स्पेन के पास डूबे रूसी जहाज को लेकर बड़ा खुलासा, न्यूक्लियर रिएक्टर ले जाने की रिपोर्ट

भूमध्य सागर में स्पेन के कार्टाजेना शहर से कुछ 60 नॉटिकल मील दूर एक रूसी जहाज के डूबने के मामले में बड़ा खुलासा सामने आया है। यह हादसा 23 दिसंबर 2024 को हुआ था, जब जहाज में जोरदार विस्फोट के बाद वह समुद्र में डूब गया था। रूस ने उस समय इस घटना के पीछे अमेरिका की साजिश होने का आरोप लगाया था।

इस मामले में अब करीब एक साल बाद स्पेन के अखबार ला वर्डाड (La Verdad) की जांच रिपोर्ट सामने आई है, जो दिसंबर 2025 में प्रकाशित हुई। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूसी जहाज पर दो VM-4SG न्यूक्लियर रिएक्टर के केसिंग छिपाकर ले जाए जा रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, यह सामग्री उत्तर कोरिया भेजी जा रही थी।

रूसी जहाज पर न्यूक्लियर रिएक्टर में विस्फोट, क्या अमेरिका ने रची थी खतरनाक  साजिश? पढ़ें इनसाइड स्टोरी - nuclear explosion on russian ship in 2024 was  us plotting ...

जहाज पर हुए थे तीन विस्फोट

दिसंबर 2024 में रूसी जहाज पर एक के बाद एक तीन विस्फोट हुए थे, जिसके बाद जहाज समुद्र में डूब गया। इस हादसे में जहाज पर मौजूद 16 क्रू मेंबर्स में से 14 को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि 2 क्रू मेंबर्स का अब तक कोई पता नहीं चल सका है।

जांच के दौरान जहाज के ढांचे में 50 सेंटीमीटर × 50 सेंटीमीटर का एक छेद पाया गया, जिसके किनारे अंदर की ओर मुड़े हुए थे। इससे विस्फोट की आशंका और मजबूत हुई।

रूस के दावे और जांच रिपोर्ट में अंतर

रूस ने हादसे के बाद दावा किया था कि जहाज पर केवल आइसब्रेकर के पार्ट्स, पोर्ट क्रेन और खाली कंटेनर लदे थे। लेकिन स्पेनिश जांच में पता चला है कि जहाज पर दो बड़े नीले रंग के कंटेनर भी मौजूद थे।

हवाई तस्वीरों और क्रू मेंबर्स से पूछताछ के आधार पर जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इन कंटेनरों में VM-4SG न्यूक्लियर रिएक्टर के केसिंग और उनसे जुड़े पार्ट्स थे।

VM-4SG एक सोवियत दौर का अपग्रेडेड न्यूक्लियर रिएक्टर है, जिसका इस्तेमाल प्रोजेक्ट 667BDRM डेल्टा-IV श्रेणी की परमाणु पनडुब्बियों में किया जाता है।

भारत से जुड़ा कनेक्शन भी आया सामने

शुरुआती जांच के दौरान यह दावा किया गया कि VM-4SG जैसे रिएक्टर भारत की INS अरिहंत क्लास परमाणु पनडुब्बियों में भी इस्तेमाल होते हैं। हालांकि, भारत ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

भारत सरकार ने साफ किया है कि INS अरिहंत क्लास में इस्तेमाल होने वाला CLWR-B1 न्यूक्लियर रिएक्टर पूरी तरह स्वदेशी है और उसका इस मामले से कोई संबंध नहीं है।

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