10% की जगह अब 15% वैश्विक ट्रेरिफ

वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प महट 8 घंटे में अपने ही द्वारा लगाए गए टैरिफ को बढा दिया है उन्होंने ने वैश्विक टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान किया है। उन्होंने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। इससे पहले ट्रम्प ने शुक्रवार रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी देशों पर 10% टैरिफ लगाने की बात कही थी।

24 फरवरी से आधी रात लागू होगा नया ग्लोबल टैरिफ

सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए पूर्व वैश्विक टैरिफ को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा कि संविधान के तहत कर और टैरिफ लगाने का अधिकार केवल संसद को है, राष्ट्रपति को नहीं। अदालत के इस फैसले के तुरंत बाद ट्रम्प ने नया कदम उठाते हुए 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लागू करने का फैसला लिया था अब उसे एक बार फिर बढ़ा दिया है।

भारत के लिए क्या बदला

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, ब्रिटेन, भारत और यूरोपीय संघ सहित अमेरिका के साथ व्यापार समझौते करने वाले सभी देशों को अब 15 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना होगा। इसका अर्थ यह है कि भारत पर पहले जो 18 प्रतिशत टैरिफ प्रभावी था, वह घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगा।

भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर ट्रम्प ने कहा कि इस डील में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा मित्र बताते हुए संबंधों में स्थिरता का संकेत दिया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रम्प की तीखी प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रम्प ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अदालत का निर्णय “बहुत निराशाजनक” है और कुछ न्यायाधीशों पर उन्हें शर्म आती है। ट्रम्प ने कहा कि न्यायाधीश देश के हित में सही निर्णय लेने का साहस नहीं दिखा रहे। उन्होंने उन तीन न्यायाधीशों की सराहना की जिन्होंने बहुमत के फैसले से असहमति जताई थी।

ट्रम्प ने यह भी कहा कि कुछ न्यायाधीश देशभक्ति नहीं दिखा रहे और वे अमेरिका को मजबूत बनाने वाले कदमों का विरोध कर रहे हैं।

सेक्शन 122 के तहत नया टैरिफ

ट्रम्प प्रशासन ने नए टैरिफ को लागू करने के लिए ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 का सहारा लिया है। यह प्रावधान राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि यदि अचानक व्यापार घाटा या आर्थिक संकट का खतरा हो तो वे आयात पर अस्थायी टैरिफ लगा सकते हैं।

इस प्रावधान के तहत टैरिफ आमतौर पर 150 दिनों तक प्रभावी रह सकता है। इस दौरान सरकार स्थिति की समीक्षा करती है और आगे के कदम तय करती है। प्रशासन का कहना है कि यह नया 10 प्रतिशत टैरिफ पुराने आदेश की जगह लेगा।

हालांकि कुछ उत्पादों को इस दायरे से बाहर रखा गया है, जिनमें कुछ कृषि उत्पाद, महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक सामान और यात्री वाहन शामिल हैं। साथ ही अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने संकेत दिया है कि प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर सेक्शन 301 के तहत जांच भी शुरू की जा सकती है।

ऐतिहासिक संदर्भ: 1971 में निक्सन का फैसला

वैश्विक टैरिफ का यह कदम इतिहास की याद भी दिलाता है। वर्ष 1971 में उस समय के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने भी भुगतान संतुलन संकट के दौरान सभी देशों पर 15 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लगाया था। उस समय अमेरिका भारी आयात और कम निर्यात के कारण आर्थिक दबाव झेल रहा था।

इसी पृष्ठभूमि में 1974 में ट्रेड एक्ट पारित किया गया, ताकि भविष्य में आर्थिक आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रपति को कानूनी अधिकार मिल सकें।

वर्तमान घटनाक्रम ने अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच अधिकारों की सीमा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया है कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में आने वाले दिनों में नई अनिश्चितताएं देखने को मिल सकती हैं।

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