ईरानी संसद अध्यक्ष का तीखा बयान, संघर्ष को बताया ‘अस्तित्व की जंग’, कड़े पलटवार के संकेत

इजराइल और ईरान के बीच तेजी से बढ़ते सैन्य टकराव के बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने अमेरिका और इजराइल को सीधे संबोधित करते हुए कड़ा और आक्रामक बयान दिया है। अपने सार्वजनिक संबोधन में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि उन्होंने ईरान की “लाल रेखा” पार कर दी है और अब उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।

कालीबाफ ने कहा कि यह संघर्ष ईरान के लिए केवल सैन्य टकराव नहीं, बल्कि अस्तित्व की जंग है। उनके शब्दों में यह वर्षों से दबे गुस्से का विस्फोट है, जिसका समय अब आ गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान ऐसे “विनाशकारी प्रहार” करेगा, जिससे विरोधी देशों को झुकना पड़ेगा।

संघर्ष को बताया राष्ट्रीय सम्मान का प्रश्न

अपने संबोधन में कालीबाफ ने कहा कि ईरान किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव या धमकी को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने इसे राष्ट्र की संप्रभुता और सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया। उनके अनुसार, हालिया घटनाएं केवल सीमित सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि ईरान की राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास हैं।

कालीबाफ ने यह भी संकेत दिया कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं और रणनीतिक बल पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जवाबी कार्रवाई केवल प्रतीकात्मक नहीं होगी, बल्कि ऐसी होगी जो “इतिहास में दर्ज होगी।”

ट्रंप और नेतन्याहू पर सीधा निशाना

कालीबाफ ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू का नाम लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेता क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने और ईरान को उकसाने की नीति पर चल रहे हैं।

उनका कहना था कि यदि विरोधी पक्ष यह सोचता है कि दबाव और सैन्य शक्ति से ईरान को झुकाया जा सकता है, तो यह उनकी “सबसे बड़ी भूल” होगी। उन्होंने दोहराया कि ईरान किसी भी हमले का जवाब कई गुना ताकत से देगा।

क्षेत्रीय हालात और संभावित प्रभाव

कालीबाफ के इस बयान ने पहले से ही तनावपूर्ण माहौल को और अधिक गंभीर बना दिया है। पश्चिम एशिया में कई देशों ने अपने सुरक्षा स्तर बढ़ा दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी बढ़ते टकराव को लेकर चिंतित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संसद अध्यक्ष का यह बयान केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि संभावित सैन्य रणनीति का संकेत हो सकता है। ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में संसद अध्यक्ष का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और ऐसे वक्तव्य आमतौर पर व्यापक नीति-संदेश का हिस्सा होते हैं।

आगे क्या?

कालीबाफ की चेतावनी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि ईरान पीछे हटने के मूड में नहीं है। यदि हालात इसी दिशा में बढ़ते रहे, तो क्षेत्र में व्यापक सैन्य टकराव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

ईरान ने संकेत दिया है कि वह इसे निर्णायक क्षण मानता है। दूसरी ओर, अमेरिका और इजराइल की ओर से भी कड़े बयान सामने आ रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिन पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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