी
विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय के अनुसार, संबंधित पायलट को जांच पूरी होने तक ड्यूटी से हटा दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। नियमों के अनुसार, उड़ान से पहले या ड्यूटी के दौरान शराब का सेवन करना गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि
डीजीसीए ने दोहराया है कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों उड़ानों में पायलट और क्रू के लिए सख्त मेडिकल और अनुशासनात्मक मानक तय हैं। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करना अनिवार्य है, ताकि विमानन सुरक्षा पर जनता का भरोसा बना रहे।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कार्यरत पायलटों की जिम्मेदारी कितनी बड़ी होती है और नियमों का उल्लंघन न केवल एयरलाइन की छवि, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
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