शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंद आनंद ब्रह्मचारी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर के मामले में उच्च न्यायालय ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए फैसला सुरक्षित कर लिया है। 

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद करीब 1 घंटे बाद यह फैसला सुनाया गया। सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने पक्ष रखा तो शंकराचार्य की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्र और इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता दिलीप गुप्ता ने न्यायालय के सामने अपने अपने तर्क दिए।  

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में दो महत्वपूर्ण बातें कहीं

उच्च न्यायालय कहा कि याचिकाकर्ता (शंकराचार्य) इस मामले की जांच में पुलिस का सहयोग करेंगे। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।

24 फरवरी को उच्च न्यायालय में दाखिल की थी जमानत याचिका 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 24 फरवरी को अग्रिम जमानत के लिए Allahabad High Court में याचिका दाखिल की थी। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत को पॉक्सो मामले की गंभीरता से अवगत कराया और कहा कि याचिकाकर्ता को पहले निचली अदालत का रुख करना चाहिए था। वहीं, स्वामी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में दी दलील कि पूरा मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

फैसले के बाद शंकराचार्य का बयान 

Magh Mela authority questions Swami Avimukteshwaranand over Shankaracharya  title - India Today

शंकराचार्य जैसी संस्था को बदनाम करने की कोशिश की गई। आज जो हालात हैं कि अपने भाई पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। सारा अमला भ्रष्ट नहीं हो सकता। कहीं तो कोई होगा, जिसके मन में न्याय होगा। इसलिए संघर्ष जारी रहना चाहिए। पूरे देश का हिंदू समुदाय आशंकित था। उन्हें लगने लगा था कि हमारे गुरु ने क्या गड़बड़ी की है। मुकदमा झूठा बनाया गया था। बटुक कभी आश्रम में नहीं रहे हैं।

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पत्रकारिता: गहरे सामाजिक दायित्वबोध की वाहक : प्रो. संजय द्विवेदी

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