पूरी जिंदगी भर गैस सिंलैडर के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारों का भी बोझ अपने कंधों पर उठाया ताकि बेटे को अपने सपनों के साथ समझौता न करना पड़े, बेटा भी पिता के विश्वास पर औैर अपने इरादों पर उतना ही खरा उतरा भारतीय टीम में जहग बनाई, दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट प्रिमियर लीग का हिस्सा बना और आज भारतीय टीम जब विश्वकप खेलने उतरी है तब उस पिता का बेटा टीम का हिस्सा है। 

“आज जब पिता का निधन हुआ तो पूरी दुनिया ने कहा कि भारतीय टीम के खिलाड़ी रिंकू सिंह के पिता का निधन हुआ।”दुनिया के किसी भी पिता के लिए इससे ज्यादा गर्व की अनुभूति नहीं हो सकती की दुनिया उसे अपने बच्चों के नाम से पहचानें। 

भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का शुक्रवार सुबह करीब 4.36 बजे निधन हो गया। वे 60 साल के थे। उन्हें फोर्थ स्टेज लिवर कैंसर था। कुछ दिन पहले उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अलीगढ़ से ग्रेटर नोएडा के प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था।

Rinku Singh Father Death: रिंकू सिंह ने पिता को दी अंतिम विदाई, अर्थी को  कंधा देकर किया आखिरी नमन, बड़े भाई ने दी मुखाग्नि | rinku singh father last  rites gave shoulder

वहां उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। पार्थिव शरीर को अलीगढ़ ले आया गया। रिंकू टी-20 वर्ल्ड कप छोड़कर चेन्नई से अलीगढ़ अपने घर पहुंचे। पिता की अर्थी को कंधा दिया। अंतिम यात्रा के बाद शंकर विहार स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। बड़े बेटे सोनू ने पिता को मुखाग्नि दी।

क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता का निधन, नोएडा स्थित यथार्थ हॉस्पिटल में ली  अंतिम सांस | Rinku Singh father Death passed away after a long battle with  cancer

पिता ने नहीं आना दिया रिंकू पर जिम्मेदारी का बोझ

रिंकू सिंह के जन्म से कामयाब होने के बाद तक उनके पिता खानचंद कंधों पर सिलिंडर ढोते रहे, पर रिंकू हमेशा क्रिकेट में रहे। रिंकू को कभी भी पिता ने सिलिंडर ढोने की नौबत नहीं आने दी। 

रिंकू की मंगेतर सांसद सुप्रिया ने लिखा भावुक पोस्ट

खानचंद सिंह के निधन से न केवल रिंकू सिंह बल्कि उनकी होने वाली बहू प्रिया सरोज भी गहरे सदमे में हैं. मछलीशहर से समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज ने  सोशल मीडिया पर अपने पूज्य पिताजी के लिए भावुक पोस्ट लिखी है। 
 "आज प्रातः पूज्य पिताजी जी (फादर इन लॉ) का निधन हो गया। यह क्षण मेरे और पूरे परिवार के लिए अत्यंत भावुक और पीड़ादायक है। उनका जाना हमारे जीवन में एक ऐसी कमी छोड़ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। उन्होंने जीवन भर सादगी, ईमानदारी और परिश्रम के साथ अपने दायित्व निभाए। वे परिवार के आधार स्तंभ थे। उनका स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन हमेशा हम सबको मिलता रहा। आज उनके जाने से घर का एक मजबूत सहारा छिन गया है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और हम सबको इस गहरे दुःख को सहने की शक्ति दें। उनकी स्मृतियां हमेशा हमारे साथ रहेंगी. ॐ शांति."

रिंकू के पिता गैस सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे

क्रिकेटर रिंकू का बचपन काफी कठिनाई भरा रहा है। मां वीना देवी घर संभालती हैं। रिंकू 5 भाई और एक बहन में चौथे नंबर हैं। बड़े भाई सोनू, मुकुल और शीलू हैं। बहन नेहा और भाई जीतू, रिंकू से छोटे हैं। मूल रूप से बुलंदशहर के दान गढ़ के रहने वाले हैं।

KKR को दिए एक इंटरव्यू में रिंकू ने अपनी जिंदगी के बारे में बात की थी। उन्होंने बताया था-

परिवार में 5 भाई हैं। पापा सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे। हम पांचों भाइयों से भी काम करवाते। हम बाइक पर 2-2 सिलेंडर रखकर होटलों और घरों में डिलीवर करने जाते थे। मैच खेलने के लिए पैसे लगते थे। घरवालों से मांगो तो कहते कि पढ़ाई करो। पापा खेलने के लिए मना करते थे, मम्मी सपोर्ट करती थीं।

 

पत्रकारिता: गहरे सामाजिक दायित्वबोध की वाहक : प्रो. संजय द्विवेदी

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