तीव्रता 2.2 से 4.5 के बीच दर्ज, जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं, लोगों में दहशत

गंगटोक। सिक्किम में गुरुवार देर रात से शुक्रवार सुबह तक भूकंप के असामान्य झटकों ने लोगों को दहशत में डाल दिया। राज्य के चार जिलों मंगन, नामची, गंगटोक और गेजिंग में कुल 13 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। इन झटकों की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.2 से 4.5 के बीच दर्ज की गई। राहत की बात यह रही कि किसी भी जिले से जान-माल के नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई है।

चार जिलों में महसूस हुए लगातार झटके

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भूकंप के झटकों का सिलसिला गुरुवार देर रात शुरू हुआ और शुक्रवार तड़के तक जारी रहा। सबसे पहला झटका गेजिंग जिले में रात 1 बजकर 9 मिनट पर महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 4.5 दर्ज की गई। इसके कुछ ही मिनट बाद गंगटोक जिले में 1 बजकर 15 मिनट पर 3.1 तीव्रता का झटका महसूस हुआ। इसके बाद मंगन और नामची जिलों में लगातार हल्के से मध्यम तीव्रता के झटके आते रहे, जिससे लोगों की नींद टूट गई और वे घरों से बाहर निकल आए।

मंगन में सबसे अधिक सात झटके

आंकड़ों के मुताबिक, कुल 13 झटकों में से सबसे अधिक सात झटके मंगन जिले में दर्ज किए गए। नामची जिले में चार बार, जबकि गंगटोक और गेजिंग में एक-एक बार धरती हिली। मंगन जिले में रात 1 बजकर 23 मिनट पर 2.2 तीव्रता का झटका दर्ज हुआ, इसके बाद 2 बजकर 3 मिनट पर 2.5, 2 बजकर 56 मिनट पर 2.4, 2 बजकर 59 मिनट पर 2.5, 3 बजकर 36 मिनट पर 2.8, 3 बजकर 52 मिनट पर 2.7 और 4 बजकर 57 मिनट पर 2.2 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। लगातार झटकों के कारण इस जिले में सबसे अधिक डर का माहौल रहा।

नामची में भी बार-बार कांपी धरती

नामची जिले में भी भूकंप की गतिविधि लगातार बनी रही। यहां 2 बजकर 20 मिनट पर 3.9 तीव्रता, 2 बजकर 43 मिनट पर 2.4 तीव्रता, 3 बजकर 11 मिनट पर 4.0 तीव्रता और अंत में सुबह 5 बजकर 29 मिनट पर 2.9 तीव्रता का झटका दर्ज किया गया। सुबह-सुबह आए अंतिम झटके के बाद लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन भय का माहौल कुछ समय तक बना रहा।

सरकारी एजेंसियों की निगरानी, स्थिति सामान्य

केंद्र सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने इन सभी झटकों की पुष्टि की है। एजेंसी के अनुसार, भूकंप की तीव्रता हल्की से मध्यम श्रेणी की रही, इसलिए बड़े नुकसान की आशंका नहीं थी। राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन इकाइयां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

लोगों में दहशत, पुरानी यादें ताजा

लगातार झटकों के कारण कई इलाकों में लोग दहशत में आ गए। रात के समय झटके महसूस होते ही कई परिवार घरों से बाहर निकल आए और खुले स्थानों पर खड़े होकर हालात सामान्य होने का इंतजार करने लगे। खासकर बुजुर्गों और बच्चों में डर देखा गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार कंपन से उन्हें वर्ष 2011 की भयावह त्रासदी की याद आ गई।

2011 का विनाशकारी भूकंप अब भी यादों में

उल्लेखनीय है कि 18 सितंबर 2011 को सिक्किम में 6.9 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसका केंद्र उत्तर सिक्किम में था। उस भूकंप से राज्य में भारी जान-माल का नुकसान हुआ था और इसके झटके पड़ोसी देशों तक महसूस किए गए थे। उसी घटना के बाद से राज्य के लोग भूकंप को लेकर बेहद संवेदनशील हैं, इसलिए हल्के झटके भी चिंता बढ़ा देते हैं।

भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र

सिक्किम हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां समय-समय पर हल्के और मध्यम तीव्रता के झटके आते रहते हैं, जो भूगर्भीय प्लेटों की गतिविधि का संकेत होते हैं। हालांकि, ऐसे झटकों को हल्के में लेना उचित नहीं है और सतर्कता आवश्यक है।

प्रशासन की अपील

राज्य प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। साथ ही भूकंप के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करने, खुले स्थानों में रहने और आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

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