200 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती, मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई

इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में दूषित पेयजल पीने से 15 लोगों की मौत और 200 से अधिक लोगों के बीमार पड़ने की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यह हादसा न केवल जनस्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। कई इलाकों में लोग उल्टी, दस्त, तेज बुखार और पेट दर्द जैसी शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंचे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे शामिल हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

घटना सामने आने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तत्काल संज्ञान लिया और इंदौर नगर निगम के आयुक्त से पूरे मामले पर जवाब तलब किया। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि नागरिकों के जीवन से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई तय है। सरकार की ओर से गठित जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि दूषित पानी लोगों तक कैसे पहुंचा और इसमें किन स्तरों पर लापरवाही हुई।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी इस मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि उन्होंने सुबह मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इंदौर के दूषित पेयजल प्रकरण में राज्य शासन द्वारा की जा रही कार्रवाई की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर भी विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री के इस बयान से साफ है कि सरकार इस घटना को बेहद गंभीरता से ले रही है और किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

प्रशासनिक कार्रवाई के तहत इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव और अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को तत्काल प्रभाव से इंदौर से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार भी वापस ले लिया गया है। राज्य सरकार ने नगर निगम में आवश्यक पदों पर तत्काल प्रभाव से नियुक्तियां करने के निर्देश दिए हैं, ताकि जल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

इस पूरे मामले ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने इस घटना को लेकर गंभीर आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इतनी बड़ी संख्या में मौतों का वास्तविक कारण क्या है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल गंदा पानी पीने से इतनी अधिक मौतें होना सामान्य नहीं लगता और इसके पीछे किसी बड़ी साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान के बाद मामले ने और भी गंभीर मोड़ ले लिया है।

स्थानीय पार्षदों और सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना को लेकर नगर निगम के खिलाफ नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से कई क्षेत्रों में गंदे पानी की शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन नगर निगम ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पाइपलाइन लीकेज, सीवेज लाइन के पास से गुजरती जल आपूर्ति पाइपें और नियमित जांच का अभाव इस त्रासदी की बड़ी वजह मानी जा रही है। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया जाता, तो क्या 15 लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कई परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्य को खो दिया है, तो कई घरों में बच्चे और बुजुर्ग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, दूषित पानी से फैले संक्रमण ने तेजी से लोगों को अपनी चपेट में लिया, जिससे कुछ मामलों में स्थिति बेहद गंभीर हो गई। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं और लोगों को उबला हुआ पानी पीने तथा साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

यह घटना एक बार फिर शहरी जल प्रबंधन की कमजोरियों को उजागर करती है। स्मार्ट सिटी कहलाने वाले इंदौर में अगर लोगों को सुरक्षित पेयजल तक नसीब नहीं हो पा रहा, तो यह प्रशासनिक दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। अब देखना यह होगा कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और क्या वास्तव में यह सिर्फ लापरवाही का मामला है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है।

स्वदेश ज्योति के द्वारा | और भी दिलचस्प खबरें आपके लिए… सिर्फ़ स्वदेश ज्योति पर!

शनिवार को सूरज के सबसे पास पहुंचेगी पृथ्वी, पूर्णिमा का चंद्रमा देगा सुपरमून जैसा अद्भुत नज़ारा

नए साल से ये 5 ड्रिंक पीना शुरू करें, शरीर रहेगा तरोताज़ा और रोगों से दूर

लद्दाख के उपराज्यपाल को फिर मिली वित्तीय शक्ति, अब 100 करोड़ तक की परियोजनाओं को दे सकेंगे मंजूरी

स्विट्जरलैंड में नए साल की शुरुआत मातम में बदली, क्रांस-मोंटाना रिजॉर्ट में आग से 40 की मौत