नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के चौथे दिन तकनीक और भविष्य की दिशा को लेकर बड़े विचार सामने आए। मंच से नरेंद्र मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए नया सुझाव रखा, तो उद्योग जगत की ओर से मुकेश अंबानी ने भारत को ‘बौद्धिक युग’ में ले जाने के लिए 10 लाख करोड़ रुपये निवेश की घोषणा की। कार्यक्रम को सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन जैसे वैश्विक तकनीकी नेताओं ने भी संबोधित किया।
प्रधानमंत्री के संबोधन की प्रमुख बातें
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में एआई को लेकर आशंका और भय का माहौल है, लेकिन भारत इसे अपने उज्ज्वल भविष्य और नई संभावनाओं के रूप में देखता है। उनके अनुसार, यह तकनीक देश की विकास यात्रा का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है।
उन्होंने एआई के लिए ‘एम.ए.एन.ए.वी’ (M.A.N.A.V) नाम से एक व्यापक दृष्टि प्रस्तुत की। इस दृष्टिकोण में एआई को नैतिक, जवाबदेह, राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करने वाला, सभी के लिए सुलभ और वैध होना आवश्यक बताया गया। प्रधानमंत्री का जोर था कि तकनीक केवल डेटा का खेल न बनकर मानव कल्याण का साधन बने।
Unfortunately, AI deepfakes and fabricated content are destabilizing open societies.
— Narendra Modi (@narendramodi) February 19, 2026
Watermarking and clear source standards are increasingly necessary.
We must also be more vigilant about child safety. pic.twitter.com/9bw2QMGx6F
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डिजिटल दुनिया में बढ़ती भ्रामक सामग्री को देखते हुए उन्होंने एक नई पहल का सुझाव दिया। जैसे खाद्य उत्पादों पर पोषण संबंधी जानकारी का लेबल होता है, उसी प्रकार डिजिटल सामग्री पर ‘प्रामाणिकता चिह्न’ लगाया जाना चाहिए। इससे लोगों को यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-सी सामग्री वास्तविक है और कौन-सी एआई द्वारा निर्मित।
Artificial Intelligence is among the biggest transformations in human history! pic.twitter.com/TpiWRStnKs
— Narendra Modi (@narendramodi) February 19, 2026
प्रधानमंत्री ने एआई तकनीक को अधिक खुला और साझा करने योग्य बनाने की वकालत भी की। उनका मानना है कि जब तकनीक सीमित दायरे से बाहर आएगी और अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचेगी, तभी नवाचार और सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी।
रोजगार को लेकर उठती आशंकाओं पर उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता नौकरियां समाप्त करने के बजाय नए अवसरों का सृजन करेगी। उन्होंने कौशल विकास और पुनः कौशल प्रशिक्षण को जन-आंदोलन का रूप देने पर बल दिया, ताकि मानव और मशीन साथ मिलकर सृजनात्मक कार्य कर सकें।
उद्योग जगत की बड़ी घोषणाएं
टाटा समूह
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एन चंद्रशेखरन ने बताया कि टाटा समूह देश का पहला बड़े स्तर का एआई-अनुकूलित डेटा केंद्र विकसित कर रहा है, जो उन्नत प्रशिक्षण और इंफ्रेंसिंग के लिए समर्पित होगा। इसकी प्रारंभिक क्षमता 100 मेगावाट रखी गई है, जिसे आगे चलकर एक गीगावाट तक विस्तारित करने की योजना है। इस परियोजना के लिए OpenAI के साथ साझेदारी की गई है।
रिलायंस समूह
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वहीं मुकेश अंबानी ने कहा कि जिस प्रकार जियो ने देश में डेटा सेवाओं को सुलभ और किफायती बनाया, उसी तरह अब एआई को भी आम नागरिक तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि जियो और रिलायंस अगले सात वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेंगे, जिससे देश की अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में एआई आधारित सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
अंबानी ने एआई को आधुनिक “अक्षय पात्र” की संज्ञा देते हुए कहा कि यह तकनीक हर उपकरण को अधिक सक्षम, तीव्र और बुद्धिमान बना सकती है। उनके अनुसार, यह परिवर्तन रोजगार छीनने के बजाय उच्च कौशल वाले नए अवसरों को जन्म देगा और भारत को बौद्धिक युग की ओर अग्रसर करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई इम्पैक्ट समिट में लीडर्स प्लेनरी में अपने संबोधन में, मानव-केंद्रित और संवेदनशील वैश्विक एआई इकोसिस्टम के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।
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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- "आखिरकार, मानवता ने हमेशा व्यवधानों को अवसरों में परिवर्तित किया है और एआई का उदय एक और ऐसा ही महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है। आइए, मिलकर एक ऐसा रोडमैप तैयार करें जो यह सुनिश्चित करे कि एआई सही प्रभाव डाले, और यह तभी संभव है जब हम सही समय पर, सही नीतियों के साथ, सही निर्णय लें।"
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