अमेरिका के साथ मिलकर कार्रवाई की पुष्टि, नागरिकों से सतर्क रहने की अपील
इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश जारी कर देश और दुनिया को संबोधित किया। अपने बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि इजराइल और अमेरिका ने मिलकर एक संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य ईरान के अयातुल्ला शासन से उत्पन्न “अस्तित्वगत खतरे” को समाप्त करना है।
नेतन्याहू ने कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक आवश्यक होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संघर्ष लंबा चल सकता है और इसके लिए धैर्य की आवश्यकता होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इजराइल किसी भी स्थिति में ऐसे शासन को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा, जिसे वह “आतंकी और हिंसक” मानता है।
VIDEO | Israel Prime Minister Benjamin Netanyahu (@netanyahu) issues video statement.
— Press Trust of India (@PTI_News) March 1, 2026
He says, "Israel and the United States have launched a joint operation to remove the existential threat to Israel posed by the Ayatollahs' regime in Iran. I told you: the operation will… pic.twitter.com/lejYTUgg3n
अमेरिका के साथ घनिष्ठ समन्वय
अपने संबोधन में नेतन्याहू ने अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व और समर्थन के लिए वे आभारी हैं। नेतन्याहू ने बताया कि उन्होंने उसी सुबह ट्रंप से दोबारा बातचीत की और दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग की सराहना की।
इस बयान से स्पष्ट है कि यह अभियान केवल इजराइल की एकतरफा कार्रवाई नहीं, बल्कि अमेरिका के साथ समन्वित रणनीति का हिस्सा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की सार्वजनिक पुष्टि क्षेत्रीय समीकरणों पर व्यापक असर डाल सकती है।
परमाणु कार्यक्रम पर कड़ा रुख
नेतन्याहू ने अपने संदेश में दोहराया कि इजराइल किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु हथियारों से लैस होने नहीं देगा। उनका कहना था कि यदि अयातुल्ला शासन परमाणु क्षमता प्राप्त करता है, तो यह इजराइल की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा होगा।
इजराइल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतित रहा है। समय-समय पर उसने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाया है और आवश्यकता पड़ने पर सैन्य विकल्प अपनाने की चेतावनी भी दी है।
ईरानी नागरिकों से अपील
नेतन्याहू के संदेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ईरान की जनता को संबोधित था। उन्होंने ईरानी नागरिकों से कहा कि वे “इस अवसर को न चूकें” और अपने भविष्य तथा स्वतंत्रता के लिए एकजुट हों। इस अपील को कई विश्लेषक ईरान के भीतर राजनीतिक बदलाव की संभावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि ईरान की सरकार की ओर से इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना है। ईरान पहले भी बाहरी हस्तक्षेप के आरोपों को सख्ती से खारिज करता रहा है।
इजराइली नागरिकों को सुरक्षा निर्देश
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इजराइल के नागरिकों से भी विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि सभी लोग गृह मोर्चा कमान के निर्देशों का पालन करें और सुरक्षा एजेंसियों के दिशा-निर्देशों पर ध्यान दें।
हाल के दिनों में क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसे में इजराइल ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने, सुरक्षित स्थानों के पास रहने और आपातकालीन चेतावनियों का पालन करने को कहा है।
क्षेत्रीय प्रभाव और आगे की दिशा
नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं। संयुक्त अभियान की घोषणा ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में सैन्य कार्रवाई और तेज हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजराइल की संयुक्त रणनीति क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर ऊर्जा बाजार, वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
नेतन्याहू के शब्दों में स्पष्ट संदेश था कि इजराइल पीछे हटने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा कि देश एकजुट होकर खड़ा रहेगा और हर खतरे का सामना करेगा। इस बयान ने यह संकेत दिया है कि मौजूदा टकराव केवल सीमित कार्रवाई नहीं, बल्कि व्यापक रणनीतिक अभियान का हिस्सा है।
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