मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा: हर श्रद्धालु बिना असुविधा पवित्र अनुष्ठानों में हो सके शामिल

भोपाल, 11 फरवरी (हि.स.)। Mohan Yadav ने कहा कि Ujjain में आयोजित होने वाला सिंहस्थ महापर्व विश्व के लिए अद्वितीय आस्था का केंद्र है। सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालु मोक्षदायिनी Shipra River में स्नान करेंगे और इस आयोजन की व्यवस्थाओं पर पूरी दुनिया की निगाह रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की प्राथमिकता यह है कि प्रत्येक श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के सभी धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले सके।

अधोसंरचना कार्यों की गहन समीक्षा

मुख्यमंत्री उज्जैन में सिंहस्थ-2028 के अंतर्गत चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। अलग-अलग विभागों द्वारा किए जा रहे निर्माण, सड़कों, घाटों, पेयजल, विद्युत, आवास और यातायात प्रबंधन की प्रगति का बिंदुवार आकलन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन राज्य की प्रतिष्ठा से जुड़ा है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश नहीं है। अधिकारियों को समय-सीमा का सख्ती से पालन करने और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।

उज्जैनवासियों से सेवाभाव की अपील

मुख्यमंत्री ने शहर के नागरिकों से आह्वान किया कि वे सिंहस्थ को अपना व्यक्तिगत दायित्व मानें। उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था तैयार करेगा, लेकिन जनसहभागिता से ही आयोजन भव्य और सुव्यवस्थित बनता है। लोगों में जिम्मेदारी और समर्पण का भाव जगाने के लिए प्रशासन को लगातार संवाद बनाए रखने को कहा गया।

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किसानों की सिंचाई प्रभावित न हो

बैठक में गेहूं की फसल की सिंचाई का विषय विशेष रूप से उठाया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि घाट निर्माण या अन्य कार्यों के चलते किसानों को पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। नर्मदा जल के माध्यम से आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा शिप्रा में पर्याप्त जल प्रवाह बनाए रखने के लिए अधिकारियों को पहले से योजना बनाने को कहा गया। उन्होंने माना कि फसल को शीघ्र ही एक और सिंचाई की आवश्यकता होगी, इसलिए व्यवस्थाएं समय रहते पूरी कर ली जाएं।

निगरानी तंत्र होगा मजबूत

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सिंहस्थ के कार्यों में किसी प्रकार की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी देते हुए कहा गया कि नियमित मॉनिटरिंग हो और जहां अधिकारियों की कमी है वहां तत्काल पदस्थापना की जाए। जरूरत पड़ने पर अनुभवी सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सेवाएं लेने के लिए भी नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

रिवर्स कैलेंडर से काम में तेजी

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब रिवर्स कैलेंडर बनाकर लक्ष्य तय करने होंगे। सिंहस्थ से पहले दो वर्षाकाल आएंगे, ऐसे में निर्माण कार्यों को मौसम की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तेजी से पूरा करना अनिवार्य है। उन्होंने निर्माण एजेंसियों के संसाधनों की निरंतर समीक्षा करने और सूक्ष्म स्तर तक प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। अधिकारियों से चौबीसों घंटे सक्रिय रहकर युद्ध स्तर पर तैयारियां करने को कहा गया।

त्योहारों से मिलेगा प्रबंधन का अनुभव

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाशिवरात्रि, श्रावण, नागपंचमी जैसे बड़े अवसरों पर व्यवस्थाओं को प्रयोग के तौर पर लागू किया जाए। इन आयोजनों से मिले अनुभव सिंहस्थ में भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था बनाने में सहायक होंगे। उन्होंने वैकल्पिक मार्गों के चयन और उन्नयन पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए ताकि दबाव को अलग-अलग दिशाओं में विभाजित किया जा सके।

घाटों और मार्गों का उन्नयन जरूरी

मंगलनाथ, भूखीमाता और रामघाट के आसपास के क्षेत्रों में संपर्क मार्गों को मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई गई। श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए इन मार्गों की पहचान कर उन्हें विकसित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही मेला क्षेत्र के बाहर सामुदायिक भवन, स्कूल, कॉलेज और धर्मशालाएं बनाने वाली संस्थाओं को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया गया।

ठहरने की व्यवस्था पर फोकस

सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवास सबसे बड़ी चुनौती माना गया। मुख्यमंत्री ने होम स्टे, धर्मशालाओं और शैक्षणिक संस्थानों में आधारभूत सुविधाएं विकसित करने के लिए ठोस योजना बनाने को कहा। आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को प्रशिक्षण देकर उन्हें भी इस व्यवस्था से जोड़ने की बात कही गई, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिल सके।

समय पर काम पूरा करने वालों को प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जो एजेंसियां समय पर और गुणवत्तापूर्ण काम पूरा करेंगी, उन्हें प्रोत्साहित करने की नीति बनाई जाए। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निर्माण कार्यों में तेजी आएगी।

बैठक में गौतम टेटवाल, मुकेश टटवाल, अनिल जैन कालूहेडा, सतीश मालवीय, जितेन्द्र पंड्या, कलावती यादव, आशीष सिंह, राकेश गुप्ता, रौशन कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे और सभी ने समन्वय के साथ कार्य करने का भरोसा दिया।

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