लोगों के मन में आज की युवा पीढ़ी, खासकर जेन जी को लेकर कई तरह की धारणाएं हैं। कोई उन्हें “सेंसिबल” कहता है, तो कोई कहता है कि यह सबसे बिगड़ैल पीढ़ी कहता है। इसी बढ़ती बहस के चलते एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जो दावा करती है कि किशोरावस्था के बाद युवाओं में शराब पीने, ड्रग्स का सेवन करने और वेपिंग जैसी आदतें बढ़ती जा रही हैं।
रिपोर्ट में हुए चौंकाने वाले खुलासे
यूसीएल सेंटर फॉर लोंगिट्युडिनल स्टडीज (CLS) की रिपोर्ट के अनुसार, जेन ज़ेड में यह आदतें बढ़ रही हैं, जो किसी भी तरह से सराहनीय नहीं हैं। शोधकर्ताओं द्वारा की गई कुछ तुलनाएं स्थिति को और स्पष्ट करती हैं।
शराब की बढ़ती लत: 23 साल की उम्र में लगभग 63% से 68% (10 में से 7) युवाओं ने पिछले एक साल में ‘बिंज ड्रिंकिंग’ करने की बात कबूली है। बिंज ड्रिंकिंग का मतलब है एक ही बार में 6 या उससे ज्यादा पेग पीना। 17 साल की उम्र में हर महीने ऐसा करने वाले युवा केवल 10% थे, जो 23 की उम्र तक 29% हो गए।
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हार्ड ड्रग्स का खतरनाक शौक:17 साल की उम्र में 31% युवा भांग का सेवन करते थे, वहीं 23 साल में यह आंकड़ा 49% तक बढ़ गया। सबसे चिंता की बात यह है कि कोकीन, केटामाइन और एक्स्टसी जैसे हार्ड ड्रग्स आजमाने वालों की संख्या 10% से सीधे 32% (तीन गुना से ज्यादा) हो गईहै।
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सिगरेट स्थिर, वेपिंग में भारी उछाल
वेपिंग में भारी उछाल: सिगरेट पीने वालों की संख्या लगभग स्थिर (8% से 9%) रही, लेकिन हर दिन वेपिंग करने वालों का आंकड़ा 3% से बढ़कर 19% हो गया।
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सट्टेबाजी: 23 साल की उम्र तक लगभग 32% युवाओं ने सट्टेबाजी की बात मानी। हालांकि राहत की बात यह है कि इनमें से केवल 4% को ही इसकी बुरी लत थी।
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यूनिवर्सटीस का महौल को बच्चों को बिगाड़ रहा
Institute of Alcohol Studies की मुख्य कार्यकारी डॉ. कैथरीन सेवेरी के अनुसार, युवाओं की इस बढ़ती आदत का एक प्रमुख कारण विश्वविद्यालयों का माहौल भी है। उनका कहना है कि शराब आसानी से और सस्ती मिलना, और विश्वविद्यालयों के कार्यक्रमों में शराब कंपनियों का स्पॉन्सरशिप होना भी इसके बड़े कारण हैं।
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