अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष लगातार तेज, हजारों लोगों की मौत और भारी तबाही के बीच अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी
तेल अवीव/तेहरान : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। युद्ध का सातवां दिन बीतते-बीतते मध्य पूर्व के कई देशों में भारी तबाही और मानवीय संकट की तस्वीर सामने आने लगी है। ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार अमेरिका और इजराइल के हमलों में अब तक देशभर में 1200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग घायल हुए हैं। दूसरी ओर इजराइल के हमलों की वजह से लेबनान में भी हालात बिगड़ गए हैं और करीब 5 लाख लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा है।
युद्ध के बढ़ते दायरे के बीच ईरान ने भी इजराइल पर क्लस्टर बमों से हमला कर जवाब दिया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को संभावित उत्तराधिकारी मानने से साफ इनकार कर दिया है।
ईरान में भारी तबाही, हजारों घर और दुकानें क्षतिग्रस्त
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के कारण पूरे देश में भारी नुकसान हुआ है। शुरुआती आकलन के मुताबिक 3,000 से अधिक घर और लगभग 500 दुकानें पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इन हमलों का सबसे अधिक असर राजधानी तेहरान में देखा गया है, जहां लगातार बमबारी के कारण कई इलाके पूरी तरह तबाह हो गए हैं।
ईरान में अब तक लगभग 1300 हवाई हमलों की सूचना सामने आई है, जिनमें 14 चिकित्सा केंद्र भी निशाना बने हैं। कई अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं के क्षतिग्रस्त होने से घायलों के इलाज में भी गंभीर कठिनाइयां पैदा हो गई हैं। युद्ध की वजह से देश के कई हिस्सों में पानी और बिजली की आपूर्ति ठप पड़ गई है, जिससे आम नागरिकों की स्थिति और अधिक कठिन हो गई है।
इजराइल का दावा : ईरान के 300 मिसाइल लॉन्चर तबाह
इजराइली सेना का कहना है कि उसने अब तक ईरान के लगभग 300 मिसाइल लॉन्चर नष्ट कर दिए हैं। सेना के अनुसार यह कार्रवाई ईरान की मिसाइल क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई है। इजराइल का दावा है कि लगातार सैन्य हमलों के कारण ईरान के कई सामरिक ठिकाने पूरी तरह निष्क्रिय हो गए हैं।
हालांकि ईरान का कहना है कि उसने भी पलटवार करते हुए खाड़ी क्षेत्र में स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाया है। ईरान के अनुसार कुवैत, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद करीब 20 अमेरिकी सैन्य अड्डों को उसके हमलों से प्रभावित किया गया है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
लेबनान में मानवीय संकट, लाखों लोग घर छोड़ने को मजबूर
इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ते संघर्ष का असर लेबनान में भी गंभीर रूप से दिखाई दे रहा है। इजराइली सेना ने गुरुवार रात लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाके दहिया में कई बड़े हवाई हमले किए। सेना के मुताबिक इन हमलों में हिजबुल्लाह से जुड़े दफ्तरों, सैन्य ठिकानों और ड्रोन रखने वाले गोदामों को निशाना बनाया गया।
इजराइली वायुसेना का दावा है कि इस सैन्य अभियान के दौरान अब तक बेरूत के दहिया इलाके में 26 बार हवाई हमले किए जा चुके हैं। इन हमलों में 10 से अधिक ऊंची इमारतें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। इजराइल का कहना है कि इन इमारतों का उपयोग हिजबुल्लाह के सैन्य संचालन के लिए किया जा रहा था।
लगातार हो रही बमबारी के कारण लेबनान में बड़े पैमाने पर लोगों का पलायन शुरू हो गया है। इजराइली सेना के मुताबिक दक्षिणी लेबनान में 4 लाख 20 हजार से अधिक लोग अपने घर छोड़ चुके हैं, जबकि दहिया इलाके से भी हजारों लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जा चुके हैं। कुल मिलाकर लेबनान में करीब 5 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं।
बेरूत और दक्षिणी लेबनान के कई शहरों पर एयरस्ट्राइक
लेबनान की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इजराइली विमानों ने सरीफा, ऐता अल-शाब, टूलीन, सवाना और मजदल सेल्म जैसे शहरों को भी निशाना बनाया। दक्षिणी शहर टायर में एक सौर ऊर्जा संयंत्र और बिजली उत्पादन केंद्र पर भी बमबारी की गई, जिसके बाद वहां भीषण आग लग गई।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार सोमवार से अब तक इजराइली हमलों में 123 लोगों की मौत हो चुकी है और 683 लोग घायल हुए हैं। कई क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन लगातार हमलों के कारण स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
ईरान का क्लस्टर बमों से जवाब
इजराइल की कार्रवाई के जवाब में ईरान ने गुरुवार रात इजराइल पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इजराइली मीडिया के अनुसार इन मिसाइलों में क्लस्टर बम लगे हुए थे। ऐसे बमों की खासियत यह होती है कि मिसाइल का वारहेड हवा में खुल जाता है और उसके भीतर से कई छोटे-छोटे बम अलग-अलग दिशाओं में गिरते हैं।
प्रत्येक छोटे बम में लगभग 2.5 किलोग्राम विस्फोटक होता है और यह करीब 8 किलोमीटर के दायरे में फैल सकता है। ये बम जमीन पर गिरते ही विस्फोट कर देते हैं और बड़े इलाके में नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि इजराइली वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया।
युद्ध से भारी आर्थिक नुकसान
लगातार बढ़ते संघर्ष के कारण आर्थिक नुकसान भी तेजी से बढ़ रहा है। शुरुआती अनुमान के अनुसार अब तक इस युद्ध में लगभग 4.35 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। युद्ध शुरू होने के पहले 24 घंटों में ही भारी सैन्य खर्च हुआ था और इसके बाद हर दिन अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
तेहरान में लगातार बमबारी के कारण 12 हजार दर्शकों की क्षमता वाला आजादी स्टेडियम भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है। अमीरकबीर शहर में मिसाइल हमले के दौरान दो छात्रों की मौत हो गई, जबकि 12 लोग घायल हुए। कई अन्य शहरों में भी भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिका का बयान : ईरान के खिलाफ कार्रवाई और तेज होगी
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि उनकी सेना ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को और तेज करने जा रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास हथियार और गोला-बारूद की कोई कमी नहीं है और आवश्यकता पड़ने पर और अधिक कार्रवाई की जाएगी।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख ब्रैड कूपर ने बताया कि युद्ध के शुरुआती दिन के मुकाबले अब ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है। उनका कहना है कि इजराइल और अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई का असर ईरान की सैन्य क्षमता पर पड़ा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से ईरान का इनकार
ईरान की सेना ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं किया है। ईरान का कहना है कि यह क्षेत्र अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण असुरक्षित हो गया है और इसी वजह से कई अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी कंपनियां वहां से गुजरने से बच रही हैं।
ईरान ने यह भी कहा कि यह युद्ध उसकी ओर से शुरू नहीं किया गया था। ईरानी सेना के अनुसार उसने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जाएगी तो जवाब भी उतना ही कठोर होगा।
ट्रम्प का बयान : खामेनेई के बेटे को उत्तराधिकारी नहीं मानेंगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की राजनीतिक स्थिति को लेकर भी बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान को नया सर्वोच्च नेता चुनने से पहले अमेरिका की भूमिका को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ट्रम्प ने स्पष्ट रूप से कहा कि अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ट्रम्प के इस बयान से क्षेत्रीय राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के बीच ऐसे बयान स्थिति को और अधिक जटिल बना सकते हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य संघर्ष, लगातार हो रही बमबारी और लाखों लोगों के विस्थापन ने पूरे क्षेत्र को गहरे संकट में डाल दिया है। यदि जल्द ही युद्धविराम या कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में मानवीय और आर्थिक संकट और अधिक गंभीर हो सकता है।
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