मुख्यमंत्री ने कृषक कल्याण वर्ष का किया शुभारंभ, कहा- किसानों का करेंगे समग्र कल्याण, 16 विभागों की बनेंगी समेकित योजनाएं

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को भोपाल के जंबूरी मैदान में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा कर विशाल किसान सम्मेलन को संबोधित किया। कृषक कल्याण वर्ष का शुभारंभ करने से पहले मुख्यमंत्री ने कोकता बायपास पर विशाल किसान ट्रैक्टर रैली का शुभारंभ किया और स्वयं ट्रैक्टर चलाकर सभा स्थल पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विशाल किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश के किसानों के लिए वर्ष 2026 नई उम्मीदों और नए अवसरों का वर्ष होगा।  मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य, जहां किसान कल्याण के लिए सालभर गतिविधियां चलेंगी। प्रदेश सरकार के 16 से अधिक विभाग समन्वय कर  किसानों के लिए वैभव लाएंगे। सरसों में भी लागू होगी भावांतर योजना की जाएगी। किसानों के लिए जीरो प्रतिशत ब्याज की योजना जारी रहेगी। कृषि उद्योगों में किसानों की बढ़ाएंगे भागीदारी, डिंडोरी में राज्य श्रीअन्न अनुसंधान केंद्र बनाया जाएगा। तीन साल में 30 लाख किसानों के खेतों में लगेंगे सोलर पम्प, माइक्रो इरीगेशन का दायरा भी बढ़ाया जाएगा। आधुनिक तकनीक से फसल नुकसानी का सर्वे होगा। तीन बड़ी नदी परियोजनाओं से 25 जिलों की 16 लाख हैक्टेयर भूमि सिंचित होगी। मध्यप्रदेश देश का एकमात्र राज्य जहां खेती का रकबा ढाई लाख हैक्टेयर बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में सरकार के 10 संकल्प, प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देंगे। किसान हमारे अन्नदाता हैं, जो अपने परिश्रम से देश और समाज का उदर-पोषण करते हैं। किसानों को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी समृद्धि सुनिश्चित करना ही सरकार का एकमात्र ध्येय है। प्रदेश सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, सिंचाई, भंडारण और बाजार तक बेहतर पहुंच के माध्यम से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि केवल आजीविका का एक साधन ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान सम्मेलन के दौरान ई-विकास, वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति सामधान प्रणाली (विकास पोर्टल) का शुभारंभ किया। कृषक कल्याण वर्ष 2026 में किसानों की आमदनी बढ़ाने सहित इनकी बेहतरी और खुशहाली के लिए किए जाने वाले प्रयासों के संबंध में एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। किसान सम्मेलन में सरकार की विभिन्न योजनाओं, नवाचारों और भावी कार्ययोजना की जानकारी भी किसानों को दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल के साथ ई-विकास, वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान प्रणाली ऐप और किसान कल्याण वर्ष 2026 का शुभारंभ किया।

पूरा साल किसानों के कल्याण के लिए समर्पित 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने पूरा साल किसानों के कल्याण के लिए समर्पित किया है। हमारी सरकार खेतों से निकलने वाली पराली से भी किसानों आय बढ़ाने का प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि हमारा मध्यप्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां बीते सालों के प्रयासों से खेती का रकबा ढाई लाख हेक्टेयर तक बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) नदी लिंक एवं केन-बेतवा नदी लिंक राष्ट्रीय परियोजना सहित ताप्ती ग्राउंड वाटर रिचार्ज मेगा परियोजना से प्रदेश के 25 जिलों में 16 लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त कृषि रकबा सिंचित हो जाएगा।

किसानों के हित में हमने जो कहा, वह करके दिखाया

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों के हित में हमने जो कहा, वह करके दिखाया है। प्रदेश में श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए डिण्डोरी जिले में मध्यप्रदेश राज्य श्रीअन्न अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जाएगी। इससे श्रीअन्न का उत्पादन और पोषण सुरक्षा को नई ऊंचाई मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्वालियर में सरसों अनुसंधान और उज्जैन में चना अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जा रहा हैं। इन केंद्रों के जरिए इन फसलों की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम प्रदेश के 30 लाख से अधिक किसानों को अगले तीन साल में सोलर पावर पम्प देंगे। हर साल 10 लाख किसानों को सोलर पम्प देकर इन्हें अन्नदाता से आत्मनिर्भर ऊर्जादाता बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र का रकबा निरंतर बढ़ रहा है। अभी 65 लाख हेक्टेयर है, इसे बढ़ाकर वर्ष 2028-29 तक 100 लाख हेक्टेयर तक लेकर जाएंगे।

किसानों को लौटाएंगे उनका वैभव, रिक्त पदों पर भर्ती कर कृषि तंत्र को करेंगे मजबूत

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में सरकार प्रदेश के किसानों के समग्र कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। सालभर विभिन्न गतिविधियों के आयोजन के जरिए सरकार के 16 से अधिक विभाग, मंत्रालय आपसी समन्वय से किसानों को उनका वैभव लौटाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सोयाबीन के बाद अब सरसों की फसल को भी हम भावांतर योजना के दायरे में लेकर आएंगे। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित उद्योगों के विकास में किसानों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। ऐसे उद्योग लगाने वालों को सरकार सब्सिडी देगी। प्रदेश में बीज परीक्षण कार्य से जुड़ी सभी प्रयोगशालाओं को और अधिक सशक्त कर सभी मंडियों का भी आधुनिकीकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभागीय अमले की तेज भर्ती के लिए भी हमारी सरकार प्रयासरत है। कृषि विभाग और राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड में सभी श्रेणी के रिक्त पदों की जल्द से जल्द पूर्ति कर प्रदेश में कृषि तंत्र को और भी मजबूत बनाया जाएगा। सरकार माइक्रो इरिगेशन सिस्टम का दायरा बढ़ाने की ओर भी अग्रसर है। किसानों को होने वाली फसल नुकसानी का अब आधुनिक तकनीक से सर्वे कराया जाएगा। इससे किसानों को मुआवजे की राशि जल्द से जल्द मिल सकेगी। किसानों की बेहतरी और खुशहाली के लिए हर सभी कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए जीरो प्रतिशत ब्याज दर से ऋण प्रदाय योजना आगे भी जारी रहेगी।

किसानों को मिलेगा उनकी उपज और परिश्रम का बेहतर मूल्य

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे, ताकि किसानों को उनकी उपज एवं परिश्रम का बेहतर मूल्य मिल सके और गांवों में ही रोजगार के नए अवसर पैदा हों। इसके साथ ही प्रदेशभर में कृषि उत्सव और किसान मेलों का आयोजन कर किसानों को आधुनिक खेती के गुर सिखाए जाएंगे। प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ खेती-किसानी में नवाचारों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खेतों में पसीना बहाने वाले किसान राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च उदाहरण हैं। ऐसे में किसानों की सेवा, संबल और समृद्धि में सहयोग करना सरकार का कर्तव्य और धर्म है। उन्होंने प्रदेश के सभी किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि वे नई तकनीकों को अपनाएं, बदलते समय के साथ कदम मिलाकर चलें और खेती को आधुनिक बनाएं। किसान कल्याण वर्ष का भव्य शुभारंभ कर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी अन्नदाताओं को भरोसा दिलाया कि किसानों की सुख-समृद्धि में ही सरकार का सुख है। हर कदम पर, हर जरूरत के वक्त सरकार किसानों के साथ खड़ी है।

अन्नदाता मध्यप्रदेश के माथे का तिलक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अन्नदाता मध्यप्रदेश के माथे का तिलक हैं, जिसका तिलक खेत की मिट्टी है, वही मध्यप्रदेश का किसान है। उन्होंने कहा कि किसानों का पसीना प्रदेश की पहचान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के शुभारम्भ के साथ हमआत्मनिर्भर और समृद्ध किसान, उन्नत कृषि और मूल्य श्रंखला आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के माध्यम से समृद्ध प्रदेश का निर्माण करेंगे। किसानों की आय बढ़ाने और आय को स्थाई करेंगे, खेती को लाभ का धंधा बनाएंगे। तकनीक, नवाचार और वैज्ञानिक सोच से खेती को उन्नत करेंगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष हम कृषि आधारित उद्योग, फूड प्रोससिंग यूनिट को बढ़ावा देंगे। प्राकृतिक एवं जैविक कृषि को मिशन मोड में बढ़ावा देंगे। अपशिष्ट से बायोगैस, एथेनॉल और हरित ऊर्जा से किसान को ऊर्जादाता बनाएंगे। पर ड्रॉप मोर क्रॉप 2.0’ और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रदेश के कृषि उत्पादों के ब्रांडिंग की जाएगी, निर्यात पर विशेष फोकस होगा। रिसर्च, इनोवेशन के माध्यम से कृषिक सशक्तिकरण की दिशा में काम करेंगे। युवाओं को भी खेती से जोड़ेंगे। कृषि पर्यटन से गांवों में नए रोजगार और पहचान के अवसर पैदा होंगे। कृषि के साथ डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर्स सहित फल, सब्जी मसाला एवं औषधीय फसलों के उत्पादन को भी मजबूती से बढ़ावा देंगे।

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