देशभर के स्टील प्लांटों और कॉरपोरेट स्तर पर की गई बड़ी कार्रवाई, कुछ पर 2100 तक स्थायी प्रतिबंध
आसनसोल, 20 जनवरी (हि.स.)। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख इस्पात कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने अनुबंध शर्तों के उल्लंघन, फर्जी एवं जाली दस्तावेज़ जमा करने, भ्रष्ट आचरण, खराब कार्य प्रदर्शन और मजदूरों के वेतन से जुड़ी अनियमितताओं जैसे गंभीर मामलों में कड़ा रुख अपनाते हुए 21 ठेकेदारों और फर्मों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। यह कार्रवाई देशभर की विभिन्न इकाइयों और कॉरपोरेट स्तर पर की गई है, जिसे ठेका व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
देशभर की इकाइयों में एकसाथ कार्रवाई
सेल द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार यह कार्रवाई भिलाई स्टील प्लांट, राउरकेला स्टील प्लांट, बोकारो स्टील प्लांट, इस्को स्टील प्लांट, सेंट्रल मार्केटिंग ऑर्गनाइजेशन और कॉरपोरेट कार्यालय स्तर पर की गई है। कंपनी प्रबंधन का कहना है कि जांच के दौरान अलग-अलग इकाइयों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद यह सामूहिक और सख्त कदम उठाया गया।
किस इकाई में कितनी कंपनियां ब्लैकलिस्ट
जानकारी के मुताबिक भिलाई स्टील प्लांट में सबसे अधिक 11 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। इसके अलावा राउरकेला स्टील प्लांट में चार, बोकारो स्टील प्लांट में आठ तथा इस्को स्टील प्लांट में छह फर्मों और ठेकेदारों के नाम ब्लैकलिस्ट की सूची में शामिल हैं। वहीं सेंट्रल मार्केटिंग ऑर्गनाइजेशन स्तर पर भी तीन कॉन्ट्रैक्ट कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इन आंकड़ों से साफ है कि यह कार्रवाई केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर की गई है।
/swadeshjyoti/media/post_attachments/wp-content/uploads/2024/04/SAI-1200x900-593272.png)
फर्जी दस्तावेज़ और अनुबंध शर्तों की अनदेखी बनी वजह
कंपनी सूत्रों के अनुसार कई मामलों में यह पाया गया कि ठेकेदारों ने अनुबंध में तय शर्तों का पालन नहीं किया। कुछ फर्मों द्वारा जमा किए गए दस्तावेज़ जांच में फर्जी या जाली पाए गए, जबकि कुछ मामलों में कार्य की गुणवत्ता बेहद खराब रही। इसके अलावा मजदूरों के वेतन भुगतान में अनियमितता और श्रम नियमों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए, जिन्हें सेल प्रबंधन ने बर्दाश्त करने से इनकार कर दिया।
प्रतिबंध की अवधि अलग-अलग, कुछ पर 2100 तक रोक
सेल की ओर से लगाए गए प्रतिबंध की अवधि सभी फर्मों के लिए समान नहीं है। कई ठेकेदारों पर 2026 से 2028 तक के लिए प्रतिबंध लगाया गया है, जबकि कुछ मामलों में उल्लंघन की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कंपनियों पर वर्ष 2100 तक स्थायी प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। इसे अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई में से एक माना जा रहा है।
इस्को स्टील प्लांट का पक्ष
इस्को स्टील प्लांट के जनसंपर्क विभाग के अधिकारी भास्कर कुमार ने बताया कि जिन ठेका कंपनियों के अनुबंध रद्द किए गए हैं या जिन पर प्रतिबंध लगाया गया है, उन्होंने कंपनी के टर्म्स एंड कंडीशन का पालन नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन दस्तावेज़ों की मांग की गई थी, वे जांच में फर्जी या अधूरे पाए गए, जिसके चलते कंपनी को यह कार्रवाई करनी पड़ी।
उद्योग जगत में गया सख्त संदेश
सेल के इस कदम को उद्योग जगत में एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अब भ्रष्टाचार, लापरवाही और मजदूरों के शोषण को कतई स्वीकार नहीं करेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से न केवल ठेका प्रणाली में सुधार होगा, बल्कि ईमानदार और नियमों का पालन करने वाले ठेकेदारों को भी बढ़ावा मिलेगा।
आगे भी जारी रहेगी सख्ती
कंपनी प्रबंधन के अनुसार भविष्य में भी ठेका कार्यों की निगरानी और जांच को और मजबूत किया जाएगा। किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी, ताकि कार्य संस्कृति में अनुशासन और पारदर्शिता बनी रहे। सेल का यह निर्णय अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।
✨ स्वदेश ज्योति के द्वारा | और भी दिलचस्प खबरें आपके लिए… सिर्फ़ स्वदेश ज्योति पर!
सेहत का देसी सहारा, हल्दी वाला दूध
पथरी से राहत दिलाने में मदद करता है सर्पासन: योग से किडनी को मिलती है प्राकृतिक मजबूती
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071157234z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-56.png)
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071151025z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-50.png)
/swadeshjyoti/media/media_files/2026/01/20/sail-2026-01-20-14-20-11.jpg)