वैश्विक बाजारों में बिकवाली और आरबीआई नीति से पहले सतर्कता, आईटी और ऑटो शेयरों पर दबाव
नई दिल्ली। हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। वैश्विक संकेतों में नकारात्मक रुख और भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के नतीजों से पहले निवेशकों की सतर्कता के कारण शुरुआती कारोबार में बिकवाली देखने को मिली। इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ नजर आया और बाजार लाल निशान में कारोबार करता दिखाई दिया।
सुबह के कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 212.16 अंक यानी करीब 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,101.77 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 82.25 अंक यानी 0.32 प्रतिशत फिसलकर 25,560.55 के स्तर पर ट्रेड करता रहा।
शुरुआती कारोबार में अधिकांश शेयरों पर दबाव
शुरुआती सत्र में सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 16 शेयरों में मामूली बढ़त देखने को मिली, जबकि 14 शेयर लाल निशान में खुले। निफ्टी-50 की स्थिति और कमजोर रही, जहां केवल 17 शेयरों में तेजी दिखी और 33 शेयर नुकसान के साथ कारोबार करते नजर आए। बाजार की चौड़ाई कमजोर रहने से निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली
आज के कारोबार में आईटी सेक्टर के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव देखने को मिला। इसके साथ ही ऑटो, एफएमसीजी, फार्मा, मीडिया, प्राइवेट बैंक और मेटल सेक्टर के शेयरों में भी गिरावट का रुख बना रहा। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो अधिकांश सेक्टर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में फिलहाल व्यापक स्तर पर जोखिम लेने की धारणा कमजोर है।
वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत
एशियाई बाजारों से भी घरेलू शेयर बाजार को खास समर्थन नहीं मिला। जापान का निक्केई इंडेक्स सीमित बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स तेज गिरावट में रहा। हांगकांग का हैंगसेंग और चीन के बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र में भारी बिकवाली रही थी, जहां डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 सभी सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए थे। इन कमजोर वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजार की धारणा पर साफ दिखाई दिया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव
बाजार पर दबाव बढ़ने की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी रही। आंकड़ों के अनुसार 5 फरवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 1,692 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने उसी दिन लगभग 924 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की। लंबे समय के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिसंबर 2025 में विदेशी निवेशकों ने भारी मात्रा में शेयर बेचे थे, जबकि घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी ने बाजार को बड़े नुकसान से बचाया था।
एक दिन पहले भी बाजार रहा था कमजोर
इससे पहले गुरुवार को भी शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी। सेंसेक्स 503 अंक टूटकर 83,313 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 113 अंक गिरकर 25,642 पर बंद हुआ था। उस सत्र में मेटल सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली थी। इसके अलावा ऑटो, वित्तीय सेवाएं, एफएमसीजी, आईटी, फार्मा, मीडिया, रियल्टी और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में भी दबाव बना रहा था।
निवेशकों की नजर आरबीआई के फैसले पर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल निवेशक किसी बड़े दांव से बचते नजर आ रहे हैं। इसकी मुख्य वजह भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के नतीजे और वैश्विक आर्थिक संकेत हैं। ब्याज दरों और भविष्य के नीति संकेतों को लेकर स्पष्टता आने के बाद ही बाजार की दिशा तय होने की संभावना जताई जा रही है। तब तक उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है।
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