नईदिल्ली। साइबर सुरक्षा कंपनी कास्परस्की ने बताया है कि वर्ष 2025 में उसके सुरक्षा सिस्टम ने भारत में 4.7 करोड़ से अधिक ऑनलाइन साइबर खतरों को रोकने में मदद की। कंपनी के अनुसार इस दौरान देश के करीब 24.7 प्रतिशत इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को ऐसे खतरों का सामना करना पड़ा।
ये खतरे मुख्य रूप से फिशिंग, मालवेयर, संदिग्ध वेबसाइट और ऑनलाइन ठगी से जुड़े होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सेवाओं और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के कारण साइबर अपराधियों की गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। इसलिए उपयोगकर्ताओं को मजबूत पासवर्ड, सुरक्षित वेबसाइट और सतर्क ऑनलाइन व्यवहार अपनाने की सलाह दी गई है।
जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच रोके गए खतरे
कास्परस्की ने कहा कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच उसके उत्पादों ने भारत में उपयोगकर्ताओं के कंप्यूटर पर आने वाले 4 करोड़ 75 लाख से अधिक इंटरनेट आधारित साइबर खतरों का पता लगाकर उन्हें ब्लॉक किया। कंपनी के मुताबिक भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को औसतन हर दिन करीब 1 लाख 30 हजार वेब आधारित खतरों का सामना करना पड़ा। कास्परस्की सिक्योरिटी नेटवर्क के आंकड़ों के अनुसार वेब आधारित खतरों से प्रभावित उपयोगकर्ताओं के मामले में दुनिया में भारत 62वें स्थान पर रहा।
साइबर अपराधी अब क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर रहे
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साइबर सुरक्षा कंपनी के भारत प्रमुख जयदीप सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अब लोगों को फंसाने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं। कई मामलों में फिशिंग लिंक छिपाने के लिए क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया जा रहा है। मोबाइल से ऐसे क्यूआर कोड स्कैन करने पर लोग ठगी का शिकार हो सकते हैं
फाइललेस मैलवेयर 2025 में भी घातक साइबर खतरा रहा
cyber attack india: कास्परस्की ने कहा कि इंटरनेट ब्राउजर के जरिये होने वाले हमले अब भी साइबर अपराधियों का सबसे आम तरीका हैं। हमलावर ब्राउजर और उसके प्लग-इन में मौजूद कमजोरियों का फायदा उठाकर लोगों के सिस्टम में घुसने की कोशिश करते हैं। कास्परस्की के अनुसार 'फाइललेस मैलवेयर' 2025 में भी एक घातक साइबर खतरा बना रहा। यह कंप्यूटर की मेमोरी में छिपकर काम करता है।
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