भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक संपन्न
संघ और शिव एक समान है - पंडित प्रदीप मिश्रा
भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक सद्भाव कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज का स्वभाव रहा है। समाज में सज्जन शक्ति का जागरण, आचरण में पंच परिवर्तन और निरंतर सद्भावना संवाद आज की अनिवार्य आवश्यकता है। यह बैठक दो सत्रों में आयोजित की गई। प्रथम सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पण के साथ हुआ। मंच पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा तथा मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पांडेय उपस्थित रहे। मध्यभारत प्रान्त के 16 शासकीय जिलों के समाज के विभिन्न वर्गों और संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता इस बैठक की विशेषता रही। इस अवसर पर सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि समाज शब्द का अर्थ ही समान गंतव्य की ओर बढ़ने वाला समूह है। भारतीय समाज की कल्पना सदैव ऐसी रही है जिसमें जीवन भौतिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से सुखी हो। हमारे ऋषि-मुनियों ने यह समझा कि अस्तित्व एक है, केवल देखने की दृष्टि अलग-अलग है। उनकी तपस्या और साधना से ही राष्ट्र का निर्माण हुआ और वही हमारी सांस्कृतिक नींव है।
समाज को जोड़कर रखने का काम सद्धभावना करती है
सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा कि कानून समाज को नियंत्रित कर सकता है, लेकिन समाज को चलाने और जोड़कर रखने का कार्य सद्भावना ही करती है। विविधता के बावजूद एकता ही हमारी पहचान है। बाहरी रूप से हम अलग दिख सकते हैं, लेकिन राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के स्तर पर हम सभी एक हैं। इसी विविधता में एकता को स्वीकार करने वाला समाज हिंदू समाज है। उन्होंने कहा कि हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि एक स्वभाव है, जो मत, पूजा पद्धति या जीवनशैली के आधार पर झगड़ा नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में भ्रम फैलाकर जनजातीय और अन्य वर्गों को यह कहकर तोड़ने का प्रयास किया गया कि वे अलग हैं, जबकि सच्चाई यह है कि हजारों वर्षों से अखंड भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है। संकट के समय ही नहीं, बल्कि हर समय सद्भावना बनाए रखना आवश्यक है। मिलना, संवाद करना और एक-दूसरे के कार्यों को जानना ही सद्भावना की पहली शर्त है। उन्होंने कहा कि समर्थ को दुर्बल की सहायता करनी चाहिए।
समाज से राष्ट्र तक का भाव - पंडित प्रदीप मिश्रा
पहले सत्र में पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सभी समाज अपने-अपने स्तर पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन यह प्रश्न भी आवश्यक है कि हमने राष्ट्र के लिए क्या किया और राष्ट्र को क्या दिया। उन्होंने कहा कि संघ और शिव के भाव में अद्भुत समानता है। जैसे शिव ने समस्त सृष्टि के लिए विष पिया, वैसे ही संघ प्रतिदिन आरोपों का विष पीकर भी संयम और राष्ट्रहित में कार्य करता है। उन्होंने कहा कि जन्म चाहे किसी भी जाति में हुआ हो, पहचान अंतत: हिंदू, सनातनी और भारतीय की ही है। प्रत्येक भारतीय में राष्ट्रोत्थान और समाजोत्थान की अद्भुत क्षमता है। धर्मांतरण को उन्होंने केवल वर्तमान पीढ़ी ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रभावित करने वाला गंभीर षड्यंत्र बताया और इसके प्रति समाज को सजग रहने का आह्वान किया।
घर-घर मिट्टी के शिवलिंग की पूजा सामाजिक समरसता का सशक्त उदाहरण
पंडित मिश्रा ने 'ग्रीन महाशिवरात्रिÓ जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि घर-घर मिट्टी के शिवलिंग की पूजा सामाजिक समरसता का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सद्भाव बैठक का मूल उद्देश्य यही है कि हम अपने साथ-साथ अपने पड़ोसी और समाज को भी लेकर आगे बढ़ें। जैसे लंगर में जाति नहीं पूछी जाती, वैसे ही राष्ट्र निर्माण के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए।
समाजों के कार्यों का प्रतिवेदन: सद्भाव का जीवंत स्वरूप
कार्यक्रम के प्रारंभ में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों द्वारा अपने-अपने कार्यों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। तेली साहू समाज की ओर से श्री मेवा लाल साहू ने बताया कि समाज 1911 से घर वापसी और आर्थिक उन्नयन के लिए कार्य कर रहा है। जैन मिलन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र जैन ने पर्यावरण संरक्षण, गौशाला संचालन, स्वास्थ्य सेवा, रक्तदान और शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे कार्यों की जानकारी दी। मीणा समाज सेवा संगठन के रामनिवास रावत ने प्रकृति संरक्षण, पौधारोपण और पर्यावरण जागरूकता के प्रयासों का उल्लेख किया। अखिल भारतीय यादव महासभा के श्री कृष्णा संघर्ष यादव ने शिक्षा, स्वास्थ्य, करियर मार्गदर्शन और पर्यावरण संरक्षण में किए जा रहे प्रयासों को साझा किया। सोंधिया राजपूत समाज के प्रताप सिंह सिसोदिया ने फिजूलखर्ची रोकने, सामूहिक विवाह, शिक्षा, संस्कार और जैविक खेती को बढ़ावा देने की जानकारी दी। स्पोर्ट्स एवं शास्त्रीय नाट्य के क्षेत्र से जुड़े डॉ. केशव पांडे ने 55 देशों में भारतीय कला संस्कृति के प्रचार और नदी पुनर्जीवन जैसे कार्यों का प्रतिवेदन दिया। रघुवंशी समाज के अमित रघुवंशी ने शिक्षा, आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण के प्रयासों की जानकारी दी। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के सुनील श्रीवास्तव ने वैवाहिक परिचय सम्मेलन, रोजगार मेले और मंदिर जोड़ो अभियान का उल्लेख किया। जाटव समाज के रामावतार मौर्य ने समाज में नवचेतना, धर्मांतरण रोकने और सामाजिक अधिकारों के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। माहेश्वरी समाज की रंजना बहेती ने 'बेटी ब्याहो और बहू पढ़ाओÓ जैसे अभियानों और महिला आत्मरक्षा कार्यक्रमों का उल्लेख किया। राजपूत महापंचायत के अभय परमार ने सामाजिक आयोजनों और शस्त्र लाइसेंस संबंधी शिविरों की जानकारी दी। भार्गव समाज के मयंक भार्गव ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक सहायता और गोंडी भाषा संरक्षण के प्रयासों को साझा किया।
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