भोपाल में एआई नवाचार की नई दिशा, युवाओं और नीति-निर्माण की संयुक्त शक्ति का प्रदर्शन
भोपाल। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत ने वैश्विक मंच पर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए उपयोग के स्तर पर दुनिया में तीसरा स्थान प्राप्त कर लिया है। यह उपलब्धि देश के युवाओं की प्रतिभा, तकनीकी क्षमता और सरकार की दूरदर्शी नीतियों का परिणाम मानी जा रही है। इसी क्रम में राजधानी भोपाल के ताज लेक फ्रंट में आयोजित मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026 ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि भारत के साथ-साथ मध्यप्रदेश भी एआई आधारित नवाचार और क्रियान्वयन का मजबूत केंद्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
इस सम्मेलन का शुभारंभ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया। कार्यक्रम में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव और इंडिया एआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक सिंह सहित अनेक तकनीकी विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और युवा उद्यमी मौजूद रहे। सम्मेलन का उद्देश्य एआई के माध्यम से शासन, उद्योग, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को साझा करना और भविष्य की दिशा तय करना रहा।
अभिषेक सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत आज एआई के क्रियान्वयन के मामले में विश्व में तीसरे स्थान पर है, जो देश की तकनीकी क्षमता और मजबूत नीतिगत ढांचे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा न केवल देश के भीतर बल्कि वैश्विक तकनीकी कंपनियों में भी नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा रहे हैं। यह स्थिति वर्षों से की जा रही योजनाबद्ध तैयारी, सुदृढ़ शिक्षा व्यवस्था और सरकार द्वारा विकसित अनुकूल नवाचार वातावरण का प्रतिफल है।
भारत एआई मिशन बना एआई क्रांति की मजबूत नींव
अभिषेक सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए भारत एआई मिशन को देश की एआई क्रांति की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि यह मिशन सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित है, जिनमें उन्नत कंप्यूटिंग ढांचा, डेटा और मॉडल विकास, एआई आधारित अनुप्रयोग, भरोसा और नैतिकता, भविष्य कौशल, स्टार्टअप वित्तपोषण और नवाचार केंद्र शामिल हैं। मिशन के तहत दस हजार ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट का राष्ट्रीय कंप्यूटिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है, जिससे स्टार्टअप, शोध संस्थान और छात्र विश्वस्तरीय संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे।
उन्होंने जानकारी दी कि इसके लिए दस हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावनाएं हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि भारत एक स्वदेशी चैट आधारित एआई मंच विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसे फरवरी 2026 में प्रारंभ किए जाने की तैयारी है। यह मंच भारतीय भाषाओं, सांस्कृतिक संदर्भों और डेटा गोपनीयता को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा और इसे खुला स्रोत रखा जाएगा, ताकि देश के डेवलपर और स्टार्टअप अपनी जरूरत के अनुसार इसका उपयोग कर सकें।
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तेजी से बढ़ता भारत का एआई स्टार्टअप तंत्र
सम्मेलन में यह तथ्य भी सामने आया कि भारत का एआई स्टार्टअप तंत्र दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वालों में शामिल है। देश में इस समय पांच हजार से अधिक एआई आधारित स्टार्टअप सक्रिय हैं, जो स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, वित्तीय सेवाओं और शासन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार कर रहे हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय विज्ञान संस्थान और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों से निकलने वाले युवा शोधकर्ता जेनरेटिव एआई, डीप लर्निंग और कंप्यूटर दृष्टि जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। अभिषेक सिंह ने कहा कि यही युवा भारत को वैश्विक एआई नेतृत्व की ओर ले जा रहे हैं।
सम्मेलन में एआई को आम नागरिकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से भाषिणी मंच पर भी विशेष चर्चा हुई। यह मंच बाईस से अधिक भारतीय भाषाओं में एआई आधारित अनुवाद और भाषा सेवाएं उपलब्ध कराता है। इसके माध्यम से सरकारी योजनाएं, डिजिटल सेवाएं और शैक्षणिक सामग्री स्थानीय भाषाओं में लोगों तक पहुंच रही हैं, जिससे डिजिटल समावेशन को नई मजबूती मिली है।
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मध्यप्रदेश बन रहा एआई का उभरता केंद्र
एमपी रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026 में मध्यप्रदेश की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। राज्य में एआई डेटा प्रयोगशालाएं, कौशल विकास केंद्र और स्टार्टअप सहायता तंत्र विकसित किए जा रहे हैं। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों में स्थापित हो रही एआई डेटा लैब्स के माध्यम से हजारों युवाओं को डेटा विज्ञान और एआई में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे न केवल रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, बल्कि मध्यप्रदेश को एक उभरते एआई केंद्र के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
हालांकि एआई के विस्तार के साथ चुनौतियां भी सामने हैं, जिनमें डेटा गोपनीयता, कौशल अंतर और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल संपर्क की कमी शामिल है। सम्मेलन में यह भी स्पष्ट किया गया कि सरकार की नीतियां और निजी क्षेत्र की भागीदारी इन चुनौतियों के समाधान की दिशा में सक्रिय हैं। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून, कौशल भारत और भारत एआई मिशन जैसी पहलें इन समस्याओं से निपटने के लिए ठोस आधार तैयार कर रही हैं।
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