अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार में एक झटके में 300 कर्मचारियों की विदाई
अमेरिका के मशहूर और प्रभावशाली अखबार वॉशिंगटन पोस्ट में बुधवार को बड़े पैमाने पर छंटनी की गई, जिसने पूरी पत्रकार बिरादरी को झकझोर कर रख दिया। करीब 800 पत्रकारों और कर्मचारियों वाले इस अखबार से लगभग 300 लोगों को एक साथ बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इस छंटनी में इंटरनेशनल सेक्शन के सीनियर कॉलमिस्ट ईशान थरूर भी शामिल हैं, जो कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे हैं।
ईशान थरूर ने सोशल मीडिया पर साझा किया दर्द
ईशान थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर खुद इस छंटनी की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि वॉशिंगटन पोस्ट ने इंटरनेशनल टीम के कई बेहतरीन और अनुभवी पत्रकारों के साथ उन्हें भी नौकरी से निकाल दिया है। ईशान ने इसे न्यूज़रूम के लिए बेहद दुखद दिन बताया और कहा कि जिन लोगों को हटाया गया है, उन्होंने सालों तक विश्वस्तरीय पत्रकारिता की।
I have been laid off today from the @washingtonpost, along with most of the International staff and so many other wonderful colleagues. I’m heartbroken for our newsroom and especially for the peerless journalists who served the Post internationally — editors and correspondents…
— Ishaan Tharoor (@ishaantharoor) February 4, 2026
स्पोर्ट्स और बुक्स सेक्शन पूरी तरह बंद
छंटनी का असर सिर्फ कुछ पत्रकारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अखबार के कई अहम सेक्शन ही बंद कर दिए गए। वॉशिंगटन पोस्ट का स्पोर्ट्स सेक्शन पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। हालांकि कुछ स्पोर्ट्स रिपोर्टरों को फीचर्स डिपार्टमेंट में शिफ्ट कर दिया गया है, जहां वे खेलों से जुड़ी संस्कृति और सामाजिक पहलुओं पर लेखन जारी रखेंगे। इसके अलावा बुक्स सेक्शन को भी बंद कर दिया गया है और लोकल न्यूज सेक्शन को काफी छोटा किया जा रहा है।
‘पोस्ट रिपोर्ट्स’ पॉडकास्ट भी बंद, विदेशी डेस्क पर गहरी चोट
अखबार का लोकप्रिय डेली न्यूज पॉडकास्ट ‘पोस्ट रिपोर्ट्स’ भी अब बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही मिडिल ईस्ट, भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे अहम अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों से रिपोर्टर और एडिटर हटाए गए हैं। इससे अखबार की वैश्विक रिपोर्टिंग क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
एग्जीक्यूटिव एडिटर का बयान: पाठकों की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रहीं
वॉशिंगटन पोस्ट के एग्जीक्यूटिव एडिटर मैट मरे ने कर्मचारियों के साथ हुई बैठक में कहा कि अखबार अब पाठकों की बदलती जरूरतों को ठीक से पूरा नहीं कर पा रहा है। उन्होंने माना कि यह फैसला बेहद दर्दनाक है, लेकिन मौजूदा हालात में जरूरी हो गया था। मरे के मुताबिक, अखबार को बदलती तकनीक और पाठकों की आदतों के अनुसार खुद को ढालना होगा। आने वाले समय में अखबार का फोकस राष्ट्रीय खबरों, राजनीति, बिजनेस और स्वास्थ्य पर ज्यादा रहेगा, जबकि अन्य क्षेत्रों की कवरेज सीमित कर दी जाएगी।
मिडिल ईस्ट ब्यूरो चीफ ने जताई नाराजगी
काहिरा स्थित वॉशिंगटन पोस्ट की ब्यूरो चीफ क्लेयर पार्कर ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि पूरी मिडिल ईस्ट रिपोर्टिंग टीम को निकाल देना समझ से बाहर है। उन्होंने इसे पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया। वहीं यूक्रेन युद्ध क्षेत्र से रिपोर्टिंग कर रही पत्रकार लिजी जॉनसन को भी छंटनी का शिकार होना पड़ा। एक स्पोर्ट्स रिपोर्टर को तो इटली में विंटर ओलंपिक्स की कवरेज के दौरान ही छंटनी की सूचना मिली, बावजूद इसके उन्होंने अपनी स्टोरी फाइल करने की बात कही।
ईमेल से दी गई छंटनी की सूचना, पूर्व संपादक ने की आलोचना
कर्मचारियों को एक आंतरिक मीटिंग के बाद ईमेल के जरिए नौकरी जाने की जानकारी दी गई। वॉशिंगटन पोस्ट के पूर्व कार्यकारी संपादक मार्टिन बैरन ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की छंटनी अखबार की साख और ब्रांड वैल्यू को खुद ही नुकसान पहुंचाने जैसा है।
दो साल में 1,500 करोड़ रुपये का घाटा बना वजह
वॉशिंगटन पोस्ट पिछले कुछ वर्षों से लगातार घाटे में चल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2023 में अखबार को करीब 77 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था, जबकि 2024 में यह घाटा बढ़कर 100 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। कुल मिलाकर दो सालों में लगभग 177 मिलियन डॉलर यानी करीब 1,500 करोड़ रुपये का नुकसान बताया गया है। इससे पहले भी 2023 और 2025 में वॉलंटरी बायआउट्स और सीमित छंटनियां हो चुकी थीं।
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डिजिटल बदलाव, एआई और सब्सक्रिप्शन गिरावट ने बढ़ाई मुश्किल
इस भारी घाटे की सबसे बड़ी वजह डिजिटल मीडिया का बदलता स्वरूप माना जा रहा है। जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के कारण ऑनलाइन सर्च ट्रैफिक में जबरदस्त गिरावट आई है। जहां पहले गूगल सर्च के जरिए लोग वॉशिंगटन पोस्ट की खबरों तक पहुंचते थे, अब एआई टूल्स सीधे जवाब देने लगे हैं। इसके अलावा सब्सक्रिप्शन में भी भारी गिरावट आई, खासकर 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले जब अखबार ने किसी उम्मीदवार का समर्थन न करने का फैसला किया। इस फैसले से नाराज होकर लाखों पाठकों ने सदस्यता रद्द कर दी, जिससे रेवेन्यू पर और असर पड़ा।
जेफ बेजोस के स्वामित्व में चल रहा अखबार, पत्रकारिता जगत में चिंता
वॉशिंगटन पोस्ट का स्वामित्व अमेजन के संस्थापक और दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल जेफ बेजोस के पास है। इसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर छंटनी ने यह साफ कर दिया है कि पारंपरिक और डिजिटल पत्रकारिता दोनों ही गहरे आर्थिक संकट से गुजर रही हैं। यह फैसला न सिर्फ वॉशिंगटन पोस्ट के लिए, बल्कि पूरी वैश्विक मीडिया इंडस्ट्री के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
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