project cheetah: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्य प्रदेश में चीतों के पुनर्वास के लिए चलाया गया 'प्रोजेक्ट चीता' अभियान दुनिया का सबसे सफल अभियान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुनो में चीतों के सफल आगमन पर खुशी व्यक्त की और कहा कि 28 फरवरी 2026 तक बोत्सवाना से 8 और चीते लाए जाएंगे। यह परियोजना 'प्रकृति से प्रगति' का संदेश है।
चीता प्रोजेक्ट ने पूरे किए 3 वर्ष
भारत में विलुप्त हो रहे चीतों को पुनर्स्थापित करने का ऐतिहासिक प्रयास 'प्रोजेक्ट चीता' सफलतापूर्वक तीन वर्ष पूरे कर लिए हैं। सितंबर 2022 में शुरू हुई वन्यजीव संरक्षण की इस यात्रा ने सफलता की नई सीढ़ियाँ चढ़ी हैं। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते भारतीय धरती के अनुकूल ढल चुके हैं।
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गांधी सागर अभयारण्य में कुनो और उनकी दूसरी पीढ़ी के शावकों के निडर भ्रमण ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का सपना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में साकार हुआ है। भारत के अभयारण्यों में चीतों की बढ़ती संख्या भविष्य में जैव विविधता संरक्षण का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है।
एक ऐतिहासिक शुरुआत से मजबूत नींव
17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते लाए गए और प्रधानमंत्री श्री मोदी ने उन्हें कुनो अभयारण्य के संरक्षित बाड़ों में छोड़ा तथा पुनर्वास परियोजना का शुभारंभ किया। 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीतों को कुनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया।
गामिनी, आशा, वीरा और निर्वा के साथ-साथ भारत में जन्मी मुखी ने भी शावकों को जन्म दिया।
दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से 8 अब कूनो अभयारण्य में पूरी तरह से बस गए हैं और वहां के वातावरण के अनुकूल ढल चुके हैं तथा पूरी तरह स्वस्थ हैं। इनमें से 3 चीतों को गांधी सागर अभयारण्य में स्थानांतरित कर दिया गया है। दक्षिण अफ्रीका की मादा चीतों से जन्मे 10 शावक वर्तमान में जीवित और स्वस्थ हैं। भारत में जन्मी पहली वयस्क मादा चीता 'मुखी' ने भी 5 शावकों को जन्म दिया है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत में चीता पुनर्स्थापन परियोजना अब अपने प्रारंभिक चरण से आगे बढ़कर स्थायी स्थापना और प्रजनन के चरण में प्रवेश कर चुकी है।
2023 और 2026 के बीच कुनो में कुल 39 शावक पैदा हुए, 27 जीवीत
'गामिनी' दूसरी बार मां बनी है। उसके पहले बच्चे में 3 स्वस्थ किशोर शावक हैं और हाल ही में उसने 3 नए शावकों को जन्म दिया है। वीरा अपने 13 महीने के शावक के साथ खुले जंगल में घूम रही है, जबकि निरवा अपने तीन 10 महीने के शावकों के साथ एक सुरक्षित बाड़े में है। नामीबिया से आए 8 चीतों में से 3 वर्तमान में कुनो में बसे हुए हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं।
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नामीबियाई माताओं से जन्मे 12 शावक वर्तमान में जीवित हैं। 2023 और 2026 के बीच कुनो में कुल 39 शावक पैदा हुए, जिनमें से 27 शावक वर्तमान में स्वस्थ और जीवित हैं।
कुनो से गांधी सागर तक पुनर्वास यात्रा
कुनो राष्ट्रीय उद्यान के साथ-साथ गांधी सागर अभयारण्य को भी चीतों के लिए दूसरे घर के रूप में विकसित किया गया है। तीन दक्षिण अफ्रीकी चीतों को यहाँ स्थानांतरित नहीं किया जा सका। 'प्रोजेक्ट चीता' ने वन्यजीव संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा है। इस परियोजना में 450 से अधिक 'चीता मित्रों' ने सहयोग करने की इच्छा जताई, साथ ही सैकड़ों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए। इससे वन आधारित आजीविका और सामुदायिक भागीदारी को एक नई दिशा मिली है।
लक्ष्य: वर्ष 2032 तक चीतों की आबादी को आत्मनिर्भर बनाना।
परियोजना के तीन वर्षों के दौरान प्राकृतिक कारणों और अनुकूलन संबंधी चुनौतियों के चलते कुछ चीतों की मृत्यु भी हुई। हालांकि, जीवित चीतों ने भारतीय जलवायु, शिकार प्रजातियों और पारिस्थितिकी के अनुकूल खुद को ढाल लिया है, जिससे यह सिद्ध होता है कि परियोजना दीर्घकालिक सफलता की ओर अग्रसर है। सरकार का लक्ष्य 2032 तक लगभग 17 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 60-70 चीतों की आत्मनिर्भर आबादी स्थापित करना है। इसके लिए गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में एक संरक्षण प्रजनन केंद्र स्थापित किया जाएगा।

हालांकि, तीन वर्षों में देश में विलुप्त हो चुके चीतों का सफल पुन:स्थापन भारत के वन्यजीव संरक्षण का एक सशक्त उदाहरण है। प्रजनन करने वाली मादा चीतों, दूसरी पीढ़ी के शावकों का जीवित रहना और नए आवासों में उनका विस्तार इस बात का संकेत है कि चीता प्रजाति भारत की वन पारिस्थितिकी का अभिन्न अंग बन गई है।
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