वॉशिंगटन। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को रद्द कर दिया। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले को डोनाल्ड ट्रंप के आर्थिक एजेंडे के एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर मिली बड़ी हार माना जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला ट्रंप की ओर से आपातकालीन शक्तियों के कानून के तहत एकतरफा रूप से लगाए गए टैरिफ पर केंद्रित है, जिसमें लगभग हर दूसरे देश पर लगाए गए व्यापक पारस्परिक टैरिफ भी शामिल हैं। 

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ट्रम्प ने पिछले साल अप्रैल में ग्लोबल टैरिफ का ऐलान किया था।

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने 6-3 के इस फैसले से डोनाल्ड ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ को खत्म कर दिया है। बहुमत ने पाया कि संविधान बहुत स्पष्ट रूप से कांग्रेस को कर लगाने का अधिकार देता है, जिसमें टैरिफ भी शामिल हैं। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा कि संविधान निर्माताओं ने कर लगाने की शक्ति का कोई भी हिस्सा कार्यपालिका शाखा को नहीं सौंपा है। वहीं, न्यायाधीश कैवनॉघ ने असहमति जताते हुए लिखा कि यहां जिन टैरिफ पर सवाल उठ रहे हैं, वे समझदारी भरी नीति हो भी सकते हैं और नहीं भी। लेकिन, लिखित रूप से, इतिहास में और पूर्व उदाहरणों के आधार पर, वे स्पष्ट रूप से वैध हैं। 

ट्रंप के खिलाफ 6-3 से बहुमत वाला फैसला

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने 6-3 के इस फैसले से डोनाल्ड ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ को खत्म कर दिया है। इस फैसले से वैश्विक व्यापार, व्यवसायों, उपभोक्ताओं, मुद्रास्फीति के रुझानों और देश भर के घरेलू वित्त पर व्यापक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। पिछले एक साल में न्यायाधीशों ने अंतरिम आदेशों में प्रशासन का काफी हद तक साथ दिया था। इनमें ट्रांसजेंडर सैनिकों के सैन्य सेवा में शामिल होने पर प्रतिबंध, अमेरिकी डोज सेवा को संवेदनशील डेटा तक पहुंच प्रदान करना और कानूनी चुनौतियों के जारी रहने के दौरान शिक्षा विभाग में महत्वपूर्ण कटौती जैसी नीतियों को अनुमति मिली थी।

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