अवामी लीग से जुड़े प्रलय चकी की जेल हिरासत में तबीयत बिगड़ी, इलाज के दौरान अस्पताल में निधन
ढाका। बांग्लादेश में पुलिस और जेल हिरासत के दौरान एक हिंदू नेता की मौत ने देश की राजनीति और मानवाधिकार स्थिति पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग से जुड़े हिंदू नेता प्रलय चकी की पुलिस और जेल हिरासत में मौत हो गई। इस घटना के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता और गहरा गई है।
कौन थे प्रलय चकी
60 वर्षीय प्रलय चकी अवामी लीग की पाबना जिला इकाई में सांस्कृतिक मामलों के सचिव थे। वे न केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता थे, बल्कि एक प्रसिद्ध गायक के रूप में भी उनकी पहचान थी। सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से वे लंबे समय से पार्टी और समाज में सक्रिय भूमिका निभाते रहे थे। उनकी गिनती बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के प्रभावशाली नेताओं में होती थी।
गिरफ्तारी और मामला क्या था
बांग्लादेशी अख़बार द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, प्रलय चकी को 2024 के ‘भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन’ से जुड़े एक विस्फोट मामले में गिरफ्तार किया गया था। यही आंदोलन आगे चलकर ‘जुलाई विद्रोह’ में तब्दील हुआ, जिसने शेख हसीना की सत्ता से विदाई की भूमिका बनाई। आरोप है कि चकी को बिना नामजद किए हिरासत में लिया गया और बाद में विस्फोट मामले में फंसाया गया।
जेल हिरासत में बिगड़ती तबीयत
पाबना जेल अधीक्षक मोहम्मद ओमर फारूक के अनुसार, प्रलय चकी पहले से ही मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। जेल प्रशासन का कहना है कि तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले पाबना सदर अस्पताल भेजा गया। वहां हालत में सुधार न होने पर शुक्रवार रात उन्हें राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान रविवार रात उनकी मौत हो गई।
परिवार के गंभीर आरोप
प्रलय चकी के परिवार ने जेल प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके बेटे सोनी चकी का कहना है कि उनके पिता को बिना ठोस आधार के गिरफ्तार किया गया और बाद में एक गंभीर मामले में फंसा दिया गया। परिवार का आरोप है कि जेल में रहते हुए उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन न तो समय पर परिवार को सूचना दी गई और न ही उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते इलाज किया जाता, तो उनकी जान बच सकती थी।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है। मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने हिरासत में मौत को बेहद गंभीर मामला बताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि राजनीतिक अस्थिरता के दौर में अल्पसंख्यक नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जो लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
प्रलय चकी की मौत की खबर सामने आते ही अवामी लीग समर्थकों और हिंदू संगठनों में आक्रोश फैल गया। कई संगठनों ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। वहीं, सरकार और जेल प्रशासन का कहना है कि मौत बीमारी के कारण हुई और मामले में सभी नियमों का पालन किया गया।
आगे की राह
मामला अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है। परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं और निष्पक्ष जांच की अपील कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बांग्लादेशी प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाता है और क्या हिरासत में मौत के आरोपों की पारदर्शी जांच होती है।
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