दिल्ली से कोलकाता तक TMC का विरोध, 8 सांसद गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आईटी सेल चीफ प्रतीक जैन के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड के विरोध में दिल्ली से लेकर कोलकाता तक पार्टी ने प्रदर्शन किया। शुक्रवार की सुबह दिल्ली में गृह मंत्रालय के बाहर TMC के 8 सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सांसदों ने “मोदी-शाह की गंदी चालें नहीं चलेंगी” जैसे नारे लगाए।
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इस प्रदर्शन में कई बड़े नेता शामिल थे जैसे डेरेक ओ’ब्रायन, महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद। जब दिल्ली पुलिस द्वारा सांसदों को हटाने की कोशिश में काफी धक्कामुक्की हुई। जबकि कुछ सांसद गिर भी गए। इसके बाद सभी 8 सांसदों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। महुआ मोइत्रा ने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है कि चुने हुए सांसदों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है।
वहीं , दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ED की कार्रवाई के विरोध में कोलकाता में दोपहर 2 बजे मार्च निकालने की घोषणा की। उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया। ममता बनर्जी ने कहा, “प्रधानमंत्री जी, अपने गृह मंत्री को कंट्रोल करें। इस तरह एजेंसियों का दुरुपयोग ठीक नहीं है।”
ED ने 8 जनवरी को देशभर में कुल 10 जगहों पर छापेमारी की थी। इनमें से 6 ठिकाने पश्चिम बंगाल में और 4 दिल्ली में थे। कोलकाता के गुलाउडन स्ट्रीट स्थित एक घर और सॉल्टलेक के एक ऑफिस पर भी रेड की गई। ये दोनों जगहें प्रतीक जैन से जुड़ी बताई जा रही हैं, जो TMC के लिए राजनीतिक रणनीति तैयार करते हैं।
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को रेड की जानकारी मिलते ही ममता बनर्जी खुद कई पुलिस अधिकारियों के साथ प्रतीक जैन के घर पहुंचीं। वहां वे करीब 19-20 मिनट तक रहीं और एक फाइल लेकर बाहर निकलीं। इसके बाद वे उनके ऑफिस गईं, जहां करीब साढ़े तीन घंटे तक मौजूद रहीं। ममता बनर्जी का यह कदम देश की राजनीति में काफी चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि इससे पहले किसी मुख्यमंत्री को इस तरह रेड के बीच सीधे पहुंचते नहीं देखा गया था।
इस कार्रवाई पर ED का कहना है कि यह पूरी तरह सबूतों के आधार पर की जा रही है। एजेंसी के अनुसार यह मामला हवाला, अवैध कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है। यह केस 2020 में CBI द्वारा दर्ज किया गया था, जिसमें अनुप माजी उर्फ लाला के कोयला तस्करी सिंडिकेट का नाम सामने आया था। आरोप है कि पूर्वी कोलफील्ड्स के आसनसोल और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी और अवैध खुदाई की गई थी।
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ED का दावा है कि कोयला तस्करी से जुड़े एक हवाला ऑपरेटर ने Indian PAC Consulting Pvt Ltd (I-PAC) के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन किया। एजेंसी का मानना है कि I-PAC भी हवाला के पैसों से जुड़ी इकाइयों में शामिल हो सकती है। हालांकि, ED ने यह भी कहा कि कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से चल रही थी, लेकिन ममता बनर्जी के बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों के साथ पहुंचने से जांच में रुकावट आई।
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I-PAC एक राजनीतिक सलाह देने वाली कंपनी है, जो राजनीतिक दलों को चुनावी रणनीति, डेटा एनालिसिस, मीडिया प्लानिंग और वोटर आउटरीच में मदद करती है। इसकी शुरुआत 2013 में प्रशांत किशोर और प्रतीक जैन ने की थी। पहले इसका नाम Citizens for Accountable Governance (CAG) था, बाद में इसे I-PAC नाम दिया गया। प्रशांत किशोर के अलग होने के बाद कंपनी की जिम्मेदारी प्रतीक जैन के पास आ गई।
I-PAC साल 2021 से तृणमूल कांग्रेस के साथ काम कर रही है और पार्टी के चुनावी अभियानों में अहम भूमिका निभा रही है। इसी वजह से ED की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। TMC का कहना है कि यह सब राजनीतिक बदले की भावना से किया जा रहा है, जबकि ED इसे कानूनी कार्रवाई बता रही है।
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