India Joins Pax Silica: भारत ने अमेरिका की अगुवाई में शुरू की गई रणनीतिक पहल ‘पैक्स सिलिका’ से औपचारिक रूप से जुड़ते हुए समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह पहल कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित विकास और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक भरोसेमंद बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। हस्ताक्षर के बाद अमेरिकी प्रशासन में मंत्री जैकब हेलबर्ग ने कहा कि ‘पैक्स सिलिका’ इस विश्वास की उद्घोषणा है कि भविष्य उनका है जो निर्माण और नवाचार करते हैं, खासकर जब स्वतंत्र समाज साथ खड़े हों।
घोषणा में रेखांकित किया गया है कि एआई आने वाले समय की सबसे प्रभावशाली शक्ति बनने जा रही है, जबकि सुरक्षित और स्थिर सप्लाई चेन किसी भी राष्ट्र की आर्थिक मजबूती और राष्ट्रीय सुरक्षा की आधारशिला है।
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‘पैक्स सिलिका’ क्या है?
यह पहल अमेरिकी विदेश विभाग की प्रमुख रणनीतिक योजना मानी जा रही है। इसका लक्ष्य सहयोगी देशों के साथ मिलकर एआई तकनीक को जिम्मेदारी और सुरक्षा के साथ विकसित करना, आवश्यक वस्तुओं और संसाधनों की आपूर्ति को विश्वसनीय बनाना तथा आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मजबूत आपूर्ति तंत्र के बिना दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता संभव नहीं है और एआई भविष्य की समृद्धि का प्रमुख चालक बनेगा।
समझौते के दौरान कौन रहा मौजूद?
इस महत्वपूर्ण अवसर पर भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर, अमेरिकी मंत्री जैकब हेलबर्ग और भारत के केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव उपस्थित थे।
India joins Pax Silica 🇮🇳🤝🇺🇸
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) February 20, 2026
Securing silicon supply chain, advancing semiconductor manufacturing. pic.twitter.com/5I117ZPfHs
अमेरिकी अधिकारियों ने भारत की भागीदारी को निर्णायक कदम बताया। सर्जियो गोर ने इसे “स्वतंत्रता, शक्ति और प्रगति” के पक्ष में लिया गया निर्णय करार देते हुए कहा कि यह साझेदारी तय करेगी कि भविष्य की तकनीक का निर्माण बेंगलुरु और सिलिकॉन वैली जैसे नवाचार केंद्रों में होगा या उन देशों में जहां निगरानी आधारित व्यवस्था हावी है।
पैक्स सिलिका में भारत के क्या फायदे
भारत को एआई के क्षेत्र में रिसर्च और इनोेवेशन में सहयोग मिलेगा
वैश्विक तकनीकि का साझा उपयोग और पहुंच बढ़ेगी
एआई सप्लाई चेन में चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम होगी
महत्वपूर्ण खिनज और चिप सप्लाई मजबूत होगी
अमेरिका तथा सहयोगी देशों से संबंध मजबूत होंगे
वैश्विक टैक शक्ति में भारत की स्वीकार्यता बढ़ेगी
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