लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए नागरिक संकल्प और युवा सहभागिता का संदेश

नई दिल्ली, 25 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों के नाम एक विशेष पत्र लिखते हुए लोकतंत्र को और अधिक मजबूत, समावेशी और आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया। अपने संदेश में उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे मतदान को केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के रूप में देखें और इसे पूरी निष्ठा के साथ निभाएं।

पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं का उत्सव

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र में विशेष रूप से पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि जब भी किसी परिवार, मोहल्ले या अपार्टमेंट में कोई युवा पहली बार मतदान का अधिकार प्राप्त करता है, तो उस अवसर को उत्सव की तरह मनाया जाना चाहिए। मिठाई बांटना, शुभकामनाएं देना और लोकतंत्र में उसके प्रवेश का स्वागत करना समाज की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवा मतदाताओं में देश का भविष्य बदलने की अपार क्षमता है, इसलिए उनका उत्साह बढ़ाना आवश्यक है।

मतदान केवल अधिकार नहीं, बड़ी जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री ने मतदान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केवल एक संवैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि लोकतंत्र को जीवंत रखने की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने उंगली पर लगने वाली अमिट स्याही को भारत के जीवंत लोकतंत्र का प्रतीक बताया। उनके अनुसार यह स्याही हर नागरिक को याद दिलाती है कि उसकी एक-एक भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।

शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को लोकतांत्रिक मूल्यों की नर्सरी बताते हुए कहा कि इन संस्थानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने आग्रह किया कि शिक्षण संस्थान नए मतदाताओं के लिए सम्मान समारोह आयोजित करें, जिससे युवाओं को अपने कर्तव्यों का अहसास हो सके। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हर पात्र युवा समय पर मतदाता के रूप में पंजीकृत हो।

युवा ऊर्जा और माई भारत प्लेटफॉर्म

प्रधानमंत्री ने युवाओं की ऊर्जा और उनकी कुछ कर गुजरने की भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी इंतजार करने में नहीं, बल्कि परिणाम देने में विश्वास रखती है। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने युवाओं से माई भारत प्लेटफॉर्म से जुड़ने का आह्वान किया, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें।

भारत का गौरवशाली लोकतांत्रिक इतिहास

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के लोकतांत्रिक इतिहास पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि देश में वर्ष 1951 में पहले आम चुनाव की शुरुआत हुई थी और अब भारत इन चुनावों के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। उन्होंने कहा कि भारत केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जननी भी है, जहां संवाद और वाद-विवाद की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

महिला सहभागिता से मजबूत होगा लोकतंत्र

प्रधानमंत्री ने समावेशी लोकतंत्र पर बल देते हुए कहा कि युवा महिलाओं की भागीदारी लोकतंत्र की नींव को और मजबूत करती है। जब महिलाएं सक्रिय रूप से मतदान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेती हैं, तो समाज अधिक संतुलित और सशक्त बनता है। इसलिए लोकतंत्र की मजबूती के लिए महिलाओं की सहभागिता अनिवार्य है।

विश्व के लिए प्रेरणा है भारत का चुनाव प्रबंधन

प्रधानमंत्री मोदी ने देश के चुनाव प्रबंधन की सराहना करते हुए कहा कि हिमालय की चोटियों से लेकर रेगिस्तान, घने जंगलों और अंडमान-निकोबार के द्वीपों तक हर नागरिक तक मतदान की सुविधा पहुंचाना भारत की लोकतांत्रिक शक्ति को दर्शाता है। उन्होंने इसे केवल दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव प्रबंधन नहीं, बल्कि लोकतंत्र का एक भव्य उत्सव बताया, जो आने वाले समय में भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

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