भोपाल। राजधानी की जीवनरेखा कहा जानेवाले बड़ा तालाब को लेकर कलेक्ट्रेट में हुई उच्च स्तरीय बैठक में प्रशासन की कार्यशैली कटघरे में आ गई। बैठक सांसद आलोक शर्मा की पहल पर बुलाई गई थी, जहां अतिक्रमण और प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाया गया।
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बैठक में जब कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह ने एसडीएम से पूछा कि तालाब किनारे कितना अतिक्रमण शेष है, तो अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। तीनों एसडीएम ने माना कि टीएंडसीपी के नक्शे के अनुसार मार्किंग तक पूरी नहीं हो पाई। इस पर कलेक्टर ने एक हफ्ते की मोहलत देते हुए निर्देश दिए कि बड़े और स्पष्ट अतिक्रमण तत्काल हटाए जाएं। अब हर सप्ताह समीक्षा बैठक होगी।
रामसर साइट में हैं अनेकों अतिक्रमण
बड़े तालाब के एफटीएल लेवल की मुनारों से ग्रामीण क्षेत्र में 250 मीटर और शहरी क्षेत्र से 50 मीटर तक के दायरे में कोई निर्माण की मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए लेकिन फिर भी बड़े तालाब पर शहरी इलाकों में ऐसी कई जगहें हैं जहां एफटीएल मुनारों से सट कर ही निर्माण हो रखें हैं। ऐसे निर्माण एक या दो नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में मौजूद हैं।
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गोरे गांव, सूरजनगर, बिशनखेड़ी, भदभदा,बील गांव और सूरजनगर में बड़ी बिल्डिंग, फार्म हाउस, रिसॉर्ट भी देखने को मिल सकते हैं। हैरत की बात ये है कि बड़ा तालाब रामसर साइट भी है। बावजूद सालों से सिर्फ फाइलों में ही कब्जे हटे हैं।
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31 से सिमटकर 8-9 वर्ग किमी रह गया
सांसद ने कहा कि कभी 31 वर्ग किलोमीटर के भराव क्षेत्र वाला बड़ा तालाब अतिक्रमण और सूखे के कारण तेजी से सिमट रहा है। गंदे नालों का पानी सीधे तालाब में मिल रहा है, जबकि शोधन संयंत्रों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने पूछा कि कितने नाले रोके गए और कितने अब भी प्रदूषण फैला रहे हैं।
अवैध निर्माण और फार्म हाउस पर सख्ती
तालाब किनारे अवैध फार्म हाउस और पक्के निर्माण पर भी सांसद ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह केवल अतिक्रमण नहीं, बल्कि भोपाल की ऐतिहासिक जल धरोहर पर हमला है। कानून तोडऩे वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
एनजीटी के आदेशों पर सवाल
सांसद ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों के पालन की स्थिति पूछी और भविष्य में अतिक्रमण रोकने के लिए स्थायी तंत्र बनाने को कहा। भदभदा क्षेत्र में शेष झुग्गियों को लेकर भी जवाब मांगा गया।
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नया सर्वे और मास्टर प्लान
बैठक में स्पष्ट संकेत दिए गए कि बड़ा तालाब का नए सिरे से सर्वे कराया जाएगा और मास्टर प्लान तैयार होगा। उद्देश्य है तालाब का स्रोत क्षेत्र सुरक्षित रहे, सीवेज पूरी तरह रोका जाए और भविष्य में कोई अवैध निर्माण न हो। बड़ा तालाब पर अब ढिलाई नहीं चलेगी। एक हफ्ते में कार्रवाई दिखनी चाहिए, वरना जवाबदेही तय होगी।
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