भोपाल, । मध्यप्रदेश में शिक्षक शिक्षा और शिक्षक कल्याण के क्षेत्र में सक्रिय एवं गांधी विचार से सरोकार रखने वाले वरिष्ठ शिक्षाविद् सुरेंद्रनाथ दुबे (90 वर्ष) का रविवार 8 मार्च प्रातः 6 बजे निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार  भोपाल में किया गया। वे पिछले 3-4 माह से बीमार चल रहे थे। दुबे जी पिछले पाँच दशकों से शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षिक विमर्श से जुड़े रहे तथा शिक्षक समुदाय के मार्गदर्शक के रूप में व्यापक रूप से सम्मानित थे।

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शिक्षा और शिक्षक कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान

सुरेंद्रनाथ दुबे का पूरा जीवन शिक्षक शिक्षा, शिक्षक कल्याण और शैक्षिक सुधारों के लिए समर्पित रहा। वे मध्यप्रदेश में शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षा नीति से जुड़े कार्यों में लंबे समय तक सक्रिय रहे। उन्होंने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), भोपाल) में कार्य करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहलें कीं। इसी दौरान वे परिषद की शैक्षिक पत्रिका ‘पलाश’ के संपादक भी रहे। इस पत्रिका के माध्यम से उन्होंने शिक्षा, शिक्षण पद्धति और शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े विचारों को व्यापक मंच प्रदान किया।

कई जिलों में ‘शिक्षक सदन’ के निर्माण किया

सुरेंद्रनाथ दुबे ने राष्ट्रीय शिक्षक कल्याण प्रतिष्ठान, नई दिल्ली में कार्य करते हुए तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह के साथ मिलकर मध्यप्रदेश के कई जिलों में ‘शिक्षक सदन’ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन शिक्षक सदनों का उद्देश्य शिक्षकों को संवाद, प्रशिक्षण और शैक्षिक गतिविधियों के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराना था। यह पहल शिक्षकों के संगठन और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है।

सन 1964 में कोठारी आयोग का गठन और 1968 में नई शिक्षा नीति के निर्माण से लेकर 2002 तक की शिक्षा नीतियों के निर्माण और अनुच्छेद 45 को लागू करने में आप सक्रिय रहे। इस विषय पर लेख, व्याख्यान, चिंतन और विचार के कारण प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविद् और मानव अधिकारवादी डॉ. गुलाब चौरसिया के साथ संवाद बना रहा। 25 जून 2003 को थाईलैंड में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में डॉ. गुलाब चौरसिया के साथ भाग लेने का अवसर मिला

श्री दुबे स्टेट बोर्ड ऑफ टीचर एजुकेशन के सचिव भी रहे। उन्होंने राज्य में शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई नीतिगत पहलें कीं। वे मध्यप्रदेश के तत्‍कालीन स्कूल शिक्षा मंत्री महेंद्र सिंह कालुखेड़ा और इंद्रजीत कुमार के सलाहकार भी रहे। शिक्षा प्रशासन और नीति निर्माण के स्तर पर उनके अनुभव का लाभ राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मिला।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी किया प्रतिनिधित्व

दुबे शिक्षा और मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय रहे। वर्ष 2003 में वे शिक्षाविद् Gulab Chaurasia के साथ थाईलैंड में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल हुए थे।

वरिष्ठ शिक्षाविद् सुरेंद्रनाथ दुबे का जीवन शिक्षा, शिक्षक कल्याण और शैक्षिक सुधारों को समर्पित रहा। उनके निधन से शिक्षा जगत को एक बड़ी क्षति हुई है।

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