केंद्रीकृत प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम, कई मंत्रालय एक ही परिसर में होंगे संचालित

दोपहर बाद नामकरण और उद्घाटन कार्यक्रम

नई दिल्ली, 13 फरवरी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज राजधानी में नवनिर्मित सेवा तीर्थ तथा कर्तव्य भवन-1 और 2 का उद्घाटन करेंगे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री दोपहर लगभग डेढ़ बजे नए प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर का सेवा तीर्थ के रूप में औपचारिक नामकरण करेंगे। इसके तुरंत बाद दोनों कर्तव्य भवनों का उद्घाटन होगा। शाम के समय इसी परिसर में एक जनसभा को संबोधित करने का भी कार्यक्रम निर्धारित है।

लंबे समय से महसूस की जा रही थी जरूरत

कई दशकों से केंद्र सरकार के मंत्रालय और विभाग सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में अलग-अलग इमारतों में फैले हुए थे। इससे विभागों के बीच तालमेल में कठिनाई आती थी, फाइलों की आवाजाही में समय लगता था और रखरखाव की लागत भी लगातार बढ़ रही थी। कर्मचारियों के लिए आधुनिक सुविधाओं की कमी और नागरिकों के लिए स्पष्ट संपर्क व्यवस्था न होना भी एक बड़ी चुनौती थी। नई व्यवस्था को इन्हीं समस्याओं के स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

किन मंत्रालयों को मिलेगा स्थान

नए परिसरों में प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय को स्थान दिया गया है। कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा, कृषि एवं किसान कल्याण, संस्कृति, विधि एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण, रसायन एवं उर्वरक तथा जनजातीय कार्य जैसे अनेक मंत्रालय कार्य करेंगे। एक ही स्थान पर इन विभागों की मौजूदगी से समन्वय तेज होने और निर्णय प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

आधुनिक ढांचा और नागरिक सुविधाएं

नई इमारतों को इस तरह विकसित किया गया है कि प्रशासनिक कामकाज अधिक कुशल और पारदर्शी बन सके। यहां जनता के लिए व्यवस्थित संपर्क क्षेत्र बनाए गए हैं, जहां नागरिक अपनी समस्याएं और आवेदन लेकर पहुंच सकेंगे। केंद्रीकृत स्वागत कक्ष की व्यवस्था से लोगों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे समय की बचत होगी और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

पर्यावरण और ऊर्जा पर विशेष ध्यान

भवनों के निर्माण में पर्यावरणीय मानकों का विशेष ध्यान रखा गया है। ऊर्जा बचत, जल संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन के उपायों को संरचना का हिस्सा बनाया गया है। नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों का उपयोग कर बिजली की खपत को कम करने का प्रयास किया गया है। उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण तकनीक से भवनों को लंबे समय तक टिकाऊ रखने की योजना है।

सुरक्षा और प्रबंधन की उन्नत व्यवस्था

परिसर में प्रवेश और गतिविधियों की निगरानी के लिए आधुनिक सुरक्षा तंत्र स्थापित किया गया है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली तैयार की गई है। इससे न केवल अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि आने वाले नागरिकों को भी सुरक्षित वातावरण मिलेगा।

प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव की उम्मीद

सरकारी सूत्रों का कहना है कि एकीकृत ढांचे में काम करने से मंत्रालयों के बीच संवाद बेहतर होगा। फाइलों के निपटारे की गति बढ़ेगी और नीतियों को लागू करने में कम समय लगेगा। कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य वातावरण मिलने से उत्पादकता बढ़ने की संभावना है। इसे भविष्य के प्रशासनिक ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री के उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर परिसर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और आमंत्रित अतिथि इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनेंगे।

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