अंडमान-निकोबार से नेताजी के सपनों, आत्मनिर्भर रक्षा और ऐतिहासिक विरासत पर दिया व्यापक संदेश

अंडमान/नई दिल्ली, 23 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘पराक्रम दिवस’ के अवसर पर कहा कि यह दिवस अब केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र की चेतना का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के जरिए नेताजी के सपनों को साकार कर रहा है, ताकि उनका दूरदर्शी दृष्टिकोण आज की युवा पीढ़ी के लिए स्थायी प्रेरणा बन सके। इस अवसर पर उन्होंने नेताजी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

नेताजी के विचारों से युवाओं को जोड़ने का प्रयास

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को नेताजी के विचारों और आदर्शों से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। लाल किले में स्थापित नेताजी संग्रहालय से लेकर कर्तव्य पथ पर उनकी भव्य प्रतिमा तक, ये सभी पहलें राष्ट्र निर्माण की चेतना को मजबूत करती हैं। उन्होंने कहा कि नेताजी के आदर्शों का सम्मान करना और उनसे प्रेरणा लेना विकसित भारत के संकल्प को ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान करता है। इसी दिशा में सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कारों की स्थापना भी की गई है, जो साहस, सेवा और समर्पण की भावना को आगे बढ़ाती है।

आत्मनिर्भर रक्षा भारत की बढ़ती ताकत

प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत को राष्ट्र की सामूहिक आकांक्षा बताते हुए कहा कि 1.4 अरब भारतीयों का आत्मनिर्भरता का संकल्प ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करेगा। उन्होंने कहा कि पहले भारत को रक्षा जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है। भारत का रक्षा निर्यात 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है और स्वदेशी रूप से निर्मित ब्रह्मोस जैसी प्रणालियां वैश्विक मंच पर अपनी सशक्त पहचान बना रही हैं। आत्मनिर्भरता के बल पर सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती मिली है।

23 से 30 जनवरी तक राष्ट्रीय आयोजनों का संगम

प्रधानमंत्री ने 23 से 30 जनवरी तक चलने वाले राष्ट्रीय आयोजनों की श्रृंखला का उल्लेख करते हुए कहा कि पराक्रम दिवस, राष्ट्रीय मतदाता दिवस, गणतंत्र दिवस, बीटिंग रिट्रीट और बापू की पुण्यतिथि का यह संगम गणतंत्र के उत्सव की एक नई और गौरवशाली परंपरा बन चुका है। यह कालखंड देश के लोकतांत्रिक मूल्यों, कर्तव्यों और राष्ट्रीय संकल्पों को दोहराने का अवसर देता है।

इतिहास के साथ न्याय न होने का आरोप

प्रधानमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक राजनीतिक स्वार्थ के कारण स्वतंत्रता का श्रेय केवल एक परिवार तक सीमित करने की कोशिश की गई। इसी कारण अंडमान और निकोबार जैसे ऐतिहासिक स्थलों की उपेक्षा हुई, जबकि ये स्थल स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों के जीवंत साक्ष्य हैं। उन्होंने कहा कि नेताजी की वीरता और साहस हर भारतीय को प्रेरित करते हैं और इतिहास के हर नायक को उसका उचित सम्मान मिलना चाहिए।

अंडमान: स्वतंत्रता की कभी न बुझने वाली चिंगारी

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंडमान की धरती इस विश्वास का प्रतीक है कि स्वतंत्रता का विचार कभी समाप्त नहीं होता। यहां अनेक क्रांतिकारियों ने अमानवीय यातनाएं सहीं और कई योद्धाओं ने अपने प्राणों का बलिदान दिया, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी और अधिक प्रखर होती चली गई। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद इस गौरवशाली इतिहास को संरक्षित किया जाना चाहिए था, लेकिन तत्कालीन शासकों की असुरक्षा की भावना के कारण ऐसा नहीं हो सका।

नाम परिवर्तन से नई पहचान का निर्माण

प्रधानमंत्री ने अंडमान और निकोबार में किए गए नाम परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए कहा कि पोर्ट ब्लेयर का नाम बदलकर ‘श्री विजयपुरम’ रखा गया, जो नेताजी की विजय और संघर्ष की स्मृति को जीवंत करता है। इसी प्रकार अन्य द्वीपों के नाम स्वराज द्वीप, शहीद द्वीप और सुभाष द्वीप रखे गए। वर्ष 2023 में अंडमान के 21 द्वीपों का नाम 21 परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखा गया, जो राष्ट्र की वीरता परंपरा को सम्मान देने का ऐतिहासिक कदम है।

गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति

इस कार्यक्रम में अंडमान और निकोबार के लेफ्टिनेंट गवर्नर एडमिरल डीके जोशी (सेवानिवृत्त), नेताजी सुभाष चंद्र बोस आईएनए ट्रस्ट के अध्यक्ष ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) आर.एस. चिकारा तथा स्वतंत्रता आंदोलन और आईएनए से जुड़े अन्य विशिष्ट व्यक्तित्व उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि पराक्रम, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान ही विकसित भारत की मजबूत आधारशिला हैं।

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