अगर आपके बच्चे खाना कम खाते हैं या आनाकानी करते हैं तो इसे नजरअंदाज न करें। यह ईटिंग डिसऑर्डर का संकेत भी हो सकता है। ईटिंग डिसऑर्डर लोगों की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करता है। अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह शरीर में कमज़ोरी, हार्मोनल असंतुलन, दिल और पाचन की क्षमता को कमजोर कर देता है।

भारत में लगभग 17% लोग इससे पीड़ित

National Journal of Community Medicine की एक रिपोर्ट के अनुसार, 350 लोगों में 81 लोगों में ईटिंग डिसऑर्डर की समस्या पाई गई, जो कि लगभग 23.1% है। मतलब हर चार में से एक में यह समस्या देखी की गई।

आंकड़े छोटे लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ रही है। अमेरिका की एक रिसर्च के अनुसार भारत में लगभग 17.2% लोगों में यह डिसऑर्डर पाया गया है। इसके मुख्य कारण सोशल मीडिया और बॉडी इमेज की चिंता माने जाते हैं। इसलिए माता-पिता को बच्चों के खाने पर खास ध्यान देना चाहिए।। 

बच्चों में इसके लक्षण

health and wellness: हर बार खाना न पसंद करना ईटिंग डिसऑर्डर नहीं होता। चिंता तब है, जब यह व्यवहार लगातार रहे और वजन, हाइट, ग्रोथ, ऊर्जा या मूड पर असर दिखे। अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन के अनुसार बच्चों में कुछ संकेत ऐसे हो सकते हैं, जिन पर माता-पिता को ध्यान देना चाहिए

Eating Disorders in Children - Psychologist Warsaw

ध्यान देने योग्य संकेत:

  • बच्चों का वजन या ऊँचाई उम्र के अनुसार नहीं बढ़ना
  •  खाने के समय घबराहट या हिचकिचाहट
  •  खाने के बाद उल्टी जैसा महसूस होना
  •  पढ़ाई में ध्यान कम होना चिड़चिड़ापन
  •  बहुत कमजोर दिखना या बेहोशी आना

 ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करें या आवश्यकता पड़ने पर डाइटिशियन से पोषक और स्वस्थ आहार योजना बनवाएं।

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