भारत ने वेनेजुएला के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की, भारतीयों को सतर्क रहने की सलाह

पीटीआई, नई दिल्ली।
भारत सरकार ने वेनेजुएला में अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों से वेनेजुएला की यात्रा से बचने और वहां पहले से मौजूद भारतीयों को अत्यधिक सावधान रहने की सलाह दी है।

वेनेजुएला में भारतीयों के लिए भारत सरकार ने जारी की एडवाइजरी, गैर-जरूरी  यात्रा न करने की दी सलह... हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध - Amrit Vichar

अमेरिका की ओर से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर बने हालात के बाद यह एडवाइजरी जारी की गई है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारतीय नागरिक वेनेजुएला की गैर-जरूरी यात्रा न करें।

मंत्रालय ने वेनेजुएला में रहने वाले सभी भारतीयों से अपनी गतिविधियों को सीमित रखने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। साथ ही उनसे कहा गया है कि वे काराकास स्थित भारतीय दूतावास के लगातार संपर्क में रहें।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल वेनेजुएला में करीब 50 गैर-निवासी भारतीय और लगभग 30 भारतीय मूल के लोग रह रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति में भारतीय नागरिकों से दूतावास से तुरंत संपर्क करने को कहा गया है।

MEA Advisory on Venezuela: वेनेजुएला के हालात पर भारत सरकार सतर्क, नागरिकों  को यात्रा न करने की सलाह, हेल्पलाइन जारी | india issues travel advisory for  venezuela citizens asked to ...

मादुरो बस ड्राइवर से राष्ट्रपति तक का सफर तय कर चुके हैं 

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का जन्म 23 नवंबर 1962 को हुआ था। वह एक श्रमिक नेता के बेटे हैं और अपने शुरुआती जीवन में बस ड्राइवर के रूप में काम कर चुके हैं। वर्ष 1992 में उन्होंने तत्कालीन सैन्य अधिकारी ह्यूगो शावेज के साथ राजनीति में कदम बढ़ाया और जल्द ही उनके करीबी बन गए।

1998 में ह्यूगो शावेज के नेतृत्व में मादुरो ने चुनाव लड़ा। शावेज सरकार के समय मादुरो नेशनल असेंबली के अध्यक्ष और बाद में विदेश मंत्री बने। विदेश मंत्री रहते हुए उन्होंने वेनेजुएला के तेल व्यापार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया।

ह्यूगो शावेज ने अपने निधन से पहले मादुरो को अपना उत्तराधिकारी चुना था। वर्ष 2013 में शावेज के निधन के बाद मादुरो राष्ट्रपति बने।

मादुरो के शासन में बढ़ा आर्थिक संकट

निकोलस मादुरो के शासनकाल में वेनेजुएला गंभीर आर्थिक संकट से जूझता रहा। देश में महंगाई अपने चरम पर पहुंच गई और आम लोगों को खाद्य संकट का सामना करना पड़ा। मादुरो सरकार पर चुनावों में धांधली और मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं।

साल 2014 और 2017 में सरकार विरोधी आंदोलनों को सुरक्षा बलों द्वारा सख्ती से दबाया गया। जनवरी 2025 में हुए राष्ट्रीय चुनाव में मादुरो तीसरी बार वेनेजुएला के राष्ट्रपति चुने गए।

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