चंद्रमा की परिक्रमा और उससे आगे तक पहुंचेगा मानव मिशन, अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की शुरुआत
वाशिंगटन। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने की तैयारी में जुटी हुई है। नासा का बहुप्रतीक्षित मिशन आर्टेमिस-2 अब लॉन्चिंग के बेहद करीब पहुंच चुका है। वैज्ञानिक और तकनीकी टीमें पूरी कोशिश में लगी हैं कि इस ऐतिहासिक मिशन को फरवरी के पहले सप्ताह में ही रवाना किया जा सके। यदि किसी तकनीकी या सुरक्षा कारण से फरवरी में लॉन्च संभव नहीं हो पाया, तो नासा का लक्ष्य इसे अप्रैल में हर हाल में अंतरिक्ष में भेजने का है।
नासा की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आर्टेमिस-2 वह मिशन होगा, जो अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की कक्षा से बाहर, चंद्रमा के चारों ओर और उससे भी आगे तक ले जाएगा। यह मिशन इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि अपोलो कार्यक्रम के बाद यह पहली बार होगा जब इंसान पृथ्वी की कक्षा से बाहर इतनी दूर की यात्रा करेगा।
मानव अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में सबसे बड़ा कदम
नासा के प्रशासक जेरेड आइजकमैन ने आर्टेमिस-2 को मानव अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह मिशन इंसान को पृथ्वी से पहले से कहीं अधिक दूर भेजेगा और चंद्रमा पर दोबारा लौटने के लिए आवश्यक अनुभव और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराएगा। उनके अनुसार, यह मिशन अमेरिका के नेतृत्व में अंतरिक्ष अन्वेषण को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और भविष्य में मंगल ग्रह की मानव यात्रा की नींव मजबूत करेगा।
नासा का मानना है कि आर्टेमिस कार्यक्रम केवल एक मिशन नहीं, बल्कि चंद्रमा पर स्थायी मानव मौजूदगी और दीर्घकालिक अंतरिक्ष अभियानों की दिशा में एक समग्र रणनीति है। आर्टेमिस-2 इसी रणनीति का अहम पड़ाव माना जा रहा है।
पृथ्वी से चंद्रमा तक और उससे आगे की यात्रा
नासा के मुताबिक, चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 41,541 मील की दूरी पर स्थित है। हालांकि, आर्टेमिस-2 के लिए यह दूरी अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि एक पड़ाव मात्र है। इस मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरेंगे और फिर पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे।
यह मिशन अपोलो कार्यक्रम के बाद पहली बार इंसान को पृथ्वी की कक्षा से बाहर ले जाएगा। इससे पहले आर्टेमिस-1 मिशन बिना मानव के सफलतापूर्वक पूरा किया गया था, जिसमें अंतरिक्ष यान की क्षमताओं और सुरक्षा प्रणालियों की गहन जांच की गई थी। आर्टेमिस-2 उसी का अगला और अधिक चुनौतीपूर्ण चरण है, क्योंकि इसमें सीधे इंसान शामिल होंगे।
अनुभवी अंतरिक्ष यात्रियों की टीम
आर्टेमिस-2 मिशन की कमान अनुभवी अंतरिक्ष यात्री रीड विसमैन के हाथों में होगी। वे इस मिशन के कमांडर हैं। उनके साथ पायलट के रूप में विक्टर ग्लोवर शामिल होंगे, जिन्होंने पहले भी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर सफल मिशन पूरे किए हैं।
मिशन स्पेशलिस्ट के तौर पर क्रिस्टीना कोच इस उड़ान का हिस्सा होंगी, जो अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला अंतरिक्ष यात्री रह चुकी हैं। इस मिशन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी उदाहरण देखने को मिलेगा, क्योंकि कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसन भी इस दल में शामिल हैं। यह पहली बार होगा जब कोई कनाडाई अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर जाने वाले मिशन में भाग लेगा।
चंद्रमा पर स्थायी मौजूदगी की दिशा में अहम कदम
नासा के अनुसार, आर्टेमिस-2 से मिलने वाला अनुभव और डेटा भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी मानव मौजूदगी स्थापित करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। इस मिशन के जरिए नासा यह समझ पाएगा कि लंबे समय तक गहरे अंतरिक्ष में मानव शरीर और तकनीक कैसे काम करते हैं।
आर्टेमिस कार्यक्रम का दीर्घकालिक उद्देश्य केवल चंद्रमा तक सीमित नहीं है। नासा इसे मंगल ग्रह पर मानव मिशन की तैयारी के रूप में भी देख रहा है। चंद्रमा को एक परीक्षण स्थल की तरह इस्तेमाल कर, भविष्य की और भी लंबी तथा जटिल अंतरिक्ष यात्राओं की राह बनाई जा रही है।
अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की शुरुआत
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टेमिस-2 मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की शुरुआत करेगा। यह मिशन न केवल तकनीकी दृष्टि से अहम है, बल्कि यह मानव जिज्ञासा, साहस और विज्ञान की सीमाओं को आगे बढ़ाने का प्रतीक भी है।
यदि यह मिशन सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में चंद्रमा पर इंसानों की नियमित मौजूदगी और मंगल ग्रह की यात्रा का सपना और भी साकार होता नजर आएगा। पूरी दुनिया की निगाहें अब नासा की इस ऐतिहासिक उड़ान पर टिकी हुई हैं, जो मानव इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रही है।
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