मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा: प्रदेश से नक्सलवाद के सफाए में पुलिस की भूमिका ऐतिहासिक

भोपाल: कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में शुक्रवार को आयोजित आईपीएस मीट का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के वर्तमान और रिटायर्ड वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग की भूमिका, उसकी चुनौतियों, अनुशासन और राष्ट्र व समाज की सुरक्षा में उसके योगदान को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शासन के लिए सभी विभाग महत्वपूर्ण हैं, लेकिन पुलिस का महत्व विशेष है, क्योंकि समाज में शांति, कानून व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा सीधे पुलिस से जुड़ी होती है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रतीकात्मक उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें दो पौधे मिले और वे उन पौधों के माध्यम से पुलिस की तुलना कर रहे थे। जैसे पौधा कठिन परिस्थितियों में भी पनपता है, वैसे ही पुलिस कठिनाइयों और चुनौतियों के बीच भी पूरे उत्साह और समर्पण के साथ अपने कर्तव्य में लगी रहती है। उन्होंने कहा कि पुलिस का अनुशासन और उसकी विशिष्ट छवि समाज में अलग पहचान बनाती है और हर नागरिक इसे महसूस करता है।

IPS MEET

मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि वर्ष 2026 के इस वार्षिक सम्मेलन में जब वे अधिकारियों से संवाद कर रहे हैं, तो यह कहना अब असंभव नहीं लगता कि प्रदेश के भीतर नक्सल मूवमेंट पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2024 में जब नक्सलवाद के खात्मे का मिशन शुरू हुआ था, तब यह लक्ष्य बेहद कठिन और लगभग असंभव प्रतीत हो रहा था। मुख्यमंत्री ने इसे एक उदाहरण से समझाते हुए कहा कि जैसे कोई व्यक्ति कमरे में सोने की तैयारी कर रहा हो और उसी कमरे में सांप घूम रहा हो, तो चैन से सोना संभव नहीं होता। ऐसे में पुलिस ने उस सांप के फन को कुचलकर असंभव को संभव कर दिखाया।

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद पिछले कई दशकों से देश के लिए एक गंभीर समस्या बना हुआ था। इसके चलते पुलिसकर्मियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों तक को अपनी जान गंवानी पड़ी। वर्ष 1988 से शुरू हुआ यह नक्सल मूवमेंट अब जाकर प्रदेश से पूरी तरह समाप्त हो गया है और इसका श्रेय पूरी तरह से प्रदेश की पुलिस को जाता है। मुख्यमंत्री ने पुलिस बल की इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मिसाल बनेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आईपीएस मीट केवल एक औपचारिक सम्मेलन नहीं है, बल्कि अगले दो दिनों में नए और पुराने अधिकारी मिलकर भविष्य की चुनौतियों को समझेंगे, अपने अनुभव साझा करेंगे और पुलिस व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में नए विचारों के साथ आगे बढ़ेंगे। वरिष्ठ अधिकारी अपने अनुभवों के आधार पर नए अधिकारियों का मार्गदर्शन करेंगे, जिससे पुलिस बल में कार्यकुशलता और संवेदनशीलता दोनों का विकास होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2026 पुलिस के लिए एक सफल और प्रेरणादायक वर्ष साबित होगा।

IPS MEET

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने अनुशासन के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश आजाद हुआ, लेकिन अनुशासन के बल पर हम निरंतर आगे बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने पड़ोसी देश पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की स्थिति हमारे सामने है, जबकि हमारे यहां पुलिस और प्रशासन अपने दायरे में रहकर जिम्मेदारी के साथ काम करते हुए प्रदेश को सुरक्षित और स्थिर बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि पुलिसकर्मियों के प्रमोशन से जुड़ी सकारात्मक खबरें जल्द सामने आएंगी और समय पर पदोन्नति देकर अच्छे कार्यों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अपराध नियंत्रण पर बात करते हुए कहा कि अपराधियों के खिलाफ पुलिस की सफल मुहिम पूरे देश के लिए एक आदर्श है। उन्होंने पुलिस से अपेक्षा जताई कि पीएफआई, मुजाहिद जैसे देशविरोधी संगठनों और ताकतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखी जाए और जहां भी ऐसी गतिविधियां दिखें, वहीं उन्हें समाप्त कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि संगठित अपराध और नशे के सौदागरों के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं है। ऐसे तत्व समाज के लिए घातक हैं और इनके खिलाफ केंद्र की एजेंसियों के आने से पहले ही प्रदेश की पुलिस को कठोर कदम उठाने चाहिए।

IPS MEET

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने महाभारत का उदाहरण देते हुए कर्तव्य की भावना को भी समझाया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह मानते हैं कि यदि भगवान कृष्ण ने गीता का उपदेश देकर अर्जुन को युद्ध के लिए प्रेरित नहीं किया होता तो युद्ध नहीं होता, लेकिन सच्चाई यह है कि युद्ध तय था। भगवान कृष्ण ने भी इस युद्ध में अपने लोगों को खोया, उनकी सेना एक ओर खड़ी थी और वे स्वयं निहत्थे होकर दूसरी ओर। यह कर्तव्य की परीक्षा थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी वे तुलना करते हैं, तो पाते हैं कि प्रदेश की पुलिस भी अपने कर्तव्य के प्रति उसी तरह अडिग रहती है।

मुख्यमंत्री के इस संबोधन ने सम्मेलन में मौजूद अधिकारियों में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार किया। कार्यक्रम के दौरान पुलिस बल की उपलब्धियों, भविष्य की रणनीतियों और समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारियों पर गंभीर मंथन देखने को मिला।

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