आज के समय में फिट रहने की चर्चा लगभग हर घर और हर उम्र के लोगों के बीच हो रही है। कोई जिम जाता है, कोई योग करता है, तो कोई यह मानता है कि रोज़ सुबह टहलना ही पर्याप्त है। पार्क में सुबह के समय जब अलग-अलग उम्र के लोग तेज़ चाल से चलते दिखाई देते हैं, तो मन में स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है — क्या केवल चलने से शरीर पूरी तरह फिट और संतुलित रह सकता है?
चलना एक ऐसी गतिविधि है जिसे लगभग हर व्यक्ति बिना किसी विशेष तैयारी के शुरू कर सकता है। इसके लिए महंगे साधनों या विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती। बच्चे, युवा, वयस्क और बुजुर्ग सभी इसे अपनी क्षमता के अनुसार कर सकते हैं। लेकिन फिटनेस केवल वजन कम करने तक सीमित नहीं है। इसमें मांसपेशियों की ताकत, हड्डियों की मजबूती, लचीलापन और मानसिक संतुलन भी शामिल है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि विशेषज्ञ इस विषय पर क्या कहते हैं और विज्ञान हमें क्या सिखाता है।
चलना क्यों है फायदेमंद
चलना शरीर की सबसे प्राकृतिक गतिविधियों में से एक है। जब हम नियमित रूप से चलते हैं, तो हृदय की कार्यक्षमता बेहतर होती है और रक्त संचार संतुलित रहता है। इससे शरीर के प्रत्येक अंग तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण पहुंचता है। यही प्रक्रिया शरीर को सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखती है।
वैज्ञानिक अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि रोज़ लगभग तीस मिनट तेज़ चाल से चलने से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मोटापे का खतरा कम हो सकता है। नियमित चलना शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी को कम करने में सहायक होता है और शर्करा के स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है। बच्चों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है, क्योंकि उनके विकास के समय हड्डियों और मांसपेशियों को नियमित गतिविधि की आवश्यकता होती है।
क्या केवल चलना पर्याप्त है?
यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण है। चलना निश्चित रूप से स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, लेकिन शरीर के सभी हिस्सों को समान रूप से मजबूत बनाने के लिए यह अकेले पर्याप्त नहीं हो सकता। शरीर को संपूर्ण रूप से स्वस्थ रखने के लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियों की आवश्यकता होती है।
हमारे शरीर को सामान्य रूप से तीन प्रकार की गतिविधियों की जरूरत होती है —
• सहनशक्ति बढ़ाने वाली गतिविधि
• मांसपेशियां मजबूत करने वाली गतिविधि
• लचीलापन बढ़ाने वाली गतिविधि
चलना मुख्य रूप से सहनशक्ति और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। लेकिन यह हाथों, कंधों और ऊपरी शरीर की मांसपेशियों को उतना सक्रिय नहीं करता जितना अन्य अभ्यास कर सकते हैं। इसलिए केवल चलने पर निर्भर रहना कभी-कभी शरीर के विकास को सीमित कर सकता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
जब हम चलते हैं, तो मुख्य रूप से पैरों की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। इससे जांघ, पिंडली और कूल्हों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। यह हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने में भी मदद करता है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति केवल चलने तक ही सीमित रहता है और हाथों या पेट की मांसपेशियों के लिए कोई अतिरिक्त अभ्यास नहीं करता, तो शरीर का ऊपरी हिस्सा अपेक्षाकृत कमजोर रह सकता है।
वैज्ञानिक शोध यह भी बताते हैं कि मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने के लिए सप्ताह में कम से कम दो दिन हल्का शक्ति अभ्यास करना लाभकारी होता है। बच्चों के लिए भी केवल टहलना पर्याप्त नहीं है। उन्हें दौड़ना, कूदना, खेलना और संतुलन वाली गतिविधियां करनी चाहिए ताकि उनका समग्र विकास हो सके।
बच्चों के लिए क्या बेहतर है?
बच्चों का शरीर निरंतर विकास की अवस्था में होता है। केवल चलना उनके लिए शुरुआती गतिविधि हो सकती है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। उन्हें ऐसे खेल खेलने चाहिए जिनमें दौड़ना, कूदना, पकड़ना और संतुलन बनाना शामिल हो। इससे उनकी मांसपेशियां, हड्डियां और तंत्रिका तंत्र बेहतर तरीके से विकसित होते हैं।
नियमित सक्रिय खेल बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और उनकी सामाजिक क्षमता को भी मजबूत करते हैं। यदि बच्चा केवल टहलता है लेकिन सक्रिय खेलों में भाग नहीं लेता, तो उसका शारीरिक विकास सीमित हो सकता है।
वॉकिंग के मानसिक लाभ
चलना केवल शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि मन के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। सुबह की ताजी हवा और प्राकृतिक वातावरण मानसिक तनाव को कम करते हैं। नियमित चलने से मस्तिष्क में ऐसे रसायन बनते हैं जो मन को शांत और प्रसन्न रखते हैं।
बच्चों में नियमित शारीरिक गतिविधि से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है और चिड़चिड़ापन कम होता है। जिन बच्चों की दिनचर्या में नियमित गतिविधि शामिल होती है, वे पढ़ाई में भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
कब केवल चलना पर्याप्त हो सकता है?
यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से निष्क्रिय रहा है, तो चलना एक सुरक्षित और प्रभावी शुरुआत हो सकती है। बुजुर्गों के लिए या उन लोगों के लिए जिन्हें हल्की स्वास्थ्य समस्याएं हैं, चलना एक कम जोखिम वाला विकल्प है।
लेकिन यदि लक्ष्य शरीर की मांसपेशियों को अधिक मजबूत बनाना, संतुलन सुधारना या शरीर को सुडौल बनाना है, तो अन्य गतिविधियों को भी शामिल करना आवश्यक है। केवल चलना सीमित परिणाम दे सकता है।
संतुलित दिनचर्या कैसे बनाएं?
सप्ताह में कम से कम पांच दिन तीस मिनट तेज़ चाल से चलना एक अच्छा आधार है। इसके साथ सप्ताह में दो या तीन दिन हल्का शक्ति अभ्यास जोड़ें, जैसे उठक-बैठक या दीवार के सहारे अभ्यास। बच्चों के लिए रोज़ कम से कम एक घंटा सक्रिय खेल जरूरी है।
इसके अलावा, शरीर के लचीलेपन के लिए खिंचाव अभ्यास भी करें। इससे मांसपेशियों में जकड़न कम होती है और चोट की संभावना घटती है। संतुलित दिनचर्या ही दीर्घकालीन फिटनेस की कुंजी है।
परिणाम क्या मिल सकते हैं?
यदि आप केवल चलना शुरू करते हैं, तो कुछ ही सप्ताह में ऊर्जा स्तर बढ़ने और वजन संतुलन में सुधार महसूस हो सकता है। मन शांत रहेगा और नींद की गुणवत्ता बेहतर होगी।
लेकिन यदि आप विविध गतिविधियां जोड़ते हैं, तो शरीर अधिक संतुलित, मजबूत और लचीला बनेगा। इससे दैनिक जीवन के कार्य भी आसानी से किए जा सकेंगे और चोट का खतरा कम होगा।
निष्कर्ष
चलना एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी गतिविधि है जो हृदय स्वास्थ्य, वजन नियंत्रण और मानसिक शांति के लिए अत्यंत लाभकारी है। लेकिन शरीर को पूरी तरह फिट और संतुलित रखने के लिए केवल चलना पर्याप्त नहीं हो सकता।
बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए विविध शारीरिक गतिविधियां जरूरी हैं। इसलिए चलना जारी रखें, लेकिन इसके साथ हल्का शक्ति अभ्यास और लचीलापन बढ़ाने वाली गतिविधियां भी जोड़ें। यही संपूर्ण और दीर्घकालीन स्वास्थ्य की दिशा में सही कदम है।
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